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घंटों लग रही लाइन फिर भी यूरिया नहीं:कालाबाजारी...गोदामों में 3 लाख मी. टन खाद; किसान खाली हाथ, फसलें खराब

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 18 अगस्त 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
घंटों लग रही लाइन फिर भी यूरिया नहीं:कालाबाजारी...गोदामों में 3 लाख मी. टन खाद; किसान खाली हाथ, फसलें खराब

प्रदेश में कमजोर मानसून और खाद की कमी की वजह से इस साल खेतों में लक्ष्य की तुलना में 14.88 लाख हेक्टेयर खरीफ फसल कम बोई गई है। बाजरा, मक्का, दालों, मूंगफली और सोयाबीन को यूरिया, डीएपी, एनपीके की जरूरत है, लेकिन कृषि विभाग के कुप्रबंधन और विक्रय केंद्रों पर हो रही कालाबाजारी से खाद नहीं मिल रही है। कृषि विभाग का दावा है कि प्रदेश में 3 लाख 9 हजार मीट्रिक टन यूरिया, 68 हजार मीट्रिक टन डीएपी, 80 हजार मीट्रिक टन एनपीके एवं 1 लाख 68 हजार मीट्रिक टन उर्वरकों का स्टॉक उपलब्ध है। इधर, हालत यह है कि कई जिलों में विक्रय केंद्रों पर किसानों की लंबी कतारें लग रही हैं। सरकार के आवंटन के बावजूद अधूरी सप्लाई से हालात बिगड़े हैं। फसलें चौपट होने के कगार पर पहुंच गई हैं। केंद्र ने आवंटन किया, लेकिन किसानों तक नहीं पहुंची खाद केंद्र की ओर से राजस्थान को यूरिया का 7.18 लाख मीट्रिक टन, डीएपी का 3.32 लाख मीट्रिक टन और एनपीके का 1.39 लाख मीट्रिक टन आवंटित हुआ। प्रदेश में 10 कंपनियां खाद की सप्लाई करती हैं। विभाग ने प्रत्येक उर्वरक विक्रेता के विक्रय परिसर पर उर्वरकों के वितरण व प्रभावी मॉनिटरिंग के लिए विभागीय अधिकारियों व कर्मचारियों की ड्यूटी लगाने की कार्रवाई की है, लेकिन यह केवल खानापूर्ति ही साबित हुई है। भरतपुर में विक्रय केंद्र पर कतार प्रमुख फसलों का बुआई क्षेत्रफल (लाख हेक्टेयर में) मध्य एशिया में युद्ध के कारण आपूर्ति में बाधा देश में आयातित डीएपी की आपूर्ति मध्य एशिया युद्ध होने के कारण बाधित रही है। जुलाई 2026 तक 8,706 निरीक्षण, 15 एफआईआर, 2 गिरफ्तारी, 55 लाइसेंस निरस्त/निलंबित व 25 मीट्रिक टन उर्वरक जब्त किया गया है। किसान रबी फसल के लिए एडवांस में खरीद रहे हैं खाद खाद पर्याप्त उपलब्ध है, लेकिन किसान रबी फसल के लिए एडवांस में डीएपी व यूरिया खरीद रहे हैं। ऐसे में कमी हुई है। -विनोद कुमार, संयुक्त निदेशक 266 रुपए बोरी वाली खाद 500 में बिक रही किसानों का आरोप है कि विभाग केवल कागजों में खाद का स्टॉक बता रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत को नहीं देख रहा है। हालात यह हैं कि 266 रुपए में मिलने वाला यूरिया थोक स्तर पर 400 रुपए तक और किसान तक पहुंचते-पहुंचते 500 रुपए से भी महंगा हो जाता है। दुकानदार व सोसाइटियों में किल्लत दिखा कर धड़ल्ले से कालाबाजारी हो रही है। कृषि कार्य के लिए अलॉट खाद, इंडस्ट्रीज उपयोग के लिए प्लाईवुड, रेजिन, एमडीएफ, पॉलिमर्स निर्माण इकाइयों में जा रहा है।

📡 स्रोत: NewsData.io

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