गोरखपुर में विरासत गलियारा के अधूरे कार्यों पर मंडलायुक्त सख्त, जल्द पूरा कराने के निर्देश जारी

गोरखपुर शहर के पुराने और ऐतिहासिक क्षेत्र को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ने के लिए विकसित किए जा रहे महत्वाकांक्षी विरासत गलियारा का गुरुवार को मंडलायुक्त इन्द्र विक्रम सिंह ने स्थलीय निरीक्षण किया।
उन्होंने धर्मशाला बाजार से अलीनगर, घंटाघर होते हुए पांडेहाता तक विकसित किए जा रहे गलियारे में निर्माण कार्यों की प्रगति, सड़क, नाला, भवनों की स्थिति और सौंदर्यीकरण के कार्यों का जायजा लिया।
इस दौरान कई स्थानों पर कार्य अधूरे मिलने और निर्माण के बाद भी अंतिम रूप नहीं दिए जाने पर मंडलायुक्त ने संबंधित कार्यदायी संस्था के अधिकारियों और ठेकेदार को फटकार लगाई।
उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया कि शेष सभी कार्यों को जल्द से जल्द गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरा कराया जाए, जिससे परियोजना का लोकार्पण कराया जा सके।धर्मशाला बाजार से पांडेहाता तक बनने वाले इस विरासत गलियारे की कुल लंबाई करीब 3.50 किलोमीटर है और परियोजना की अनुमानित कुल लागत 555.56 करोड़ रुपये है।
इसका मार्ग धर्मशाला बाजार से अलीनगर और घंटाघर होते हुए पांडेहाता तक निर्धारित किया गया है। संशोधित डिजाइन के बाद सड़क की चौड़ाई को स्थानीय जरूरतों और सुगम आवागमन को ध्यान में रखते हुए उपयोगी एवं व्यवस्थित बनाया गया है।
परियोजना का उद्देश्य पुराने शहर को उसकी ऐतिहासिक पहचान के साथ आधुनिक सुविधाओं से जोड़ना है।निरीक्षण के दौरान मंडलायुक्त ने नाले के बाहर जगह-जगह पड़े फाइबर के तारों को देखकर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि इस तरह तारों का बिखरा रहना क्षेत्र की सुंदरता को प्रभावित करने के साथ ही लोगों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है।
उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी फाइबर तारों को तत्काल व्यवस्थित कराया जाए।
जहां जरूरत हो, वहां उन्हें सुरक्षित तरीके से शिफ्ट कराया जाए, ताकि गलियारे का स्वरूप खराब न हो और आम लोगों को भी किसी प्रकार की दिक्कत न हो।मंडलायुक्त ने उन स्थानों का भी निरीक्षण किया, जहां परियोजना के तहत पुराने मकानों और दुकानों को तोड़ा गया है। कई स्थानों पर तोड़े गए मकानों को अभी अंतिम रूप नहीं दिया गया था।
इस पर उन्होंने संबंधित अधिकारियों और कार्यदायी संस्था को निर्देश दिया कि ऐसे सभी स्थानों को जल्द दुरुस्त कराया जाए।
उन्होंने कहा कि परियोजना के तहत जिन भवनों और दुकानों को नया स्वरूप दिया जा रहा है, उनमें एकरूपता दिखाई देनी चाहिए।मंडलायुक्त इन्द्र विक्रम सिंह ने कहा कि उन्हें दी गई जानकारी के अनुसार पहले यह सड़क काफी सकरी थी।
आवागमन को सुचारू बनाने के लिए सड़क के दोनों तरफ के मकानों और दुकानों को समान अनुपात में हटाकर सड़क एवं नाला विकसित किया गया है। इसका उद्देश्य लोगों को बेहतर आवागमन की सुविधा देना और क्षेत्र को व्यवस्थित स्वरूप प्रदान करना है।उन्होंने कहा कि गोरखपुर पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण शहर है।
ऐसे में पुराने इलाके को केवल चौड़ी सड़क के रूप में विकसित करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसकी ऐतिहासिक पहचान, स्वरूप और उपयोगिता को ध्यान में रखते हुए विकास किया जाना चाहिए। विरासत गलियारा इसी सोच के साथ तैयार किया जा रहा है।
पुराने शहर को आज की जरूरतों के अनुरूप विकसित करते हुए यहां के मकानों और दुकानों में एकरूपता लाने का प्रयास किया जा रहा है।उन्होंने कहा कि नगर निगम और जीडीए की ओर से परियोजना के विभिन्न कार्य कराए जा रहे हैं। अधिकांश प्रमुख कार्य पूरे हो चुके हैं, जबकि कुछ कार्य अभी बाकी हैं।
मंडलायुक्त ने निर्देश दिया कि बचे हुए कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराया जाए।
विशेष रूप से कलर स्कीम और स्क्रीनिंग से जुड़े कार्यों को जल्द पूरा कराने के निर्देश दिए गए, ताकि पूरे क्षेत्र को एक समान और आकर्षक स्वरूप दिया जा सके।मंडलायुक्त ने कार्यदायी संस्था के ठेकेदार को निर्देशित करते हुए कहा कि निर्माण कार्यों में किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
जहां निर्माण कार्य पूरा हो चुका है, वहां फिनिशिंग, सफाई और अंतिम रूप देने का कार्य भी तत्काल पूरा कराया जाए। सड़क और सार्वजनिक स्थानों पर निर्माण सामग्री, मलबा अथवा तार बिखरे नहीं रहने चाहिए।
उन्होंने कहा कि परियोजना के अंतिम चरण में छोटी-छोटी कमियों को भी दूर कराया जाए, क्योंकि यही कमियां पूरी परियोजना की सुंदरता को प्रभावित करती हैं।उन्होंने अधिकारियों से कहा कि विरासत गलियारा का विकास केवल सड़क और नाला निर्माण तक सीमित नहीं रहना चाहिए।
क्षेत्र में आने वाले लोगों को बेहतर और सुरक्षित आवागमन के साथ साफ-सुथरा एवं आकर्षक वातावरण मिले, इस पर भी विशेष ध्यान दिया जाए।
परियोजना पूरी होने के बाद यहां आने वाले स्थानीय लोगों और पर्यटकों को पुराने गोरखपुर की विरासत और आधुनिक सुविधाओं का बेहतर समन्वय देखने को मिलेगा।मंडलायुक्त ने कहा कि यह परियोजना पुराने शहर को नई पहचान देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
गलियारे के निर्माण से क्षेत्र में आवागमन सुगम होने के साथ ही पर्यटन गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है। ऐतिहासिक और व्यापारिक क्षेत्र को व्यवस्थित स्वरूप मिलने से स्थानीय कारोबार को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।उन्होंने संबंधित विभागों को आपसी समन्वय से काम करने के निर्देश दिए।
कहा कि जो भी कार्य लंबित हैं, उनकी सूची बनाकर समयबद्ध तरीके से पूरा कराया जाए। कार्यदायी संस्था मौके पर मौजूद रहकर निर्माण की गुणवत्ता और फिनिशिंग सुनिश्चित करे।
उन्होंने स्पष्ट किया कि परियोजना का लोकार्पण तभी कराया जाएगा जब सभी आवश्यक कार्य पूरे हो जाएं और पूरा गलियारा अंतिम रूप में तैयार हो।मंडलायुक्त ने अधिकारियों से कहा कि विरासत गलियारे को गोरखपुर की पहचान से जोड़ते हुए विकसित किया जाए।
पुराने इलाके के स्वरूप को आधुनिक जरूरतों के अनुरूप तैयार करने के साथ उसकी ऐतिहासिक महत्ता भी बनी रहनी चाहिए।
उन्होंने निरीक्षण के दौरान मिली कमियों को तत्काल दूर कराने और कार्य की प्रगति की नियमित निगरानी करने के निर्देश दिए।निरीक्षण के दौरान नगर आयुक्त अजय जैन, जीडीए उपाध्यक्ष अभिनव गोपाल, एसडीएम सदर ज्ञान प्रताप सिंह सहित नगर निगम और जीडीए के संबंधित अधिकारी तथा कार्यदायी संस्था के ठेकेदार मौजूद रहे।
मंडलायुक्त के निर्देश के बाद संबंधित विभागों ने विरासत गलियारा के शेष कार्यों को जल्द पूरा कराने की प्रक्रिया तेज कर दी है, ताकि परियोजना को अंतिम रूप देकर लोकार्पण की दिशा में आगे बढ़ाया जा सके।