गाजीपुर में विन्ध्य पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के मुआवजे को लेकर किसानों का विरोध
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →
ग़ाज़ीपुर न्यूज़ टीम, गाजीपुर.
गाजीपुर जिले के जमानियां में यूपीडा के विन्ध्य पूर्वांचल-स्पर एक्सप्रेसवे के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है। इस दौरान तय मुआवजे को लेकर किसानों में नाराजगी बढ़ रही है। शुक्रवार को तहसील के कई गांवों से दर्जनों प्रभावित किसान उपजिलाधिकारी के पास पहुंचे। उन्होंने एक शिकायत पत्र सौंपकर जमीन का सर्किल रेट बढ़ाने की मांग की।
किसानों ने कहा कि उन्हें बाजार मूल्य के हिसाब से मुआवजा मिलना चाहिए। किसान जितेंद्र पाल, भरत सिंह और अनुज सिंह समेत कई किसानों ने बताया कि एक्सप्रेसवे परियोजना में उनकी कई उपजाऊ कृषि भूमि आ रही है। किसानों का आरोप है कि प्रशासन ने जमीन के मूल्यांकन के लिए जो दरें तय की हैं, वे बाजार भाव से बहुत कम हैं।
इससे उन्हें अपनी जमीन का सही मुआवजा नहीं मिलेगा और आर्थिक नुकसान होगा। किसानों ने कहा कि जमीन अधिग्रहण में उनके हितों का खास ध्यान रखा जाना चाहिए। उन्होंने मांग की कि जमीन के मौजूदा बाजार मूल्य और सर्किल रेट का दोबारा सर्वे और मूल्यांकन किया जाए। किसानों को ग्रामीण क्षेत्र के नियमों के हिसाब से सही और न्यायसंगत मुआवजा दिया जाए।
उन्होंने यह भी मांग की कि चार गुना तक उचित मुआवजा तय होने के बाद ही जमीन का बैनामा किया जाए। शिकायत पत्र सौंपने वालों में सुदर्शन सिंह, राजेश सिंह, धर्मेंद्र सिंह, पांचरतन बिंद, राजदेव सिंह, विक्रमा सिंह, वीरेंद्र सिंह, सुमित सिंह, वंशरायन, रामानुज सिंह, प्रकाश सिंह और राधाकृष्ण सिंह समेत दर्जनों प्रभावित किसान शामिल थे।
इस मामले में उपजिलाधिकारी निधि ने किसानों को भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि उनकी मांगों और शिकायतों को बड़े अधिकारियों और सरकार तक पहुंचाया जाएगा। जो भी कानूनी तौर पर सही होगा, उसके हिसाब से जरूरी कार्रवाई की जाएगी।
📡 स्रोत: NewsData.io
💡 पृष्ठभूमि (Background)
गाजीपुर जिले के जमानियां में यूपीडा द्वारा विन्ध्य पूर्वांचल-स्पर एक्सप्रेसवे के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है। किसानों ने तय मुआवजे पर नाराजगी जताई और उपजिलाधिकारी के पास शिकायत पत्र सौंपा, मांग है कि जमीन का सर्किल रेट बढ़ाया जाए। यह विषय इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि बड़े सड़क परियोजनाओं में मुआवजा विवाद अक्सर किसानों के जीवन-यापन पर गहरा असर डालते हैं। यदि मुआवजा पर्याप्त नहीं रहा तो किसानों की आजीविका प्रभावित होगी, जिससे क्षेत्रीय आर्थिक संतुलन बिगड़ सकता है और सामाजिक तनाव बढ़ सक