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गया श्राद्ध के बाद भी पितरों का तर्पण एवं श्राद्ध करना आवश्यक : धर्माचार्य गंगा प्रसाद आचार्य

लेखक: Santosh Yogi अंतिम अपडेट: 26 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
गया श्राद्ध के बाद भी पितरों का तर्पण एवं श्राद्ध करना आवश्यक : धर्माचार्य गंगा प्रसाद आचार्य

भोपाल। अखिल भारतवर्षीय धर्म संघ शाखा मध्य प्रदेश के धर्माचार्य गंगा प्रसाद आचार्य ने कहा कि गया श्राद्ध एवं पिंडदान करने के बाद भी पितृपक्ष में पितरों का तर्पण एवं श्राद्ध करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि पितृपक्ष में अपने पितरों का नित्य तर्पण तथा पंचबलि करना शास्त्रीय परंपरा के अनुसार महत्वपूर्ण माना गया है।

धर्माचार्य गंगा प्रसाद आचार्य ने कहा कि कुछ लोगों में यह भ्रम है कि गया में पिंडदान एवं श्राद्ध करने के बाद दोबारा तर्पण और श्राद्ध करना वर्जित है। उन्होंने इसे शास्त्रसम्मत एवं प्रमाणिक मान्यता नहीं बताया। उनके अनुसार गया श्राद्ध का उद्देश्य पितरों को उत्तम गति प्रदान करना है, लेकिन इसके बाद भी पितरों के निमित्त जल और भोजन अर्पित करने की परंपरा बनी रहती है।

उन्होंने कहा कि जिस प्रकार जीवित मनुष्य को जीवन के लिए जल और भोजन आवश्यक होता है, उसी प्रकार धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पितरों के लिए भी तर्पण एवं श्राद्ध का विशेष महत्व है। इसलिए पितृपक्ष में श्रद्धापूर्वक पितरों का तर्पण एवं श्राद्ध करना चाहिए।

💡 पृष्ठभूमि (Background)

यह खबर बताती है कि गया श्राद्ध और पिंडदान के बाद भी पितृपक्ष में पितरों का तर्पण और श्राद्ध जारी रखना आवश्यक है, जैसा कि धर्माचार्य गंगा प्रसाद आचार्य ने बताया। यह विषय हिंदू परम्परा के अनुष्ठानिक नियमों पर प्रकाश डालता है, जहाँ पितृपक्ष की पूजा को जीवन के आध्यात्मिक संतुलन के लिए अनिवार्य माना जाता है। खबर का महत्व इसलिए है क्योंकि कई लोग यह मानते हैं कि गया श्राद्ध ही पर्याप्त है, जबकि पारंपरिक दृष्टिकोण से पितृपक्ष की पूजा भी आवश्यक है। इससे आम जनता को यह समझने में मदद मिलेगी कि पितृपक्ष की प

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Santosh Yogi

संतोष योगी भोपाल के वरिष्ठ पत्रकार हैं जो भोपाल जिला एवं आसपास की घटनाओं को प्रमुखता से कवर करते हैं।