GSTN में बड़ा बदलाव, रिवर्स चार्ज खरीद के लिए जोड़े गए दो नए ई-इनवॉइस विकल्प
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सरकार ने GST के नियमों में बड़ा बदलाव किया है. जिसके बाद कारोबारियों का इससे काफी मुनफा होगा.
दरअसल हाल ही में GST नेटवर्क (GSTN) ने ई-इनवॉइस सिस्टम में दो नई कैटेगिरीज जोड़ने की तैयारी की है.
इसके तहत कुछ खास तरह की खरीदारी और विदेश से ली जाने वाली सेवाओं के लिए भी कंपनियों को खुद ई-इनवॉइस बनाना होगा.
ये नियम रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म (RCM) के तहत आने वाले चुनिंदा लेनदेन पर लागू होगा.
इस बदलाव का मकसद GST के दायरे में आने वाले लेनदेन की सही जानकारी जुटाना और टैक्स चोरी की संभावना को कम करना है. GST काउंसिल की 57वीं बैठक में इस व्यवस्था की सिफारिश की गई थी.
क्या हैं ई-इनवॉइस की दो नई कैटेगिरीज?
GSTN की 16 अक्टूबर की एडवाइजरी के मुताबिक, ई-इनवॉइस सिस्टम में दो नई कैटेगिरीज जोड़ी जाएंगी.
पहली कैटेगिरी होगी RCM-DOM यानी देश में ऐसे अपंजीकृत सप्लायर से की गई तय खरीदारी, जिन पर रिवर्स चार्ज के तहत GST लागू होता है.
तो वहीं दूसरी कैटेगिरी होगी RCM-IMP यानी विदेश से ली जाने वाली सेवाएं, जिन पर रिवर्स चार्ज के तहत GST देना होता है.
इन कैटेगिरीज के जरिए पात्र कारोबारी अधिकृत इनवॉइस रजिस्ट्रेशन पोर्टल (IRP) पर अपनी सेल्फ-इनवॉइस जमा कर सकेंगे और इनवॉइस रेफरेंस नंबर (IRN) हासिल कर पाएंगे.
क्या होता है RCM? किसी सामान या सुविधा को बेचने वाला सप्लायर GST वसूलता है और सरकार को जमा करता है.
लेकिन कुछ खास लेनदेन में ये जिम्मेदारी खरीदार या सुविधा लेने वाले की होती है. इसी व्यवस्था को रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म यानी RCM कहा जाता है.
उदाहरण के लिए, अगर कोई कंपनी विदेश से ऐसी सेवा लेती है जिस पर RCM लागू होता है, तो उस सेवा पर GST चुकाने की जिम्मेदारी कंपनी की हो सकती है.
ऐसे मामलों में नियमों के अनुसार, कारोबारी को सेल्फ-इनवॉइस भी जारी करना पड़ सकता है.
किस पर पड़ेगा असर? ये सुविधा उन पंजीकृत कारोबारियों के लिए है, जिनका कुल सालाना टर्नओवर 5 करोड़ रुपये या उससे ज्यादा है
📡 स्रोत: ABP Live Vyapar