घटिया बयानबाजी की राजनीति बनाम जनसेवा की राजनीति, अभय मिश्रा के खिलाफ कार्रवाई की मांग, राजेंद्र शुक्ल के पक्ष में उठी आवाज, अभय मिश्रा चोर है के लगे नारे, देखें वीडियो
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राजनीति में मर्यादा, जवाबदेही और जनहित को प्राथमिकता देने की मांग, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के नाम ज्ञापन सौंपकर सेमरिया विधायक के इस्तीफे और निष्कासन की मांग
भोपाल, 14 सितंबर। सेमरिया विधायक अभय मिश्रा के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर सामाजिक संगठनों और राजनीति में शुचिता की मांग करने वाले समाजसेवियों के एक समूह ने सोमवार को प्रदेश कांग्रेस कार्यालय पहुंचकर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के नाम ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शनकारियों ने अभय मिश्रा से विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा लेने के साथ ही उन्हें कांग्रेस पार्टी से निष्कासित करने की मांग की। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने विधायक की कथित बयानबाजी, राजनीतिक कार्यशैली और विभिन्न विवादों को लेकर सवाल उठाए।
ज्ञापन देने पहुंचे लोगों ने आरोप लगाया कि अभय मिश्रा की राजनीति में व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप और विवादित मुद्दों को ज्यादा महत्व मिल रहा है। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि जनप्रतिनिधि से अपेक्षा की जाती है कि वह सार्वजनिक जीवन में संयमित भाषा का इस्तेमाल करे और क्षेत्र की समस्याओं को प्राथमिकता देते हुए विकास तथा जनसेवा की राजनीति करे। उन्होंने आरोप लगाया कि अभय मिश्रा की राजनीतिक शैली इसके विपरीत दिखाई देती है।
प्रदर्शनकारियों ने अभय मिश्रा के राजनीतिक सफर का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि वर्ष 2023 में भाजपा से टिकट नहीं मिलने के बाद उन्होंने कांग्रेस का दामन थामा और कांग्रेस के टिकट पर सेमरिया से चुनाव लड़ा। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि चुनाव जीतने के बाद भी उनकी राजनीतिक गतिविधियों और बयानों को लेकर लगातार विवाद सामने आते रहे हैं।
ज्ञापन में सेमरिया विधानसभा क्षेत्र की तालाब की जमीन पर कथित निजी परिसर निर्माण, शहडोल में कथित खनन घोटाले, एक ही जमीन को अलग-अलग लोगों को बेचे जाने तथा चमड़ा फैक्ट्री और धीरमा नाला क्षेत्र की जमीन से जुड़े कथित कब्जे जैसे मामलों का भी उल्लेख किया गया। प्रदर्शनकारियों ने कांग्रेस नेतृत्व से इन सभी आरोपों के बावजूद कांग्रेस पार्टी का सदस्य बनाए रखने पे सवाल उठाए और उन्हें तत्काल पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाने का निवेदन किया।
आंदोलन में शामिल विमलेश मिश्रा ने आरोप लगाया कि उन्होंने अभय मिश्रा से जमीन खरीदी थी, लेकिन कथित तौर पर उसकी रजिस्ट्री किसी अन्य व्यक्ति के नाम करा दी गई। विमलेश मिश्रा के अनुसार इस संबंध में मामला भोपाल की अदालत में विचाराधीन है।
प्रदर्शनकारियों ने कांग्रेस नेतृत्व से कहा कि उनके ज्ञापन और उठाए गए सवालों को केवल राजनीतिक विरोध मानकर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उनका कहना था कि यदि किसी जनप्रतिनिधि के खिलाफ जमीन, प्रशासनिक कार्यप्रणाली या सार्वजनिक आचरण से जुड़े गंभीर आरोप सामने आते हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच होना जरूरी है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कांग्रेस नेतृत्व ने ऐसे मामलों पर कार्रवाई नहीं की तो इसका राजनीतिक असर आने वाले समय में प्रदेश की राजनीति पर पड़ सकता है।
प्रदर्शनकारियों ने यह भी कहा कि रीवा की राजनीति में जनसेवा, विकास और क्षेत्र की समस्याओं को सरकार तक पहुंचाने की परंपरा को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। इसी संदर्भ में उन्होंने उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल की लंबे समय से चली आ रही राजनीतिक सक्रियता और क्षेत्र के विकास से जुड़े उनके प्रयासों का उल्लेख किया। उनका कहना था कि राजनीतिक बहस का केंद्र व्यक्तिगत आरोपों और बयानबाजी के बजाय जनता के हित, विकास कार्य और जनसेवा होना चाहिए।
रीवा की राजनीति में राजेंद्र शुक्ल लंबे समय से सक्रिय हैं और क्षेत्रीय राजनीति में उनका मजबूत जनाधार माना जाता है। तमाम रीवा वासी उन्हें रीवा के विकास से जुड़े मुद्दों को लगातार सरकार के माध्यम से हल करने वाले नेता के रूप में जानते हैं। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि राजनीतिक नेताओं के बीच मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन जनता के बीच अपनी बात रखने के लिए भाषा और राजनीतिक मर्यादा का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है।
ज्ञापन के माध्यम से कांग्रेस नेतृत्व से अभय मिश्रा के खिलाफ लगाए गए आरोपों की जांच कराने, विधानसभा सदस्यता से इस्तीफा लेने और पार्टी से निष्कासन की मांग दोहराई गई। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि राजनीति में विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए आरोपों की निष्पक्ष जांच और जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही सुनिश्चित करना जरूरी है।