गणेश पूजा में दूर्वा है जरूरी:क्या आप जानते हैं गणेश जी को दूर्वा क्यों चढ़ाते हैं? अनलासुर से जुड़ी है इस परंपरा की कथा
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →अभी गणेश उत्सव चल रहा है, गणेश पूजा का ये उत्सव 25 सितंबर तक है। इन दिनों में भगवान गणेश की विधिवत पूजा करने की परंपरा है, जो लोग पूरे विधि-विधान से पूजा नहीं कर पाते हैं, वे भगवान को सिर्फ दूर्वा चढ़ाकर भी पूजा का पुण्य प्राप्त कर सकते हैं। क्या आप जानते हैं गणेश जी को दूर्वा इतनी प्रिय क्यों है?
गणेश पूजा में इसका विशेष महत्व माना जाता है। इसके पीछे अनलासुर नामक असुर से जुड़ी एक पौराणिक कथा है। पुराने समय में अनलासुर नाम का एक शक्तिशाली असुर था, वह देवताओं, ऋषि-मुनियों और आम लोगों को परेशान करने लगा। उसके आतंक से चारों ओर भय का वातावरण बन गया। कोई भी उसके अत्याचारों को रोक नहीं पा रहा था।
परेशान होकर देवराज इंद्र सहित सभी देवता और ऋषि-मुनि भगवान शिव के पास पहुंचे। उन्होंने महादेव से अनलासुर के आतंक से मुक्ति दिलाने की प्रार्थना की। तब भगवान शिव ने कहा कि इस संकट का समाधान भगवान गणेश कर सकते हैं। इसके बाद सभी देवता और ऋषि-मुनि भगवान गणेश की शरण में पहुंचे। उनकी प्रार्थना सुनकर गणपति अनलासुर का अंत करने के लिए तैयार हो गए।
इसके बाद गणेश जी और अनलासुरा के बीच युद्ध हुआ। काफी समय तक संघर्ष चलता रहा, लेकिन अनलासुर पराजित नहीं हो रहा था, तब भगवान गणेश ने अनलासुर को पकड़ लिया और उसे निगल लिया। इसके बाद गणेश जी के पेट में बहुत तेज जलन होने लगी। देवताओं और ऋषियों ने कई उपाय किए, लेकिन उन्हें राहत नहीं मिली। तब कश्यप ऋषि ने दूर्वा की 21 गांठें बनाईं और भगवान गणेश को खाने के लिए दीं।
जैसे ही गणेश जी ने दूर्वा ग्रहण की, उनके पेट की जलन शांत हो गई। इस घटना के बाद भगवान गणेश को दूर्वा अर्पित करने की परंपरा प्रचलित हुई। इसी वजह से गणेश पूजा में दूर्वा की 21 गांठें चढ़ाने की परंपरा प्रचलित है। कथा की सीख
📡 स्रोत: NewsData.io