गोगावां अस्पताल में महिला डॉक्टर का टोटा! 250–300 मरीज रोज, फिर भी स्थायी स्त्री रोग विशेषज्ञ नहीं
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खरगोन। गोगावां के शासकीय अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर एक अहम सवाल खड़ा हो रहा है। क्षेत्र की महिलाओं के इलाज के लिए स्थायी महिला रोग विशेषज्ञ की नियुक्ति की मांग अब जिला प्रशासन तक पहुंच गई है। जमीयत उलमा-ए-हिंद, इंदौर संभाग ने खरगोन कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर अस्पताल की व्यवस्थाओं में तत्काल सुधार की मांग की है।

ज्ञापन के मुताबिक गोगावां अस्पताल में प्रतिदिन करीब 250 से 300 मरीज ओपीडी में पहुंचते हैं, जबकि कई दिनों में यह संख्या 300 के पार भी पहुंच जाती है। इसके बावजूद अस्पताल में स्थायी महिला रोग विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं है।
सबसे बड़ा सवाल महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर है। स्त्री एवं प्रसूति संबंधी जांच और उपचार के लिए महिलाओं को खरगोन जिला अस्पताल या निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ता है। गरीब और ग्रामीण परिवारों के लिए इसका मतलब है—अतिरिक्त खर्च, लंबा सफर और समय की बर्बादी।
छोटे ऑपरेशन तक के लिए खरगोन रेफर!
ज्ञापन में चिकित्सकीय और पैरामेडिकल स्टाफ की कमी का भी मुद्दा उठाया गया है। आरोप है कि आवश्यक सुविधाओं और विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी के चलते छोटे ऑपरेशन एवं जरूरी उपचार के लिए भी मरीजों को खरगोन रेफर करना पड़ता है।
जमीयत ने कलेक्टर से अस्पताल का निरीक्षण करवाकर वास्तविक स्थिति की समीक्षा करने, स्थायी महिला रोग विशेषज्ञ की तत्काल पदस्थापना, चिकित्सकों एवं पैरामेडिकल स्टाफ की कमी दूर करने और नियमित स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ की ओपीडी शुरू कराने की मांग की है।
अब सवाल प्रशासन से—इलाज के लिए कब तक करना पड़ेगा सफर?
गोगावां जैसे बड़े ग्रामीण क्षेत्र में यदि महिलाओं को सामान्य स्त्री रोग संबंधी उपचार के लिए भी दूसरे शहर जाना पड़े, तो यह सिर्फ सुविधा का सवाल नहीं, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था की पहुंच और जवाबदेही का सवाल है।
अब देखना यह है कि कलेक्टर को सौंपे गए ज्ञापन के बाद स्वास्थ्य विभाग कब तक कार्रवाई करता है और गोगावां अस्पताल को स्थायी महिला रोग विशेषज्ञ समेत आवश्यक चिकित्सा स्टाफ मिल पाता है या नहीं।