गंडक का रौद्र रूप,6 जिलों में 20 लाख प्रभावित:चंपारण में 6 जगह तटबंध टूटे, बगहा में 91.25 मीटर पहुंचा जलस्तर; मोतिहारी में 5 हजार घरों में पानी
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →नेपाल के कैचमेंट एरिया में हुई भारी बारिश के बाद गंडक नदी उफान पर है। वाल्मीकिनगर बराज से अधिकतम 5.43 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा। इसका असर बिहार के निचले इलाकों में दिखने लगा। बगहा में गंडक ने 91.25 मीटर का नया उच्चतम बाढ़ स्तर दर्ज किया, जो 2024 के पुराने रिकॉर्ड 90.90 मीटर से 35 सेंटीमीटर अधिक है।
गंडक के बढ़े पानी से पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली के निचले इलाकों में बाढ़ की स्थिति बनी हुई है। करीब 28 प्रखंडों में 20 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हैं। 5 हजार घर पानी से घिर गए हैं और कई परिवार घर छोड़कर ऊंचे और सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने को मजबूर हैं।
बाढ़ के कारण 25 से ज्यादा स्कूल बंद हैं और दो दिनों से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित है। बता दें कि पूर्वी चंपारण में 2 और पश्चिम चंपारण में 4 तटबंध टूट चुके हैं। तटबंध टूटने के बाद निचले इलाकों में पानी तेजी से फैला है। कई परिवारों के पास घर लौटने का रास्ता नहीं बचा है। प्रशासन की ओर से उपलब्ध कराई गई पॉलीथिन शीट के सहारे प्रभावित परिवार तटबंधों और ऊंचे स्थानों पर रात गुजार रहे हैं।
पहले प्रभावित इलाकों की तस्वीरें देखिए… अब सिलसिलेवार तरीके से पढ़िए पूरी खबर… पूर्वी चंपारण में रिंग बांध टूटा, 500 गांव डूबे पूर्वी चंपारण के अरेराज प्रखंड में मंगलवार को 2 तटबंध टूट गए। इसकी वजह से रियाइशी इलाकों में पानी घुस गया है। केसरिया प्रखंड में गंडक नदी के बढ़े जलस्तर ने तटवर्ती इलाकों में रहने वाले परिवारों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
सोमवार रात अचानक पानी बढ़ने से ढेकहां पंचायत के वार्ड 8, 9, 10 और 11 और कढ़ान पंचायत के वार्ड 3, 9 और 10 में बाढ़ की स्थिति गंभीर हो गई। करीब 2000 घर पानी से घिर गए, जबकि कई घरों में पानी प्रवेश कर गया है। रातों-रात बदले हालात के बाद कई परिवार बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को लेकर घर छोड़ने को मजबूर हुए।
बड़ी संख्या में लोग अब चंपारण तटबंध पर प्लास्टिक शीट तानकर रात गुजार रहे हैं। घुटनों तक आया पानी, आशियाना छोड़ बाहर निकला परिवार ग्रामीणों के मुताबिक सोमवार रात तक स्थिति सामान्य थी। इसके बाद अचानक गंडक का पानी बढ़ने लगा। देखते ही देखते गांव की गलियों, सड़कों और घरों के आसपास पानी फैल गया।
लोगों को सामान समेटने तक का समय नहीं मिला। कई परिवारों ने सबसे पहले बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। इसके बाद घर में रखा अनाज, कपड़े और जरूरी सामान निकालने की कोशिश की। पानी बढ़ने के कारण कई जगहों पर आवागमन भी प्रभावित हो गया। ढेकहां के लक्ष्मीन देवी, सुनील देवी, योगेंद्र सहनी समेत अन्य ग्रामीणों ने बताया पानी अचानक बढ़ा।
घर में पानी घुसने के बाद परिवार के साथ निकलना पड़ा। किसी तरह ऊंचे स्थान पर पहुंचकर हमलोगों ने रात काटी। फ्लड कंट्रोल विभाग पर लगा गंभीर आरोप कांग्रेस जिला अध्यक्ष गप्पू राय ने बताया, प्रशासन की ओर से अब तक बांध को बचाने के लिए कोई ठोस काम नहीं किया गया है। बांध टूटने के बाद भी प्रभावित लोगों को किसी तरह की राहत नहीं मिल रही है।
हम सुबह से बाढ़ प्रभावित इलाकों में घूम रहे हैं। अभी मिश्रणिया पंचायत गए थे, वहां भी बांध टूटने की स्थिति में है, लेकिन फ्लड कंट्रोल विभाग और जिला प्रशासन की ओर से उसे बचाने के लिए कोई प्रभावी काम नहीं किया जा रहा है। अगर समय रहते बांध की मरम्मत और मजबूती का काम कराया गया होता तो शायद इसे टूटने से बचाया जा सकता था।
कहीं न कहीं यह प्रशासन की लापरवाही का नतीजा है। गप्पु राय ने आगे बताया, मोतिहारी की समस्या यह है कि यहां वाटर रिसोर्सेज विभाग के सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर की मनमानी चल रही है। बिना पैसे दिए बालू की बोरियां तक उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं। लोगों को बांध बचाने के लिए बालू की बोरियां चाहिए, लेकिन उन्हें रोककर रखा जा रहा है।
अधिकारी इस बात की चिंता नहीं कर रहे हैं कि बांध टूटने से लोगों में दहशत है और उनकी जान-माल पर खतरा है। फ्लड कंट्रोल का काम वाटर रिसोर्सेज विभाग का है। ऐसे में बांध की स्थिति और उसे बचाने के लिए की जा रही कार्रवाई की जिम्मेदारी संबंधित विभाग की बनती है। अगर इस लापरवाही के लिए किसी को जिम्मेदार ठहराया जाएगा तो संबंधित सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर और प्रशासन की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
'लॉलीपॉप थमाकर चले जाते हैं अधिकारी' वहीं, ग्रामीण राजेश कुमार यादव ने बताया हमलोग सदियों से बाढ़ प्रभावित इलाके में रह रहे हैं। हर बार चुनाव के समय उम्मीदवार आते हैं और बड़े-बड़े वादे यानी लॉलीपॉप देकर चले जाते हैं। इस बार भी बांध टूटने की स्थिति बनी तो हमने संबंधित अधिकारी से बालू की बोरियां उपलब्ध कराने की मांग की थी।
लेकिन हमारे साथ भेदभाव किया गया और रिंग बांध को बचाने के लिए एक भी बालू की बोरी उपलब्ध नहीं कराई गई। समय रहते अगर बांध को बचाने के लिए जरूरी सामग्री मिल जाती और काम कराया जाता तो शायद हमारा रिंग बांध नहीं टूटता। बांध टूटने के बाद पूरा गांव पानी में डूब गया है। लापरवाही का नतीजा यह है कि लोगों के घरों में करीब पांच फीट तक पानी भर गया है और गांव के लोग अपने घर-बार छोड़कर इधर-उधर जाने को मजबूर हैं।
दुख की बात यह है कि यहां हर कोई अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश कर रहा है। लेकिन इस लापरवाही का खामियाजा हम ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है। बता दें कि पूर्वी चंपारण के अरेराज प्रखंड के कढ़ान पंचायत में वार्ड 9 और 10 में बाढ़ का असर ज्यादा है। नाव के सहारे लोग, मवेशियों को भी निकाल रहे पानी बढ़ने के कारण कई जगहों पर सड़क संपर्क प्रभावित हुआ है।
ऐसे में लोगों की आवाजाही का सहारा नाव बनी हुई है। परिवारों के साथ मवेशियों को भी सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। मंगलवार को चकिया एसडीओ शिवानी शुभम और केसरिया बीडीओ कुमुद कुमार ने ढेकहां और कढ़ान पंचायत के प्रभावित इलाकों का जायजा लिया। अधिकारियों ने ग्रामीणों से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं और राहत व्यवस्था की जानकारी ली।
एसडीओ ने अधिकारियों को ढेकहां पंचायत में 5 और कढ़ान पंचायत में 2 यानी कुल 7 सामुदायिक रसोई तत्काल शुरू कराने का निर्देश दिया। इन रसोई के जरिए बाढ़ प्रभावित परिवारों को पका हुआ खाना उपलब्ध कराया जाएगा। अधिकारियों ने प्रभावित लोगों को पॉलीथिन शीट समेत अन्य जरूरी राहत सामग्री उपलब्ध कराने का भी निर्देश दिया है।
बता दें कि 10 से ज्यादा नाव चलाए जा रहे हैं। गंडक का दबाव नहीं झेल पाया चंपारण तटबंध, 3 जगह टूटा पश्चिम चंपारण में गंडक नदी के बढ़ते जलस्तर ने तटबंधों पर दबाव बढ़ा दिया है। जिले में चंपारण तटबंध 4 अलग-अलग जगहों पर टूट गया, जिसके बाद आसपास के गांवों और निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।
बगहा-1 प्रखंड के खैरटवा में सोमवार रात करीब 8:30 बजे तटबंध में बड़ी दरार के बाद करीब 12 मीटर हिस्सा टूट गया। वहीं, दूसरा तटबंध बेतिया के बैरिया प्रखंड के फुलियाखांड़ पंचायत के वार्ड-5 के पास सोमवार रात करीब 2 बजे तीसरा तटबंध टूट गया। यह तटबंध स्थानीय आबादी और कृषि क्षेत्र को गंडक की बाढ़ से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
इसके ऊपर से चखनी रजवटिया से रतवल जाने वाली करीब 14 किलोमीटर लंबी सड़क गुजरती है। चौथा जोगापट्टी प्रखंड के गोलाघाट डूमरी पंचायत में मंगलवार की शाम 5 बजे करीब 10 मीटर चौड़ा हिस्सा टूट गया। खैरटवा से चखनी रजवटिया की दूरी करीब छह किलोमीटर है। तटबंध टूटने के बाद आसपास के कई गांव और टोले बाढ़ की चपेट में आने के खतरे में हैं।
इनमें पिपरिया, सिंगारी गढ़वा, रजवटिया, चखनी, बड़गांव, छोटकीपट्टी, एकडेरवा, डुमरिया और चौतरवा समेत आसपास के इलाके शामिल हैं। सांसद पप्पू यादव ने टूटे तटबंध का जायजा लिया मंगलवार को पूर्णिया सांसद पप्पू यादव बगहा पहुंचे और खैरटवा के पास टूटे चंपारण तटबंध का निरीक्षण किया। उन्होंने मौके पर मौजूद लोगों से स्थिति की जानकारी ली।
टूटे हिस्से से पानी के बहाव और आसपास के इलाकों में पैदा हुए खतरे का जायजा लिया गया। ग्रामीणों के मुताबिक तटबंध टूटने के बाद पानी का बहाव लगातार आसपास के निचले इलाकों की ओर बना हुआ है। ऐसे में लोगों को घर, अनाज और मवेशियों की सुरक्षा की चिंता है। गोपालगंज में 6 प्रखंड में 3 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित गोपालगंज में गंडक नदी के बढ़ते जलस्तर से सदर, कुचायकोट, मांझा और बरौली के 3 दर्जन से अधिक गांव प्रभावित हैं।
करीब 200 गांवों में पानी सड़क और घरों तक पहुंच गया है। लोग जरूरी सामान लेकर सुरक्षित जगहों की ओर जा रहे हैं। सदर प्रखंड के 30 गांवों में ही करीब 5 हजार परिवार प्रभावित बताए गए हैं। प्रशासन की ओर से प्रभावित इलाकों में नावें लगाई गई हैं और भोजन के लिए कम्युनिटी किचन शुरू किए गए हैं। प्रशासन ने प्रभावित लोगों के लिए सदर प्रखंड में 2 कम्युनिटी किचन शुरू किए हैं।
इसके अलावा राहत और बचाव के लिए 9 नावें लगाई गई हैं। इनमें 4 नावें प्रशासन की ओर से और 5 नावें सदर विधायक की ओर से उपलब्ध कराई गई हैं। प्रभावित इलाकों में मेडिकल टीम और राहत व्यवस्था पर भी नजर रखी जा रही है। वहीं, डीएम समीर सौरभ ने कहा कि तटबंधों की लगातार निगरानी की जा रही है और बाढ़ में फंसे लोगों को निकालने के लिए नावों की वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है।
छपरा, वैशाली में अभी बाढ़ का खतरा कम सारण के परसा में सोमवार को गंडक के जलस्तर में करीब एक फीट की वृद्धि दर्ज की गई। इसके बावजूद नदी अभी खतरे के निशान से नीचे है। दियारा क्षेत्र में भी फिलहाल स्थिति सामान्य बताई गई है। बलिगांव, रसूलपुर, लतरहिया, बहलोलपुर, मनकी मनमाल, मनकी मनटाल, परसादी और चकजलाउद्दीन समेत आसपास के गांवों में लोग नदी के जलस्तर पर नजर बनाए हुए हैं।
सारण प्रशासन ने गंडक से जुड़े सात तटवर्ती प्रखंडों में तटबंधों की निगरानी और पेट्रोलिंग बढ़ा दी है। प्रशासन के अनुसार नदी में करीब 3 लाख क्यूसेक पानी पहुंच चुका है और करीब डेढ़ लाख क्यूसेक अतिरिक्त पानी आने की संभावना को देखते हुए तैयारी बढ़ाई गई है। दरियापुर में करीब 100 घरों को संभावित रूप से प्रभावित मानते हुए 500 लोगों के लिए राहत की तैयारी की गई है।
जरूरत पड़ने पर तटबंध के पास कम्युनिटी किचन शुरू करने की भी तैयारी है। गंडक का पानी वैशाली की ओर भी बढ़ रहा है, लेकिन उपलब्ध ताजा रिपोर्टों में जिले में बड़े पैमाने पर बाढ़ की स्थिति सामने नहीं आई है। प्रशासन की ओर से नदी और तटीय इलाकों की स्थिति पर नजर रखी जा रही है। वहीं, मुजफ्फरपुर में गंडक नदी के बढ़ते जलस्तर ने साहेबगंज के कई इलाकों में लोगों की मुश्किल बढ़ा दी है।
साहेबगंज के बंगरा पंचायत के वार्ड-1 और 2 में कई घरों के आसपास पानी भर गया है। स्थानीय कन्हैया कुमार ने बताया कि करीब 100 से ज्यादा घरों के आसपास पानी पहुंच चुका है। जो घर थोड़ा अंदर हैं, वहां जाने वाली सड़क पूरी तरह डूब गई है। कई जगहों पर रास्ते में 8 से 10 फीट तक पानी है। लोगों के पास आने-जाने का एकमात्र सहारा नाव है।
पानी लगातार बढ़ रहा है और कुछ इलाकों में एक दिन में करीब एक मीटर तक पानी बढ़ा है। अगर इसी तरह पानी बढ़ता रहा तो बचे हुए घरों में भी पानी घुस सकता है।
📡 स्रोत: NewsData.io