गंगा की बाढ़ से एक लाख आबादी पानी में:खगड़िया में 2000 घरों पर खतरा, 2 पंचायत-स्कूल डूबे; मुंगेर में सड़क पर झोपड़ी बनाकर रह रहे, भागलपुर में CM पहुंचे
रात में हम पूरा परिवार सोए हुए थे, अचानक घर में पानी घुस आया। हमलोग उठे और आनन-फानन में रोड पर तंबू गाड़े। अब यहीं पर 20-30 परिवार डेढ़ महीने तक गुजारा करेंगे। इसके बाद खुद से जो थोड़ा-बहुत पानी बचेगा, उसको घर-आंगन से निकलवाएंगे। हर बार इस इलाके की यही स्थिति रहती है। हमलोगों पर प्रशासन का कोई ध्यान नहीं है।
मुंगेर के बरियारपुर प्रखंड के लालजी टोला के रहने वाले राकेश कुमार ने दैनिक भास्कर से बातचीत में गंगा से आई बाढ़ का हाल बताया। दरअसल, गंगा के बढ़ते जलस्तर से बिहार के 4 जिलों में स्थिति बेहद खराब हो गई है। खगड़िया में 100 से ज्यादा घरों समेत स्कूल पानी में डूब गया है, जबकि 2000 घरों पर बाढ़ का संकट मंडरा रहा है।
भागलपुर के निचले इलाके के 7 गांव पानी में हैं। यहां सीएम ने खुद हवाई निरीक्षण किया है। वहीं, मुंगेर में लोग सड़कों और ऊंचे स्थानों पर शरण ले रहे हैं। चारों जिलों से करीब एक लाख आबादी पानी में हैं। गंगा में पानी किस जिले में किस स्तर पर बह रहा है? किन-किन इलाकों में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है? आगे कैसी स्थिति होगी?
प्रशासन ने क्या तैयारियां की हैं? पढ़िए रिपोर्ट... पहले बिहार में गंगा की स्थिति जानिए... बिहार में गंगा 13 जिलों से होकर गुजरती है। इनमें पटना, वैशाली, बेगूसराय, खगड़िया, मुंगेर और भागलपुर के कई निचले इलाकों में गंगा के बढ़ते जलस्तर के कारण लगभग हर साल बाढ़ का खतरा बना रहता है।
वहीं, गंगा से जुड़े अन्य जिलों में तटबंधों और दियारा क्षेत्रों की भौगोलिक स्थिति के कारण सामान्य परिस्थितियों में बाढ़ का असर सीमित रहता है। हालांकि, गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंचने पर इन जिलों के निचले और तटीय इलाकों में भी बाढ़ की स्थिति बन आती है।
बिहार में गंगा नदी बक्सर जिले के चौसा नामक स्थान से प्रवेश करती है। बिहार में इस नदी की कुल लंबाई लगभग 445 किलोमीटर है। इसके बाद यह कटिहार जिले के मनिहारी के पास से होकर झारखंड (साहिबगंज) की सीमा छूते हुए पश्चिम बंगाल में प्रवेश करती है।
खगड़िया में 2000 घरों पर बाढ़ का खतरा गंगा के बाढ़ से खगड़िया में सबसे ज्यादा स्थिति खराब हो गई है। माधवपुर पंचायत पानी से पूरी तरह घिर चुका है। यहां करीब 2000 से अधिक घर हैं, जिन पर बाढ़ का संकट मंडराने लगा है, ग्रामीण अखिलेश ने कहा कि अगर पानी बढ़ने की यही स्थिति रही, तो हमलोगों के घरों में कल तक पानी घुस आएगा।
हमारी मांग कि प्रशासन हमारी सूद ले और राहत बचाव की तैयारी शुरू करें। हमारे यहां सबसे ज्यादा खराब स्थिति मुरादपुर गांव की है। यहां तो घरों में पानी घुस भी गया है। पशुओं के लिए चारा और लोगों के लिए खाने की आफत बन आई है।
परबत्ता प्रखंड के रहने वाले किसान राम कृपाल सिंह ने कहा कि हमारे यहां नयागांव, माधवपुर, अगुवानी, लगार, भरसो, सलारपुर, खजरैठा समेत विभिन्न दियारा इलाकों में हजारों एकड़ में लगी खड़ी फसल पानी में डूब गयी है। यह पानी करीब 2 महीने तक रहेगा, जिससे इस बार का फसल पूरी तरह बर्बाद होने वाला है।
हम चाहते हैं प्रशासन इसका आकलन करके हमलोगों को मुआवजा दें। इधर, जिले के जोरावरपुर पंचायत स्थित मध्य विद्यालय गोढ़ियासी का परिसर भी गंगा के बढ़े पानी की चपेट में आ गया है। शनिवार को विद्यालय परिसर में पानी प्रवेश करने के बाद बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए उन्हें स्कूल आने से रोक दिया गया।
प्रिंसिपल दिलीप कुमार ने बताया कि इसकी सूचना प्रखंड एवं जिला शिक्षा पदाधिकारी को दे दी गई है। विद्यालय रविवार और सोमवार को बंद रहेगा। इसके बाद जलस्तर और विद्यालय परिसर की स्थिति का आकलन कर आगे विद्यालय संचालन पर निर्णय लिया जाएगा।
अंचल अधिकारी हरिनाथ राम ने बताया कि प्रशासन जलस्तर और संभावित स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है। आपदा की स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक तैयारियां की गयी हैं। ग्रामीणों को बाढ़ के दौरान सावधानी बरतने, सुरक्षित स्थानों पर जाने और संभावित खतरों से बचाव के उपायों की जानकारी दी जा रही है।
मुंगेर में आधा दर्जन गांव पानी में, सड़क पर झोपड़ी बनाकर रह रहे मुंगेर में सोमवार दोपहर 2 बजे गंगा का जलस्तर 38.82 मीटर पहुंच गया। खतरे का निशान 39.33 मीटर है, यानी नदी अब इससे सिर्फ 51 सेंटीमीटर नीचे है। शहरी क्षेत्र में गंगा का पानी वार्निंग लेवल 38.33 मीटर से 49 सेंटीमीटर ऊपर बह रहा है।
दोपहर तक जलस्तर बढ़ने का सिलसिला जारी था। जिसका असर अब निचले इलाकों में साफ दिखाई देने लगा है। जिले के अलग-अलग हिस्सों में करीब आधा दर्जन गांव पानी से घिर चुके हैं और लगभग 200 लोग प्रभावित हुए हैं। बरियारपुर प्रखंड के मुरला मुशहरी और लालजी टोला में पानी घुस गया है।
प्रशासन ने इन इलाकों में नाव परिचालन की तैयारी शुरू कर दी है। वहीं हवेली खड़गपुर प्रखंड का कृष्णानगर गांव चारों तरफ से बाढ़ के पानी से घिर गया है। ग्रामीण सुमन यादव ने कहा कि “तीन दिनों के अंदर इतना पानी बढ़ गया है कि पूछिए मत। हम लोगों ने बिल्कुल नहीं सोचा था कि पानी घर के अंदर तक आ जाएगा।
अब हमारे इलाके के लोग सड़क पर झोपड़ी बनाकर रहने को मजबूर हैं। पानी अभी भी लगातार बढ़ रहा है। हर साल करीब दो महीने तक हमें इसी तरह की स्थिति झेलनी पड़ती है। लेकिन इस बार पानी देर से आया है, इसलिए हमें डर है कि संकट छह महीने तक बना रह सकता है।
अभी तक न तो प्रशासन से कोई देखने आया है और न ही ब्लॉक या जिला स्तर से कोई अधिकारी पहुंचा है। हमारी सबसे बड़ी चिंता बच्चों को लेकर है। सड़क पर बच्चों के साथ रहना सुरक्षित नहीं लगता।
हम सरकार से यही चाहते हैं कि कम से कम रहने, खाने और बच्चों की सुरक्षा के लिए जरूरी सुविधा उपलब्ध कराई जाए।” कुछ शहरी इलाके भी प्रभावित गंगा का पानी मुंगेर नगर निगम के निचले इलाकों में भी पहुंचने लगा है। सोमवार को वार्ड संख्या 31 के लल्लूपोखर सीढ़ी घाट, बेलन बाजार और बंगाली टोला में पानी प्रवेश कर गया।
सोझी घाट स्थित डॉल्फिन पार्क में भी पानी पहुंचने के बाद उसे सुरक्षा के मद्देनजर बंद कर दिया गया। कुतलुपुर दियारा क्षेत्र में कटाव की शिकायत के बाद बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, बेगूसराय को तत्काल कटावरोधी कार्य कराने का निर्देश दिया गया है। हरिणमार और झौवाबहियार में एसडीआरएफ टीम के ठहरने के लिए जगह चिह्नित करने को कहा गया है।
भागलपुर में 7 गांव जलमग्न, सीएम जायजा लेने पहुंचे नवगछिया के राघोपुर इलाके में गंगा की तेज धारा और अचानक शुरू हुए कटाव से स्थिति गंभीर हो गई है। यहां के ग्रामीण राज किशोर ने बताया कि “हम लोगों ने पिछले कुछ दिनों में गंगा की धारा में काफी बदलाव देखा है।
रात के समय पानी का दबाव अचानक बढ़ जाता है और नदी किनारे की जमीन तेजी से कटने लगती है। इस बार कटाव जिस तरह से बढ़ा है, उससे आसपास के लोगों की चिंता बढ़ गई है। प्रशासन की टीमें मौके पर काम कर रही हैं, लेकिन पानी का दबाव लगातार बना हुआ है।
हमारी मांग है कि संवेदनशील जगहों पर लगातार निगरानी रखी जाए और जरूरत पड़ने पर तुरंत बचाव कार्य शुरू किया जाए।” इधर, सोमवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राघोपुर क्षेत्र का हवाई सर्वेक्षण कर कटाव और बाढ़ की स्थिति का जायजा लिया।
इसके बाद भागलपुर एयरपोर्ट पर अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक हुई, जिसमें जलस्तर, कटाव, तटबंधों की सुरक्षा और राहत-बचाव कार्यों की स्थिति पर चर्चा की गई। अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि संबंधित विभागों की टीमें पिछले 15-20 दिनों से लगातार राहत और बचाव कार्य में जुटी हैं।
बैठक में पुल से जुड़े निर्माण कार्य को फिलहाल करीब 15 दिनों के लिए आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को संवेदनशील इलाकों में लगातार निगरानी रखने और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल राहत-बचाव कार्य शुरू करने का निर्देश दिया।
उन्होंने कहा कि बाढ़ प्रभावित लोगों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और प्रशासन को पूरी तत्परता से काम करना होगा। कटाव की मौजूदा स्थिति के पीछे नदी की बदलती धारा को प्रमुख कारण बताया गया है।
अधिकारियों के अनुसार, दियारा क्षेत्र में अचानक पानी का दबाव बढ़ा और सिल्ट वाले हिस्से से टकराने के बाद गंगा की धारा बदल गई। इसके बाद जमीन के नीचे से कटाव यानी अंडरमाइनिंग शुरू हो गई, जिससे स्थिति तेजी से गंभीर हुई। अधिकारियों और इंजीनियरों के अनुसार, इतनी तेजी से नीचे से कटाव होने का अनुमान नहीं था।
अधिकारियों ने यह भी बताया कि गंगा की धारा का स्वभाव लगातार बदलता रहता है। धारा बदलने के साथ कभी नदी के एक किनारे तो कभी दूसरे किनारे कटाव की स्थिति बनती है। इसी वजह से संवेदनशील इलाकों में लगातार निगरानी रखी जा रही है और जरूरत के अनुसार कटाव रोकने के उपाय किए जा रहे हैं।
कटिहार में 30 हजार आबादी पर बाढ़ का खतरा कटिहार के कुर्सेला और बरारी प्रखंड में गंगा और कोसी के बढ़ते जलस्तर से बाढ़ का दबाव बढ़ गया है। कुर्सेला के निचले इलाकों में पानी फैलने लगा है।
बल्थी महेशपुर सड़क-सह-तटबंध पर पानी का दबाव बढ़ रहा है, जबकि पत्थल टोला की ओर जाने वाली सड़क के आसपास जलजमाव से ग्रामीणों की आवाजाही प्रभावित हुई है।
कोसी के जलस्तर में उतार-चढ़ाव से जरलाही, पूर्वी मुरादपुर और दक्षिणी मुरादपुर पंचायत समेत शाहपुर धर्मी, आंशिक कुरसेला नगर पंचायत, उत्तरी मुरादपुर, खेरिया, बालूटोला, तीनघरिया, कमलाकान्ही, मधेली और कटरिया के इलाके प्रभावित हैं। इन क्षेत्रों में करीब 30 हजार की आबादी पर बाढ़ का असर पड़ा है।
स्थानीय ग्रामीण अनिल महतो कहते हैं, “हम लोग लगातार पानी बढ़ता देख रहे हैं। निचले इलाकों में पानी फैलने लगा है और रास्तों पर जलजमाव से आने-जाने में परेशानी हो रही है। अगर जलस्तर और बढ़ा तो गांवों तक पानी पहुंच सकता है।
प्रशासन को अभी से संवेदनशील इलाकों पर नजर रखनी चाहिए।” उधर, त्रिमोहिनी संगम पर गंगा-कोसी का बहाव तेज होने से स्नान करने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा भी चुनौती बनी हुई है। यहां पहले डूबने की घटना हो चुकी है। ऐसे में घाटों पर निगरानी और लोगों को गहरे पानी में जाने से रोकना जरूरी है।
राहत और बचाव की तैयारी तेज मुंगेर में संभावित बाढ़ को देखते हुए जिला प्रशासन ने सभी अधिकारियों की छुट्टी रद्द कर दी है। एसडीओ, बीडीओ, सीओ और थानाध्यक्षों को अपने क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखने और रिपोर्ट भेजने का निर्देश दिया गया है।
राहत शिविरों में मेडिकल टीम और दवाओं की व्यवस्था, पशुचारा, कम्युनिटी किचेन, आश्रय स्थल और पॉलीथिन शीट की तैयारी की जा रही है। नावों का निबंधन भी कराया गया है। एसडीआरएफ और एनडीआरएफ के साथ स्थानीय गोताखोरों की भी तैनाती की गई है।
वहीं भागलपुर में बाढ़ को लेकर ऊर्जा मंत्री शैलेश कुमार उर्फ बूलो मंडल ने कहा, “मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि बाढ़ प्रभावित लोगों की सुरक्षा और बचाव कार्य में किसी भी तरह की कमी नहीं होनी चाहिए। प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासन को पूरी मुस्तैदी के साथ राहत और बचाव कार्य चलाने को कहा गया है।
सरकार स्थिति पर लगातार नजर रख रही है और जरूरत के अनुसार हरसंभव कदम उठाए जा रहे हैं।”
📡 स्रोत: NewsData.io