गुजरात के बनासकांठा के वाडिया गांव में बदलाव:बेटियों को देह व्यापार से बचाने के लिए 7 साल की उम्र में सगाई, 18 में शादी
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पहले एक किस्सा पढ़ें… वाडिया गांव की 19 साल की एक लड़की की मां और दादी दोनों देह व्यापार में थीं। वह दूर के कॉलेज में नर्स बनने की पढ़ाई कर रही है। उसकी शादी हो चुकी है, लेकिन उसके लिए दूल्हा 11 साल की उम्र में चुन लिया गया था। पहचान जाहिर न करने की शर्त पर उसने बताया, “मैंने देखा कि मेरे पिता और चाचा मेरी मां और दादी के लिए ग्राहक लाते थे।
जब वे ऐसा करने की स्थिति में नहीं रहीं, तब यह सिलसिला बंद हुआ। मेरी मां ने बताया कि उन्हें जबरन इसमें नहीं धकेला गया था।” लड़की ने बताया- गरीबी के कारण गांव में सब इसे सामान्य मानते थे। उसकी मां को यह भी पक्का पता नहीं था कि उसके जैविक पिता कौन हैं। मेरी मां ने तय किया कि वह मुझे इस धंधे में नहीं जाने देंगी।
11 साल की उम्र में सामूहिक समारोह में मेरी सगाई हुई और 18 साल में शादी। यह कहानी सिर्फ एक लड़की की नहीं है, गुजरात के बनासकांठा जिले के वाडिया गांव में बदलाव होने लगा है। यहां बेटियों को देह व्यापार से बचाने के लिए उनकी कम उम्र (7 से 12 साल) में ही सगाई कराई जा रही है। अहमदाबाद से करीब 200 किलोमीटर दूर बसे वाडिया को ‘देह व्यापार वाला गांव’ कहा जाता है।
यहां पीढ़ियों से महिलाएं देह व्यापार में हैं और पुरुष उनके लिए ग्राहक लाते हैं। बाल विवाह बैन, लेकिन यही बचने का रास्ता न्यूज एजेंसी PTI की रिपोर्ट के मुताबिक गांव की आबादी करीब 750 है। यहां पारंपरिक घुमंतू समुदाय की महिलाओं को देह व्यापार में धकेला जाता रहा है। गांव के पुरुष दलालों की तरह हर सुबह पालनपुर-थराद हाईवे पर जाकर ट्रक ड्राइवरों, राहगीरों और आसपास के गांवों-शहरों के पुरुषों से संपर्क करते हैं।
गांव वालों का कहना है कि सगाई या शादी हो जाने के बाद लड़कियों को देह व्यापार में नहीं धकेला जाता। इसलिए बेटियों को बचाने यह कदम उठाया जा रहा है। भारत में बाल विवाह पर रोक है। इसके बावजूद वाडिया में कम उम्र की सगाई को गांव वाले बेटियों को गांव से बाहर सम्मानजनक जिंदगी देने का रास्ता मानते हैं।
वाडिया में बदलाव की कोशिश पितृसत्तात्मक व्यवस्था के बीच हो रही है। गांव में निगरानी और नियम समाजसेवियों और कुछ परिवारों की मदद से आसपास के गांवों या रिश्तेदारों के परिवारों में लड़कियों की औपचारिक सगाई कराई जाती है। गांव वालों ने आपसी सहमति से एक अनलिखा नियम बनाया है। गांव में आने वाले लोगों प
📡 स्रोत: Dainik Bhaskar