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ग्रीन हिमाचल की नई पहचान बनती जा रही इलेक्ट्रिक बसें

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 3 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति

अगस्त 03, कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश): जिला कांगड़ा में अब सफर का अंदाज बदल रहा है। पर्यावरण संरक्षण के साथ यात्रियों को आरामदायक और सुरक्षित परिवहन देने की दिशा में इलेक्ट्रिक बसें अहम भूमिका निभा रही हैं। जिले के अलग-अलग रूटों पर दौड़ रही 45 इलेक्ट्रिक बसें ग्रीन ट्रांसपोर्ट की नई तस्वीर पेश कर रही हैं।

कांगड़ा की सड़कों पर दौड़ती ये इलेक्ट्रिक बसें अब महज सार्वजनिक परिवहन का साधन नहीं, बल्कि ग्रीन हिमाचल की नई पहचान बनती जा रही हैं। जिले में वर्तमान में 45 इलेक्ट्रिक बसें अलग-अलग रूटों पर यात्रियों को सेवाएं दे रही हैं। सीसीटीवी से लैस इन बसों में सुरक्षा के साथ-साथ आरामदायक और शांत सफर की सुविधा मिल रही है।

खास बात यह है कि बस के दोनों दरवाजे पूरी तरह बंद होने के बाद ही इसका संचालन शुरू होता है। बसों का एक बड़ा फायदा इनके कम परिचालन खर्च में भी देखने को मिल रहा है। जहां डीजल बस के संचालन पर करीब 25 से 26 रुपये प्रति किलोमीटर खर्च आता है, वहीं इलेक्ट्रिक बस का खर्च लगभग 11 से 12 रुपये प्रति किलोमीटर है।

कांगड़ा, धर्मशाला, नगरोटा बगवां, देहरा, पालमपुर, पठानकोट, बैजनाथ और जसूर सहित कई स्थानों पर करीब 6.35 करोड़ रुपये की लागत से ई-चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए गए हैं। वहीं जयसिंहपुर और शाहपुर में भी करीब 1.26 करोड़ रुपये की लागत से नए चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जाएंगे।

फास्ट चार्जिंग, विशेष रूप से प्रशिक्षित चालक और बेहतर रूट प्लानिंग के चलते एक बस को करीब 170 से 250 किलोमीटर तक प्रभावी ढंग से संचालित किया जा रहा है। कम शोर, कम प्रदूषण और आरामदायक सफर के चलते यात्रियों में भी इलेक्ट्रिक बसों को लेकर उत्साह बढ़ रहा है।

यही वजह है कि जिन रूटों पर इलेक्ट्रिक बसें चल रही हैं, वहां यात्रियों की संख्या में भी बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। कांगड़ा की सड़कों पर दौड़ती ये इलेक्ट्रिक बसें बता रही हैं कि भविष्य का सफर सिर्फ आसान और किफायती ही नहीं, बल्कि पर्यावरण के लिए भी बेहतर हो सकता है।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।