गोरखपुर सपा जिलाध्यक्ष बोले- डक्कू साहब हमारे बड़े भाई हैं:लेकिन पार्टी आरोप लगाने वाली मुस्लिम महिला का भी सम्मान करती है
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →'जफर अमीन डक्कू साहब हमारे बड़े भाई हैं, हमारे और उनके बीच कोई तनातनी नहीं है। अगर वो चाहते हैं की हम उनसे मिलने ना जाए तो उनके आदेश का पालन मैं करूंगा....डक्कू साहब जहां एक तरफ पार्टी के वरीष्ठ नेता हैं, वहीं उन पर आरोप लगाने वाली मुस्लिम समाज की उस महिला का भी सम्मान हम करते हैं।
मैंने दोनों लोग को ध्यान में रखकर ही अधिकारी से मिलने गया था।' यह कहना है गोरखपूर समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष ब्रजेश कुमार गौतम का। कुछ दिन पहले सपा नेता जाफ़र अमीन डक्कू की जेल से लिखी एक कथाकथित चिट्ठी सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद जिलाध्यक्ष ने अपना पक्ष रखा। उस दौरान उन्होंने तभी से फरार चल रहे महानगर अध्यक्ष शब्बीर कुरैशी को लकेर कहा की इस बारे में अभी कोई बात नहीं हुई है।
मामले से शुरुआती दिन में 1-2 दिन बात हुई थी। एक तरफ नेता, दूसरी तरफ मुस्लिम वोट की चिंता जिलाध्यक्ष ने जहां एक तरफ डक्कू को वरिष्ट नेता बताया वहीं डक्कू के खिलाफ शिकायत करने वाली महिला मुस्लिम सामुदाय की होने के नाते उन्हें और उनकी पार्टी को मुस्लिम वोट की भी चिंता साता रही है। दैनिक भास्कर से बात करते हुए जिलाध्यक्ष ने कहा कि डक्कू साहब ने जो चिट्ठी लिखी है वह मुझे न लिख करके अगर भारतीय जनता पार्टी के ख़िलाफ़ लिखते तो ज्यादा बेहतर रहता है।
क्योंकि उनको जेल भेजने का काम भारतीय जनता पार्टी के ने किया है। अगर उनको जिलाध्यक्ष से नाराज़गी है तो वो हमें व्यक्तिगत अपनी बात रखते। उनको इस तरह से चिट्ठी को सार्वजनिक नहीं करना चाहिए था। पार्टी पर आरोप, बीजेपी को क्लीन चिट जिलाध्यक्ष का कहना है कि डक्कू साहब मेरे ऊपर आरोप लगा रहे हैं और भाजपा को क्लीन चिट दे रहे हैं।
ये बातें सबकी समझ से परे है। उन्होंने कहा कि डक्कू साहब को हमसे कोई शिकायत थी तो एक बार हमें बताते। यह एक निजी जमीनी मामला का घटना है। इस मामले में पार्टी दोनों पक्ष को ध्यान रख रही है। मुझे नहीं लगता वो बीजेपी में जाएंगे जफर अमीन डक्कू के बीजेपी में शामिल होने के कयास पर जिलाध्यक्ष बोले कि- मुझे नहीं लगता है कि वो ऐसा करेंगे।
वो पार्टी के एक बुनियादी नेता हैं। हमारी पार्टी कभी ऐसा सोच नहीं सकती है। राष्ट्रीय अध्यक्ष जी से उनके अच्छे संबंध है, मुझे नहीं लगता है कि वो ऐसा कदम उठाएंगे। राष्ट्रीय अध्यक्ष को इस मामले की पूरी जानकारी ब्रजेश कुमार गौतम ने ये भी बताया कि गोरखपुर का यह मामला राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के संज्ञान में है।
इस मामले की शुरुआत से ही वह बातचीत कर रहे। हाल ही में हुए चिट्ठी के वायरल होने की घटना से भी वो पूरी तरह से अवगत है। राष्ट्रीय अध्यक्ष ने हमसे इतना कहा था कि कुछ लोग हैं जो मंदिर से जाकर मिल रहे हैं हमें उनसे सतर्क रहने की जरूरत है। पहले जानिए किस मामले में जेल में बंद हैं डक्कू डक्कू एक जमीन कब्जा करने और विपक्षी को धमकाने के प्रयास में जेल में बंद हैं।
हालांकि उनका दावा है कि जिस जमीन को कब्जाने की बात कही जा रही है, वह उन्होंने बैनामा ली है और उसके दस्तावेज उनके पास हैं। जिस दिन घटना हुई और वीडियो वायरल हुआ, उस दिन भी रात 9:30 बजे तक वह निश्चिंत थे। पुलिस ने भी इस मामले में दोनों पक्षों को कागज के साथ बुलाया था। उस समय तक कार्रवाई की सुगबुगाहट नहीं थी।
फिर अचानक देर रात एफआईआर होती है और आधी रात में डक्कू घर से गिरफ्तार कर लिए जाते हैं। 10 दिन बीत गए, वह जेल में ही हैं। इसी मामले में उनके साथ सपा के महानगर अध्यक्ष शब्बीर कुरैशी भी गए थे। केस शब्बीर पर भी है लेकिन वह फरार चल रहे हैं। उनकी तलाश में दबिश जारी है। पहले दिन उनके घर के हर कोने में, यहां तक कि फ्रिज, कूलर, आलमारी में भी उन्हें ढूंढा गया था।
सपा मुखर क्यों नहीं हो पा रही?
इस मामले में फंसे दोनों नेता सपा के प्रमुख चेहरे हैं। डक्कू कद्दावर सपा नेता हैं तो शब्बीर वर्तमान महानगर अध्यक्ष। यह मामला सपा प्रमुख अखिलेश यादव के संज्ञान में है, पल-पल की जानकारी दी गई है। गुरुवार को जेल से आए डक्कू के पत्र की सूचना भी उनतक पहुंच गई है। सपा नेता को यह भी पता है कि कोई गोरखनाथ मंदिर में उनकी सिफारिश लेकर गया था।
सपा नेता लखनऊ में सपा प्रमुख से मिलकर आए हैं लेकिन उनकी ओर से कोई निर्देश नहीं दिया गया। निर्देश होता तो धरातल पर नजर आता। सपा के एक वरिष्ठ नेता ने इसका कारण बताया। उन्होंने कहा कि पार्टी इसे डक्कू का निजी मामला मान रही है। दूसरा, प्रभावशाली रहते हुए अधिकर नेताओं से उनके संपर्क तल्ख रहे।
बेबाक छवि के कारण कई नेताओं से उनके अच्छे संबंध नहीं रह गए। सबसे प्रमुख कारण यह है कि जिस परिवार से विवाद है, वह भी मुस्लिम हैं। PDA पर पूरी राजनीति कर रहे अखिलेश यादव इसी कारण इस विषय से दूर हैं। उनकी ओर से अपने महानगर अध्यक्ष को लेकर भी कोई बयान नहीं आया है। सपा नेता कहते हैं कि संगठन को इस बात का डर है कि इस मामले को कहीं अधिक उछाला गया तो भाजपा को मौका मिल जाएगा।
मुस्लिम की जमीन कब्जा जैसे आरोपों का जवाब दे पाना पार्टी के लिए आसान नहीं होगा। इसलिए पार्टी ने फिलहाल चुप्पी साध रखी है। दो बार चुनाव लड़ चुके हैं डक्कू डक्कू एक कद्दावर नेता हैं। 1991 में वह जनता दल के टिकट पर गोरखपुर शहर से विधानसभा का चुनाव लड़ चुके हैं। इस चुनाव में उन्हें 20.10 प्रतिशत वोट मिले थे।
राम मंदिर लहर में हुए इस चुनाव में शिव प्रताप शुक्ला 55 प्रतिशत से अधिक वोट पाकर विधायक बने थे। डक्कू 2012 में नवगठित गोरखपुर ग्रामीण विधानसभा सीट से चुनाव लड़े। इस बार 22.27 प्रतिशत वोट मिले। इस चुनाव में भाजपा के विजय बहादुर यादव विजयी बने थे। डक्कू 2012 से 2017 की सपा सरकार में वह काफी प्रभावशाली रहे।
आजम खान नगर विकास मंत्री थे और गोरखपुर की नगर निगम व नगर पंचायतों में डक्कू की तूती बोलती थी।
📡 स्रोत: NewsData.io