GDP विवाद पर केंद्र की दो टूक, आंकड़े मजबूत, हेरफेर के आरोप बेबुनियाद
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31 अगस्त को मिनिस्ट्री ऑफ स्टेटिक्स एंड प्रोग्राम (MoSPI) ने एक रिपोर्ट पेश की थी, जिसमें बताया गया था कि भारत की अर्थव्यवस्था के आंकड़े पेश किए थे.
जिसमें सामने आया कि वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत की अर्थव्यवस्था यानी GDP 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ी है. जिसे देख कई लोग हैरान हो गए तो वहीं कई लोगों ने इस पर सवाल भी खड़े किए. विपक्ष से लेकर आम जनता तक ने इन आंकड़ों पर आपत्ति जताई. जिसके बाद खुद सरकार ने दो दिन बाद ही इन लोगों को जवाब दिया है.
सरकार की दो टूक दरअसल हाल ही में वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के जीडीपी अनुमानों पर उठे विवाद और आंकड़ों में हेरफेर के आरोपों को सरकार ने सिरे से खारिज कर दिया है.
इसके लिए सरकार की तरफ से सफाई पेश करते हुए बताया गया है कि चालू वर्ष की वृद्धि दर को बेहतर दिखाने के लिए पिछले साल के आंकड़ों में कोई कटौती नहीं की गई है.
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वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही के GDP आंकड़े कम होने को लेकर उठे सवालों पर सरकार ने कहा कि आंकड़े जानबूझकर कम नहीं किए गए हैं. नए आधार वर्ष 2022-23, अपडेटेड डाटा और नई इंडेक्स ऑफ इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन (IIP) और प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (PPI) सीरीज शामिल होने के कारण पुराने आंकड़ों में बदलाव हुआ है.
इसलिए पुरानी और नई GDP सीरीज की सीधे तुलना करना सही नहीं होगा. मैन्युफैक्चरिंग में नेगेटिव डिफ्लेटर क्यों? मैन्युफैक्चरिंग में इनपुट यानी कच्चे माल की कीमतें तेजी से बढ़ने के कारण रियल ग्रॉस वैल्यू एडेड (GVA) ग्रोथ 9.2% और नॉमिनल ग्रोथ 7.7% रही.
इसी वजह से डिफ्लेटर -1.5% दिखा. इसका मतलब ये नहीं है कि प्रोडक्ट्स की कीमतें गिर गई हैं. <p style="text-align: just
📡 स्रोत: ABP Live Vyapar