गाजा सीजफायर पर नई कूटनीतिक पहल: ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर ने मिस्र में हमास चीफ खलील अल-हय्या से की दो घंटे बैठक

मध्य पूर्व में गाजा पट्टी के भविष्य और पिछले कई महीनों से अटके स्थायी सीजफायर समझौते को बचाने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने अब तक की सबसे बड़ी और अप्रत्याशित कूटनीतिक पहल की है। अमेरिकी वार्ताकार और राष्ट्रपति ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर ने रविवार को मिस्र की राजधानी काहिरा में हमास के शीर्ष राजनीतिक प्रमुख खलील अल-हय्या (Khalil al-Hayya) के साथ एक दुर्लभ और गोपनीय बैठक की। दो घंटे से अधिक समय तक चली इस उच्च स्तरीय मैराथन वार्ता में मध्यस्थता कर रहे देश—मिस्र, कतर और तुर्किये (तुर्की)—के वरिष्ठ खुफिया और राजनयिक अधिकारी भी मौजूद रहे। जैसा कि Livemint की रिपोर्ट और The Hindu की रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है, इस बैठक का मुख्य उद्देश्य अमेरिका द्वारा प्रस्तावित 15-सूत्रीय नए गाजा रोडमैप (15-point US-backed Roadmap) पर हमास की औपचारिक प्रतिबद्धता सुनिश्चित करना था। इस योजना के तहत गाजा पट्टी में हमास के भारी हथियारों के क्रमिक निरस्त्रीकरण (Disarmament), गाजा से इजरायली रक्षा बलों (IDF) की चरणबद्ध वापसी, विस्थापित फिलिस्तीनियों के पुनर्वास और अंतरराष्ट्रीय मदद से गाजा के पुनर्निर्माण का खाका तैयार किया गया है। आज नेतन्याहू से मिलेंगे कुशनर: टोनी ब्लेयर और बोर्ड ऑफ पीस के चीफ भी होंगे शामिल हमास के शीर्ष नेतृत्व से सहमति के बिंदुओं पर चर्चा करने के बाद जेरेड कुशनर सोमवार, 17 अगस्त 2026 को यरुशलम में इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ एक अत्यंत महत्वपूर्ण और तनावपूर्ण बैठक करने जा रहे हैं। India Today की रिपोर्ट के अनुसार, इस बैठक में कुशनर अकेले नहीं होंगे, बल्कि उनके साथ ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर और गाजा सीजफायर की निगरानी के लिए अमेरिका द्वारा गठित 'बोर्ड ऑफ पीस' (Board of Peace) के निदेशक निकोलाय म्लादेनोव भी नेतन्याहू के सामने वार्ता की मेज पर बैठेंगे। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब कुछ ही दिन पहले प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने ट्रंप प्रशासन के इस 15-सूत्रीय शांति प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया था। नेतन्याहू के इस कड़े रुख ने वाशिंगटन और तेल अवीव के बीच एक सार्वजनिक और असहज कूटनीतिक दरार पैदा कर दी है। कुशनर की इस यात्रा का मुख्य मकसद नेतन्याहू पर दबाव बनाकर उन्हें अमेरिकी रोडमैप को स्वीकार करने और गाजा से सेना की वापसी के लिए तैयार करना है। 15-सूत्रीय अमेरिकी रोडमैप: क्या हैं समझौते की मुख्य शर्तें? अमेरिकी प्रशासन द्वारा तैयार किया गया यह नया शांति रोडमैप गाजा में करीब 20 लाख लोगों के भविष्य और पुनर्निर्माण को तय करने वाला एक व्यापक ढांचा है। योजना के प्रमुख प्रावधान इस प्रकार हैं: हमास का चरणबद्ध निरस्त्रीकरण: हमास अपने रॉकेट, मिसाइल, मोर्टार और भारी विस्फोटक हथियारों को एक गैर-राजनीतिक 'फिलिस्तीनी टेक्नोक्रैटिक कमेटी' (Palestinian Technocratic Committee) को सौंपेगा, जो गाजा के दैनिक प्रशासनिक मामलों को संभालेगी। इजरायली सेना की पूर्ण वापसी: समझौते के लागू होते ही इजरायल गाजा में अपने सभी हवाई और जमीनी हमले रोकेगा और अपनी सेना को गाजा के रिहायशी इलाकों से बाहर निकालेगा। अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा बल की तैनाती: इजरायली सैनिकों और फिलिस्तीनी नागरिक प्रशासन के इलाकों के बीच बफर जोन बनाने और शांति व्यवस्था की निगरानी के लिए तटस्थ अंतरराष्ट्रीय बलों (International Peacekeeping Forces) को तैनात किया जाएगा। 14 दिनों की टाइमलाइन वार्ता: सभी पक्षों की आधिकारिक सहमति के बाद 14 दिनों की सीधी बातचीत शुरू होगी, जिसमें सेना की वापसी और राहत सामग्री के वितरण की तारीखें तय की जाएंगी। अरब देशों की मदद से पुनर्निर्माण: सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और खाड़ी देशों के वित्तीय सहयोग से गाजा के बुनियादी ढांचे, अस्पतालों, स्कूलों और रिहायशी कॉलोनियों का बड़े पैमाने पर पुनर्निर्माण शुरू होगा। हमास की दो टूक मांग: 'पहले इजरायल हमले रोके और येलो लाइन तक पीछे हटे' बैठक के बाद हमास के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि वे शांति योजना पर आगे बढ़ने के लिए तैयार हैं, लेकिन इजरायल को पहले अपनी सैन्य आक्रामकता रोकनी होगी। हमास चीफ खलील अल-हय्या ने वार्ताकारों के समक्ष मुख्य शर्तें रखीं: येलो लाइन तक वापसी की शर्त: हमास ने मांग की है कि किसी भी समझौते के क्रियान्वयन से पहले इजरायली सेना को तथाकथित 'येलो लाइन' (Yellow Line) तक पीछे हटना होगा। गौरतलब है कि इस येलो लाइन की सीमाएं कभी स्पष्ट नहीं थीं और इजरायली सेना वर्तमान में गाजा पट्टी के लगभग 60 प्रतिशत भूभाग पर सीधे नियंत्रण बनाए हुए है। स्वतंत्र फिलिस्तीनी राष्ट्र की शर्त: हमास के प्रतिनिधियों ने कहा कि वे अपने सबसे भारी हथियारों को पूरी तरह त्यागने के लिए तभी तैयार होंगे जब इसके बदले एक संप्रभु और स्वतंत्र फिलिस्तीनी राष्ट्र (Independent Palestinian State) की स्पष्ट अंतरराष्ट्रीय गारंटी दी जाए। मध्यस्थों से अपील: हमास ने आधिकारिक बयान जारी कर अमेरिका, मिस्र, कतर और बोर्ड ऑफ पीस से अपील की है कि वे इजरायल को इस शांति प्रस्ताव को स्वीकार करने के लिए 'मजबूर' (Compel) करें। नेतन्याहू की राजनीतिक मजबूरी: 27 अक्टूबर का चुनाव और गठबंधन का दबाव इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के सामने इस शांति प्रस्ताव को स्वीकार करने में कई घरेलू राजनीतिक और वैचारिक अड़चनें हैं: 'पूर्ण निरस्त्रीकरण तक एक कदम भी पीछे नहीं': नेतन्याहू लगातार इस बात पर अड़े हुए हैं कि जब तक हमास पूरी तरह अपने हथियार नहीं डाल देता और उसका सैन्य ढांचा खत्म नहीं हो जाता, तब तक इजरायली सेना गाजा के किसी भी हिस्से से पीछे नहीं हटेगी। 27 अक्टूबर के आम चुनाव: आज तक की खबर के अनुसार, इजरायल में आगामी 27 अक्टूबर को महत्वपूर्ण संसदीय चुनाव होने हैं। नेतन्याहू की मौजूदा गठबंधन सरकार में धुर-दक्षिणपंथी और कट्टरपंथी मंत्री (जैसे इतामार बेन-ग्वीर और बेजलेल स्मोट्रिच) शामिल हैं, जिन्होंने धमकी दी है कि यदि गाजा से सेना वापस बुलाई गई तो वे सरकार गिरा देंगे। लिकुड पार्टी का अरब देशों पर पलटवार: रविवार को नेतन्याहू की लिकुड पार्टी ने तीखा बयान जारी करते हुए आरोप लगाया कि अरब देश सीजफायर के बहाने नेतन्याहू को सत्ता से बेदखल करने की साजिश रच रहे हैं। लिकुड ने साफ कहा कि विपक्षी दलों की तरह वे राष्ट्रीय सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेंगे। सऊदी अरब और यूएई समेत 8 देशों का साझा बयान: 'शांति में बाधा बना इजरायल' कुशनर और नेतन्याहू की मुलाकात से ठीक पहले अरब और मुस्लिम देशों के एक शक्तिशाली गुट ने इजरायल पर चौतरफा कूटनीतिक दबाव बना दिया है। सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), जॉर्डन, पाकिस्तान, इंडोनेशिया, मिस्र, कतर और तुर्किये के विदेश मंत्रियों ने एक साझा और कड़ा बयान जारी किया। साझा बयान में कहा गया कि अमेरिकी रोडमैप को खारिज करके इजरायल गाजा में शांति स्थापित करने के वैश्विक प्रयासों में मुख्य बाधा बन रहा है। इन देशों ने अमेरिका और बोर्ड ऑफ पीस से मांग की है कि वे शांति योजना को रोकने वाले किसी भी पक्ष के खिलाफ तत्काल और ठोस दंडात्मक कदम उठाएं। शांति और युद्ध के दोराहे पर गाजा: क्या सफल होगी ट्रंप की नई रणनीति? जेरेड कुशनर की हमास चीफ से सीधी मुलाकात और उसके तुरंत बाद नेतन्याहू से वार्ता यह दर्शाती है कि व्हाइट हाउस गाजा संकट का स्थायी समाधान निकालने के लिए अपनी पूरी राजनीतिक पूंजी झोंक रहा है। यदि सोमवार को होने वाली बैठक में कुशनर इजरायली नेतृत्व को लचीला रुख अपनाने के लिए राजी कर लेते हैं, तो गाजा में पिछले 10 से अधिक महीनों से जारी तबाही और मानवीय त्रासदी पर स्थायी विराम लग सकता है। हालांकि, नेतन्याहू की राजनीतिक मजबूरियों और हमास की शर्तों के बीच की खाई को पाटना अमेरिकी कूटनीति के लिए सबसे बड़ी अग्निपरीक्षा साबित होने वाला है।
📡 स्रोत: NewsData.io