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गोदाम में खाद... फिर किल्लत और लाइन में किसान क्यों

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 30 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
गोदाम में खाद... फिर किल्लत और लाइन में किसान क्यों

जिले में खाद के लिए किसान घंटों कतार में खड़े हैं। कई जगह लंबा इंतजार करने के बाद भी बमुश्किल एक कट्टा खाद ही मिल पा रहा है। बुवाई के समय खाद की जरूरत के बीच निवाई में कृषि विभाग और पुलिस की डीएसटी की संयुक्त कार्रवाई ने खाद वितरण व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। दूसरी तरफ व्यापारियों के यहां उपलब्ध स्टॉक और बेचान के रिकॉर्ड में अंतर सामने आना व्यवस्था पर भी संदेह खड़ा करता है।

विभाग के अनुसार खाद की कालाबाजारी और अवैध स्टॉक की रोकथाम के लिए लगातार निरीक्षण किए जा रहे हैं। शनिवार को डीएसटी की कार्रवाई के बाद बनी स्थिति को देखते हुए देर रात तक जांच और गोदाम सीज करने की कार्रवाई जारी रही। मंगलवार को निवाई की सहकारी समिति, वनस्थली पर सुबह 9 बजे से खाद लेने के लिए पहुंचे किसान दोपहर 1 बजे तक कतार में रहे।इसके बावजूद खाद नहीं मिला।

किसानों ने हंगामा किया। कृषि विभाग के खिलाफ नारेबाजी की। दरअसल, निवाई में सामने आए इस मामले ने यह सवाल भी खड़ा किया है कि जिले के अन्य क्षेत्रों में खाद के स्टॉक और बेचान का रिकॉर्ड कितना व्यवस्थित है। अन्य इलाकों में भी इसी तरह सख्ती से जांच हो तो खाद के स्टॉक, बेचान और वितरण से जुड़ी स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।

घंटों कतार, फिर भी सीमित मात्रा में खाद, किसानों में आक्रोश, विभाग का टाल-मटोल जवाब जिले के विभिन्न खाद वितरण केंद्रों पर सुबह से किसानों की कतारें लग रही हैं। किसान घंटों अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। इसके बावजूद कई किसानों ने जरूरत के मुकाबले सीमित मात्रा में खाद मिलने की शिकायत की है।

दूसरी तरफ मंगलवार को वनस्थली सहकारी समिति पर सैकड़ों किसान सुबह 9 बजे निर्धारित वितरण के बावजूद दोपहर 1 बजे तक कतारों में खड़े रहे। बाद में टोकन रद्द कर खाद नहीं देने की सूचना मिली। इससे किसानों में आक्रोश फैल गया। इसके बाद किसानों ने कृषि विभाग और राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। ऐसे में किसानों के बीच यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब खाद की इतनी जरूरत है तो उपलब्ध स्टॉक का वितरण किसानों तक नियमित रूप से क्यों नहीं हो रहा।

^डीएपी के 5 और यूरिया के 10 बैग की निर्धारित सीमा के बावजूद आधार कार्ड के जरिए 1700 बैग यूरिया का वितरण कैसे हुआ?

यह व्यवस्था की निगरानी पर बड़ा सवाल है। शाम 5 बजे जांच पूरी होने के बाद भी गोदाम सील नहीं किए गए। किसान महापंचायत की ओर से अनशन की घोषणा के बाद रात 8.30 बजे कार्रवाई शुरू हुई। पहले सिर्फ दो गोदाम सील करने की कोशिश हुई। दबाव के बाद 19 गोदाम रात 11 बजे तक सील किए गए। इससे कार्रवाई की तत्परता पर सवाल उठते हैं।

-रामेश्वर चौधरी, किसान नेता ^किसान खाद के लिए घंटों कतार में खड़ा है। उसे बमुश्किल एक कट्टा मिल रहा है। व्यापारियों के यहां स्टॉक और बेचान में अंतर सामने आ रहा है। इससे विभागीय निगरानी पर सवाल उठते हैं। खाद किसान तक क्यों नहीं पहुंच रही। स्टॉक कहां जा रहा है। इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

जिम्मेदारी तय कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। -पोखरलाल जाट, किसान नेता ^खाद की कालाबाजारी और अवैध स्टॉक की रोकथाम के लिए विभाग निरीक्षण कर कार्रवाई कर रहा है। शनिवार को डीएसटी की कार्रवाई के बाद हंगामे की स्थिति को देखते हुए देर रात तक जांच करनी पड़ी। गोदाम सीज करने की कार्रवाई भी करनी पड़ी।

किसानों के लिए आवंटित खाद की कालाबाजारी रोकने और वितरण व्यवस्था पर निगरानी के लिए विभाग पूरी तरह सतर्क है। आगे भी नियमानुसार कार्रवाई जारी रहेगी। -रामलाल जाट, संयुक्त निदेशक, कृषि (विस्तार) विभाग, टोंक

📡 स्रोत: NewsData.io

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