गलती छिपाने से नहीं, स्वीकार करने से सुधरता है जीवन; छोटी भूल को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी

यदि गलती करने के पश्चात भी न सोचें, न संभलें तथा गलती पर गलती करता जाये तो ऐसा व्यक्ति निकृष्ट ही कहा जायेगा। भूल को छुपाने के बजाय भूल न करने का प्रयास करना चाहिये, भूल करने से बचना चाहिये।
भूल हो जाने पर भूल को अपनी त्रुटि समझकर भूल को सच्चे मन से स्वीकार कर लेना चाहिये क्योंकि भूल को भूल न स्वीकार करना भी एक महान भूल है। जैसे बिस्तर पर पड़ी आग की चिंगारी को रजाई से ढकने का प्रयास न करके उसे बुझाने का पुरुषार्थ करना चाहिये। इसी प्रकार घर में निकली सर्पिणी को टोकरी के ...
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