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गोरखपुर में मासूम के हत्यारे मास्टर को उम्रकैद:डेढ़ साल के बच्चे की ईंट से कूचकर हत्या की, सिरफिरे ने बोला था- पछतावा नहीं

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 20 अगस्त 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
गोरखपुर में मासूम के हत्यारे मास्टर को उम्रकैद:डेढ़ साल के बच्चे की ईंट से कूचकर हत्या की, सिरफिरे ने बोला था- पछतावा नहीं

गोरखपुर में बुधवार को डेढ़ साल के मासूम बच्चे के हत्यारे को कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। साथ ही 10 हजार के अर्थदंड से भी दंडित किया है। यह घटना 23 सितंबर 2024 की है। बांसगांव थाना क्षेत्र के आरोपी रंजीत उर्फ मास्टर (37) ने ईंट से कूचकर बच्चे की हत्या की थी।

पकड़े जाने पर पुलिस की पूछताछ में सिरफिरे ने बोला था कि उसे इस घटना का कोई पछतावा नहीं है। सिविल कोर्ट ने 23 महीने में इस मामले में फैसला सुनाया, इसके बाद परिजनों की आंखे भर आईं। परिजन बोले हत्यारा जीने के लायक नहीं है। कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हुए बोले कि अब जिंदगी भर जेल में ही सड़ेगा।

ऑपरेशन कनविक्शन के तहत आरोपी को सजा दिलाने में DGC प्रियानन्द सिंह और ADGC जयनाथ यादव का अहम योगदान रहा। अब जानिए पूरा मामला बांसगांव के भैंसारानी गांव निवासी बच्चे के पिता राहुल यादव ने हत्या के मामले में एफआईआर कराई थी।

राहुल यादव ने बताया कि 23 सितंबर 2024 की शाम मेरा डेढ़ साल को बेटा दिव्यांश घर के बाहर बैठ कर खेल रहा था। तभी पड़ोस में रहने वाले रंजित उर्फ मास्टर आया। वह बिना कारण ही बच्चे को गोद में उठाकर उसका सिर ईंट से कूचने लगा। इस दौरान बच्चे की दादी सुगना देवी बचाने की कोशिश की। लेकिन सिरफिरे मास्टर ने उन्हें धकेल दिया।

लहूलुहान हालत में बच्चे को वहीं फेंककर चला गया। लोगों के शोर मचाने पर परिजन उसे लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बांसगांव पहुंचे, जहां डॉक्टर ने बच्चे की गंभीर स्थिति को देखते हुए जिला अस्पताल रेफर कर दिया। गोरखपुर जाते समय रास्ते में ही दिव्यांश ने दम तोड़ दिया।

पोस्टमार्टम में सिर की हड्‌डी टूटना मौत की वजह सामने आई थी। ईंट से लगातार वार की वजह से बच्चे की सिर की हड्‌डी टूट गई थी। मास्टर को सम्मान में खाना देती थी दिव्यांश की मां नीतू बच्चे की फोटो आज भी लेकर रोती हैं। नीतू ने बताया कि हत्यारे रंजीत को गांव में सभी लोग मास्टर कहकर बुलाते थे। उसके परिवार में कोई नहीं था।

बड़ा भाई काफी पहले बाहर चला गया था। वहीं पर परिवार के साथ रहता था। रंजीत अपने घर पर अकेला ही रहता था। पहले फौज में जाने के लिए पढ़ाई की थी। इसके बाद गांव में ही घूमकर बच्चों को पढ़ाता था। इसलिए उसे मास्टर कहकर लोग बुलाते थे। अक्सर उसे भूख लगने पर खाना देती थी। मुझे नहीं पता था कि एक दिन मेरे दिव्यांश की जान लेगा।

दिव्यांश की बहन और भाई आज भी उसे याद करते हैं। पुलिस की जांच में सामने आया था कि रंजीत मानसिक रूप से परेशान रहता था। किसी को भी खुश देखकर उसे दुख होता था। इसलिए घर के बाहर हंसते खेलते बच्चे की उसने जान ले ली थी। जेल में भी उसकी कई माह तक दवा चली थी।

📡 स्रोत: NewsData.io

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