ग्रामीणों ने रतलाम कलेक्ट्रेट में दिया मौन धरना:कलेक्टर बोल- 5 लोग चैंबर में आकर मिलें; प्रदर्शनकारी बोले- जो बात करना है यहीं करो
रतलाम जिले के पिपलौदा तहसील के 4 से 5 गांवों के ग्रामीण मूलभूत समस्याओं के निराकरण की मांग को लेकर कलेक्ट्रेट में गुरुवार दोपहर मौन धरना दिया। अपर कलेक्टर समेत अन्य अधिकारी समस्या सुनने आए। लेकिन सभी का कहना था कि हमें कलेक्टर से मिलना है। कुछ देर में कलेक्टर अजय कटेसरिया आए। उन्होंने समस्या सुनी।
ज्ञापन लेकर कहा कि 5 लोग चैंबर में आए जाएं। तभी भीड़ में एक व्यक्ति ने बोल दिया कि अंदर क्या बात करना है जो करना है यहीं सभी के सामने करो। इससे कलेक्टर नाराज हो गए। कहते हुए चले गए कि यह कोई तरीका होता है। इसके बाद 5 से 6 लोग कलेक्टर से चैंबर में जाकर मिले। देखें तस्वीरें...
8 दिन में समाधान का आश्वासन दिया जिला पंचायत सदस्य डीपी धाकड़ समेत 5 से 6 ग्रामीण कलेक्टर से उनके चैंबर में मिले। कलेक्टर ने समस्याओं के समाधान के लिए जिला पंचायत सीईओ को नोडल अधिकारी बनाने की बात कही। उन्होंने 8 दिन में ग्रामीणों की समस्याओं को ध्यान में रखकर समाधान का आश्वासन दिया।
इसके बाद ग्रामीण वहां से रवाना हो गए। बिजली, सड़क और पानी की समस्याएं बताईं ग्रामीणों ने बताया कि आंबा, उमेदपुरा, गुडरखेड़ा, नान्दलेटा और आसपास के पंचायत क्षेत्रों में बड़ी संख्या में आदिवासी परिवार रहते हैं।
इन क्षेत्रों में 24 घंटे बिजली, हर घर नल-जल योजना, बेहतर सड़क और पुराने रास्तों पर मुर्रम डालने जैसी मांगें हैं। ग्रामीणों के अनुसार, बारिश में सड़कों पर कीचड़ हो जाता है। इससे आवागमन प्रभावित होता है और स्कूली बच्चों को सबसे ज्यादा परेशानी होती है।
सबलगढ़, कोटड़ा, गुडरखेड़ा, नवाबगंज, लालपुरा, खेड़ावदा, भैसाडाबर से नांदलेटा नई आबादी, चांचरी से आंबा, भूरीघाटी, कुण्डला, बखतपुरा माताजी, गढ़ीनाल, देवगढ़ से उंचाहेड़ा समेत कई गांवों के रास्तों की स्थिति खराब होने की बात ग्रामीणों ने कही।
ग्रामीणों ने कोटड़ा के पास देवझर धार्मिक स्थल तक जाने वाली सड़क की खराब स्थिति का भी मुद्दा उठाया। इसके अलावा स्कूलों की खराब हालत और शिक्षकों की कमी की समस्या बताई। लालपुरा में बच्चों के बैठने की व्यवस्था नहीं होने की बात भी कही गई।
स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी का भी मुद्दा ग्रामीणों ने बताया कि क्षेत्र के स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टर और जरूरी सुविधाओं की कमी है। कई गांवों में स्कूल भवन नहीं हैं और जहां भवन हैं, वहां पर्याप्त शिक्षक नहीं हैं। ग्रामीणों ने इन समस्याओं के जल्द समाधान की मांग की है।
📡 स्रोत: NewsData.io