गैस चेंबर बना दिल्ली- NCR, दिवाली की रात तक और खराब होंगे हालात, कहां कितना है AQI
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दिल्ली में दिवाली की रात (8 नवंबर) को हालात और भी खराब होने के संकेत मिल रहे हैं.
शनिवार को पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने की घटनाएं इस सीजन के सबसे हाई लेवल पर पहुंच गईं हैं.
ISRO के सैटेलाइट से मिली जानकारी के अनुसार, लगातार 10वें दिन ऐसी घटनाओं की संख्या में बढ़ोतरी दर्ज की गई.
दिल्ली में रविवार को हल्की हवा चलने का अनुमान है.
शनिवार शाम 4 बजे एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 369 था, जो सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) के 0-500 के पैमाने पर बहुत खराब श्रेणी में आता है. दिवाली से ठीक पहले वाले दिन का यह अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है.
पिछले 24 घंटों का औसत बताने वाला यह इंडेक्स 1 नवंबर को 261 था, जो अब बढ़कर 369 हो गया है.
शनिवार सुबह प्रदूषण का औसत स्तर दिल्ली के 59 मॉनिटरिंग स्टेशनों पर 295 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर दर्ज किया गया. इनमें से 36 स्टेशनों पर यह स्तर 250 से ऊपर था.
शनिवार दोपहर में ठीक रहा मौसम
शनिवार दोपहर इस हफ्ते की सबसे अच्छी हवा वाली दोपहर रही.
हवा की वह परत, जिसमें प्रदूषण घुलता है 4 दिनों तक सामान्य गहराई से आधी रहने के बाद, वापस अपनी सामान्य गहराई पर आ गई.
हवा की परत कम गहरी होने का मतलब है कि प्रदूषक तत्वों के फैलने के लिए कम जगह का होना. सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे के बीच शुक्रवार की तुलना में अधिक प्रदूषण रहा.
रिहायशी इलाकों में ज्यादा बुरा हाल
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक शनिवार शाम को पटाखे फोड़ना शुरू होने के बाद CPCB को जिन 55 स्टेशनों से रिपोर्ट मिली, वहां PM2.5 का स्तर शाम 7:45 बजे 177 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर था, जो रात 8 बजे बढ़कर 208 हो गया और हर 15 मिनट में बढ़ता हुआ रात 10 बजे तक 289 पर पहुंच गया.
शुक्रवार को इन्हीं घंटों के दौरान हवा में यह स्तर 202 से बढ़कर 229 तक ही पहुंचा था.
यह उछाल पंजाबी बाग जैसे रिहायशी इलाकों में सबसे ज्यादा रहा, जहां 1 घंटे के भीतर PM2.5 का स्तर लगभग 3 गुना हो गया. शाम 7 बजे 208 से बढ़कर रात 8 बजे तक
📡 स्रोत: ABP Live
💡 पृष्ठभूमि (Background)
गैस चेंबर बन रही दिल्ली-एनसीआर की हवा में दिवाली से पहले भीड़ बढ़ेगी। यह विषय दिल्ली के वायुमंडलीय प्रदूषण और पराली जलाने के कारण होने वाली धूम्रपान की स्थिति पर केंद्रित है। यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि AQI 369 तक पहुँच गया है, जो स्वास्थ्य के लिए खतरनाक स्तर दर्शाता है। पराली जलाने की घटनाएँ इस सीजन में रिकॉर्ड स्तर पर हैं, जिससे धुंध और धुएँ की मात्रा बढ़ रही है। आम जनता पर इसका असर श्वसन रोग, आँखों में जलन और सामान्य स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव हो सकता है, विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों के लि