गंगा के बैकवाटर से 350 बीघे धान डूबे:नालंदा के सरमेरा में बांध के ऊपर पहुंचा पानी; SDRF और स्पीड बोट तैनात
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →नालंदा की स्थानीय नदियों का जलस्तर भले शांत हो गया हो, लेकिन गंगा के बैकवाटर ने सरमेरा के टाल क्षेत्र में परेशानी बढ़ा दी है। पानी का दबाव लगातार बढ़ने से जमींदारी बांधों पर खतरा गहरा गया है। पेंदी गांव के पूर्वी इलाके में पानी तटबंध के शीर्ष स्तर तक पहुंच चुका है। तटबंध टूटने की स्थिति में बाढ़ का पानी सीधे रिहायशी इलाकों में प्रवेश कर सकता है।
पेंदी, सदहा और पुरानी इसुआ गांव के खंधों में 8 से 10 फीट तक पानी भर गया है। इससे 350 बीघे से अधिक में लगी धान की फसल पूरी तरह डूब गई है। तेज जलप्रवाह के कारण कई घरों के आसपास पानी भरने से वे टापू जैसे हो गए हैं। बांध बचाने में जुटे ग्रामीण और प्रशासन तटबंध को कटने से बचाने के लिए प्रशासन और ग्रामीण लगातार काम कर रहे हैं।
संवेदनशील जगहों पर बालू भरी बोरियां डाली जा रही हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से फसल क्षति का जल्द सर्वे कराने और उचित मुआवजा देने की मांग की है। डीएम ने बांधों का किया निरीक्षण स्थिति को देखते हुए डीएम उदिता सिंह ने प्रशासनिक और तकनीकी टीम के साथ टाल क्षेत्र का दौरा किया। उन्होंने पेंदी, इसुआ और सदहा जमींदारी बांधों की सुरक्षा का जायजा लिया।
डीएम ने अधिकारियों को संवेदनशील स्थानों पर 24 घंटे लगातार गश्त करने का निर्देश दिया। साथ ही आपात स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त संख्या में सैंडबैग का पहले से भंडारण सुनिश्चित करने को कहा। एसडीआरएफ और स्पीड बोट तैनात राहत और बचाव कार्य के लिए प्रभावित क्षेत्रों में एसडीआरएफ की टीम और स्पीड बोट तैनात की गई हैं।
निरीक्षण के दौरान ग्रामीणों ने आवागमन की समस्या भी डीएम के सामने रखी। इस पर डीएम ने मौके पर मौजूद कार्यपालक अभियंता को सड़क और पुल निर्माण के लिए अविलंब विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने का निर्देश दिया।
📡 स्रोत: NewsData.io
🎙️ वॉयस ऑफ क्रांति का मत
गंगा के बैकवाटर से धान डूबने की घटना हमें यह याद दिलाती है कि प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व में हमें सतर्क रहना चाहिए। तटबंधों की मजबूती और जल प्रबंधन पर ध्यान देकर बाढ़ के जोखिम को कम किया जा सकता है। जब आपसी विवाद हो, तो संवाद और कानूनी मार्ग अपनाएँ, ताकि हिंसा से बचा जा सके। समाज को एकजुट होकर जल संरक्षण और आपदा प्रबंधन की योजनाएँ बनानी चाहिए, जिससे भविष्य में ऐसी दुर्घटनाएँ टाली जा सकें।