Ground Report: नेपाल जल-प्रलय: 2013 के केदारनाथ और 2021 के चमोली हादसे से क्या है नेपाल त्रासदी का कनेक्शन?

Nepal Flood: नेपाल में 26 अगस्त को आई भीषण आपदा ने एक बार फिर हिमालयी क्षेत्रों में कुदरत के रौद्र रूप की खौफनाक यादें ताजा कर दी हैं. तिब्बत क्षेत्र में ग्लेशियर झील फटने के बाद भड़की भयंकर बाढ़ ने नेपाल की भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों में भयानक तबाही मचा दी.
अचानक आए इस सैलाब ने रिहाइशी बस्तियों, पुलों और बहुमंजिला इमारतों को पलक झपकते ही मलबे के ढेर में बदल दिया. यह त्रासदी सीधे तौर पर साल 2013 की केदारनाथ तबाही और 2021 के चमोली हादसे की याद दिलाती है, जहां ग्लेशियर झील फटने और एवलांच के बाद अचानक आई बाढ़ ने भारी विनाश फैलाया था.
नेपाल में आई जल-प्रलय और उत्तराखंड की ऐतिहासिक आपदाओं में कई समानताएं देखने को मिल रही हैं: 2013 में केदारनाथ (चौराबाड़ी झील) और 2021 में चमोली में आई तबाही का मुख्य कारण ग्लेशियर झील का फटना ही था. नेपाल में आई इस आपदा का स्रोत भी तिब्बत में फटी ग्लेशियर झील ही है.
पर्यावरण विशेषज्ञों और ग्राउंड रिपोर्ट्स के अनुसार, नेपाल में आए मलबे और पानी के बहाव का दायरा केदारनाथ त्रासदी से 2 से 3 गुना ज्यादा बड़ा था, जिस वजह से तबाही का स्तर कहीं अधिक विकराल रहा. लगातार बढ़ रहे तापमान, अनियमित वर्षा और अनियोजित मानवीय विकास को इस तरह के पहाड़ी हादसों का मुख्य कारक माना जा रहा है.
📡 स्रोत: NewsData.io