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फूटा आक्रोश:धान के रेट, गन्ने के बोनस पर किसानों ने कवर्धा में सात रास्तों पर किया चक्काजाम

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 9 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
फूटा आक्रोश:धान के रेट, गन्ने के बोनस पर किसानों ने कवर्धा में सात रास्तों पर किया चक्काजाम

भारतीय किसान संघ की “बलराम किसान न्याय यात्रा’ में गुरुवार को जिलेभर से हजारों किसान पहुंचे थे। किसानों ने सैकड़ों ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को सड़क पर खड़े कर शहर की चारों तरफ से घेराबंदी कर दी। एक साथ 7 रास्तों पर चक्काजाम किया। सुबह 11 बजे शुरू हुआ चक्काजाम देर शाम तक जारी रहा। नेशनल हाईवे- 30 पर रायपुर रोड, जोराताल न्यू पुलिस लाइन, राजनांदगांव रोड, समनापुर रोड, न्यू बस स्टैंड और खुंटू नर्सरी रोड पर एक साथ चक्काजाम किया गया।

शहर में प्रवेश करने और बाहर निकलने वाले वाहनों की आवाजाही थम गई। कई जगह सड़क पर वाहनों की कतार लग गई, तो कई यात्रियों को बसों से उतरकर पैदल ही आगे जाना पड़ा। अच्छी बात यह रही कि सड़क पर पूरी तरह ट्रैक्टर खड़े होने के बावजूद किसानों ने करीब 10 फीट की जगह खाली छोड़ रखी थी। ताकि एंबुलेंस सेवाएं जारी रहें।

जाम में फंसी बसें, यात्रियों को बीच रास्ते में उतरना पड़ा - चक्काजाम का सबसे सीधा असर बस परिवहन पर पड़ा। न्यू बस स्टैंड में 50 से ज्यादा बसें खड़ी रहीं। जाम की जानकारी मिलते ही कुछ बस संचालकों ने रायपुर, बिलासपुर और राजनांदगांव जाने वाली बसों को बैरियर के बाहर रोक दिया। 2018-19 में गन्ना बोनस 93 रुपए मिलता था ; लाभकारी मूल्य बढ़ा, तो राज्य हिस्सेदारी घटाकर 26 रुपए कर दी कवर्धा, ‘दैनिक भास्कर’ ने किसानों की नाराजगी के पीछे के आंकड़ों को खंगाला।

पड़ताल से पता चला कि गन्ने में 2018-19 में 93 रुपए प्रति क्विंटल किसानों को बोनस मिलता था, जबकि अभी राज्य की ओर से 26 रुपए ही दिए जा रहे हैं। अभी गन्ने का कुल लाभकारी मूल्य (एफआरपी) 355 रुपए प्रति क्विंटल है। इसमें 329 रुपए कारखाने की ओर से और 26 रुपए राज्य से बोनस के रूप में दी जा रही है।

किसानों का कहना है कि 2018-19 में राज्य की ओर से करीब 93 रुपए प्रति क्विंटल बोनस मिलता था। बाद के वर्षों में केंद्र का एफआरपी बढ़ता गया, लेकिन राज्य की बोनस हिस्सेदारी 93 से घटकर 26 रुपए रह गई। मांगें नहीं मानीं, आंदोलन जारी रहेगा- संघ भारतीय किसान संघ के जिलाध्यक्ष डोमन चंद्रवंशी का कहना है कि किसानों की मांगों पर सरकार को निर्णय लेना चाहिए।

गन्ने का बोनस और धान का उचित मूल्य किसानों के लिए बड़ा मुद्दा है। किसान पूरी तैयारी में आए हैं। मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा। फैसला जिला स्तर पर संभव नहीं- एसडीएम कवर्धा एसडीएम चेतन साहू का कहना है कि किसान संगठन के नेताओं से चर्चा चल रही है। किसानों की मांगें प्रदेश स्तर की और नीतिगत हैं।

इन पर फैसला जिला स्तर पर नहीं हो सकता। निर्णय शासन स्तर से ही होना है। बिलासपुर में किसान बोले- आश्वासन नहीं, फैसला करे सरकार चौथी किस्त के 1975 करोड़ रुपए का भुगतान करने और धान का भाव 3358 रुपए प्रति क्विंटल करने समेत अन्य मांगों को लेकर भारतीय किसान संघ ने गुरुवार को शहर में प्रदर्शन किया।

नेहरू चौक पर धरना देने के बाद किसानों ने ‘बलराम किसान न्याय यात्रा’ निकाली और कलेक्टोरेट पहुंचकर मुख्यमंत्री के नाम अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा। संघ का दावा है कि प्रदेश के 33 जिलों में जिला मुख्यालयों पर भी किसानों ने प्रदर्शन किया। नेहरू चौक पर प्रदेश अध्यक्ष माधो सिंह ठाकुर ने कहा कि किसान मेहनत कर प्रदेश के अन्न भंडार को भर रहा है, लेकिन उसे अपनी उपज की कीमत और दूसरे अधिकारों के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है।

उन्होंने बकाया भुगतान, खाद की उपलब्धता, धान खरीदी में अतिरिक्त तौल, सिंचाई संकट और प्राकृतिक आपदा से फसल नुकसान जैसे मुद्दे उठाए।

📡 स्रोत: NewsData.io

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