गिरा दूंगा एटम बम! पुतिन ने दी ऐसी धमकी, कांप गए अमेरिका के सारे यार
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रूस के राष्ट्रपति व्लादमीर पुतिन ने पश्चिमी देशों खासतौर पर नाटो देशों को सख्त चेतावनी दी है कि अगर बाल्टिक क्षेत्र में स्थित रूसी इलाके कालिनीनग्राद पर सीधे हमला होता है तो मॉस्को परमाणु बम समेत अपने सभी किस्म के हथियारों का इस्तेमाल कर सकता है। पुतिन ने एक घंटे के अंदर दूसरी बार ऐसी चेतावनी दी है। इसने दुनिया भर में हड़कंप मचा दिया है कि क्या रूस यूक्रेन जंग में परमाणु बम का इस्तेमाल हो सकता है?
दरअसल पुतिन का यह बयान तब आया है जब मॉस्को नाटो को एक राजनिक चेतावनी भेजी है। रूस का कहना है कि नाटो की तरफ से कालिनीनग्राद को अलग-थलग करने या फिर उसकी घेराबंदी करने की धमकियां दी जा रही हैं। हालांकि नेटो ने इस बात को खारिज कर दिया है कि वह रूसी इलाके के लिए खतरा है। नाटो ने मॉस्को की परमाणु हथियारों से जुड़ी बयानबाजी की भी आलोचना की है।
यूक्रेन युद्ध के बीच नेटो और रूस के रिश्तों में पहले से ही ज्यादा तनाव है और इस नए घटनाक्रम ने इसे और बढ़ा दिया है। मॉस्को में बोलते हुए रूसी नेता ने कहा कि उनका किसी भी यूरोपीय देश पर हमला करने का कोई इरादा नहीं है। लेकिन जरूरत पड़ने पर वे पश्चिमी देशों की आक्रामकता का जवाब देने के लिए तैयार हैं।
उन्होंने नेटो सदस्य देशों पोलैंड और लिथवानिया के बीच घेरे रूसी इलाके कालिनी नगरात का भी जिक्र किया। इसे भी पढ़ें: Russian Oil ज्यादा खरीदने लगा China, India की खरीद पर असर पड़ते देख Modi ने तुरंत निकाला नया रास्ता, Ship to Ship Transfer के जरिये करवा दिया खेल पुतिन की यह चेतावनी क्यों आई?
बता दें कि पुतिन की यह चेतावनी कालिनी नगरात के पास नेटो के हालिया सैन्य अभ्यासों के बाद आई है। नेटो ने इन सैन्य अभ्यासों को अपनी रक्षा क्षमता और प्रतिरोध को मजबूत करने की कवायद बताया है। इन अभ्यासों पर मॉस्को ने कड़ी चिंता जताई है। मॉस्को ने सितंबर के आखिर में चेतावनी दी थी कि नाटो ने अगर हवाई या फिर समुद्री रास्ते से इस इलाके की घेराबंदी करने की कोशिश की तो वह जवाबी कार्रवाई करेगा।
पुतिन ने कहा बाल्टिक सागर में एक के बाद एक सैन्य अभ्यास फिर हमारे जहाजों और नौकाओं को जब्त करने की कोशिशें यह सब तनाव बढ़ाने वाली बातें हैं और फिर हमें कालिनीनग्राद क्षेत्र के बारे में बयान सुनने को मिलने लगे हैं। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर रूसी संघ पर सीधे हमले की नौबत आती है।
खासकर कालिनीनग्राद और शायद कुछ अन्य इलाकों पर तो जाहिर है कि हमारे देश के पास मौजूद सभी हथियारों का इस्तेमाल का मुद्दा एजेंडे में जरूर और अनिवार्य रूप से शामिल होगा। इससे बचा नहीं जा सकता है। दूसरी तरफ नेटो और कई यूरोपीय देशों समेत यूनाइटेड किंगडम ने रूस पर उनके खिलाफ हाइब्रिड वॉरफेयर चलाने का आरोप लगाया है।
इसमें साइबर हमले, तोड़फोड़ और जासूसी की कोशिशें शामिल हैं। जिनका मकसद यूक्रेन के लिए उनके समर्थन को कमजोर करना है। इसे भी पढ़ें: 4 साल में पहली बार एक सुर में बोले रूस और यूक्रेन, दोनों को पसंद आया मोदी का प्रस्ताव दुनिया के नक्शे को देखें तो रूस के पश्चिम इलाके में स्थित बाल्टिक सागर के किनारे बसा कालिनीनग्राद रूस का एक छोटा इलाका है जो नेटो देशों से घिरा हुआ है।
इसके एक तरफ पोलैंड है और दूसरी तरफ लिथुआ है। वैसे तो यह रूस का हिस्सा है लेकिन रूसी जमीन से बिल्कुल अलग-थलग है। रूस से कालिनीनग्राद जाने के लिए दो-तीन देशों की सीमाओं को पार करना पड़ता है। इसे रूस का एक्सक्लेव कहा जाता है। यानी ऐसा इलाका जो देश के मुख्य हिस्से से दूर किसी दूसरे देश की सीमा में स्थित हो।
यही रूस के लिए कमजोरी है। लेकिन इसका अहम रणनीतिक महत्व भी है। साल के 365 दिन बर्फ से मुक्त रहने के कारण बाल्टिक सागर के किनारे स्थित इस इलाके में रूसी नौसैनिक बेड़े का मुख्य अड्डा है। इतना ही नहीं यह इलाका रूस के लिए एक सैनिक किले की तरह भी है। जहां से रूस सीधे बर्लिन, वारसो, कोपेनहेगन और स्टॉकहोम जैसे बड़े यूरोपीय शहरों को सेकंडों में निशाना बना सकता है।
यही रणनीतिक वजह है कि नेटो देश रूस से खौफ खाते हैं। यूक्रेन और रूस का युद्ध अब अपने पांचवें साल में है। लेकिन पुतिन हमले को धीमा करने का कोई संकेत नहीं दे रहे हैं।
📡 स्रोत: NewsData.io
💡 पृष्ठभूमि (Background)
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने हाल ही में नाटो और पश्चिमी देशों को चेतावनी दी है कि यदि बाल्टिक क्षेत्र में स्थित रूसी क्षेत्र कालिनीनग्राद पर हमला किया जाता है, तो मॉस्को परमाणु बम सहित सभी प्रकार के हथियारों का उपयोग कर सकता है। यह बयान एक घंटे के भीतर दो बार दोहराया गया, जिससे वैश्विक स्तर पर चिंताएँ बढ़ गईं। इस खबर का महत्व इस तथ्य में है कि यह रूस के सैन्य दावों को नई ऊँचाइयों पर ले जाता है और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर जोखिम पैदा करता है। आम जनता पर इसका असर भय, अनिश्चितता और