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Gujarat Crime : गाय को पहले मारा फिर किया घिनौना काम, कोर्ट ने सुनाई उम्रकैद की सजा; दिया मनु स्मृति का हवाला

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 30 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
Gujarat Crime : गाय को पहले मारा फिर किया घिनौना काम, कोर्ट ने सुनाई उम्रकैद की सजा; दिया मनु स्मृति का हवाला

Gujarat Crime : गुजरात के गांधीनगर जिले की कलोल कोर्ट ने गोहत्या के मामले में 3 लोगों को कठोर आजीवन कारावास की सजा सुनाई है.

कोर्ट ने मनुस्मृति और अन्य ग्रंथों का हवाला देते हुए कहा कि अगर दोषियों को कानून के अनुसार सजा नहीं दी गई, तो गायों का अस्तित्व ही खत्म हो सकता है.

कोर्ट ने गुजरात पशु संरक्षण अधिनियम की धारा 8(2) के तहत प्रत्येक दोषी को आजीवन कारावास और 2 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई.

आदेश में गाय के महत्व को समझाने के लिए मनुस्मृति और अन्य धार्मिक ग्रंथों का भी उल्लेख किया गया.

इसमें कहा गया है कि मनुस्मृति में गाय को केवल एक पशु नहीं, बल्कि धार्मिक कर्तव्य का एक आधार माना गया है.

साथ ही, ऋषि मनु ने पशुओं की रक्षा करने की मुख्य जिम्मेदारी वैश्य वर्ग को सौंपी थी.

कोर्ट ने 76 पन्नों के फैसले में धार्मिक ग्रंथों का हवाला दिया अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश बीआर राजपूत ने सोमवार (26 अक्टूबर,2026) को यह फैसला सुनाया. 76 पन्नों के इस फैसले में गाय के धार्मिक महत्व को समझाने के लिए मनुस्मृति, वेदों और अन्य हिंदू धर्मग्रंथों का जिक्र किया गया है.

यह फैसला गुरुवार को ऑनलाइन उपलब्ध हो गया.

न्यायाधीश ने अपने आदेश में कहा कि आरोपियों को अपने कृत्यों का पूरा ज्ञान था, फिर भी उन्होंने बेरहमी से गायों (जिन्हें माता माना जाता है) को काटा.

उन्होंने गायों के मुंह, पेट, पैर और खाल को अलग कर दिया और बेचने के लिए 277 किलोग्राम गोमांस निकाला.

यदि गायों के शरीर के अंगों को काटकर इतनी क्रूरता दिखाने वालों को कानून के अनुसार सजा नहीं दी गई, तो अंततः धरती से ‘गौ माता’ का अस्तित्व ही मिट जाएगा. ऐसे में कानून के अनुसार आरोपियों को सजा देना आवश्यक है.

कोर्ट ने वैदिक विवाह के एक पारंपरिक रूप, ‘आर्ष विवाह’ में गाय और बैल के महत्व का भी जिक्र किया.

सिर्फ जानवर नहीं गाय कोर्ट ने माना कि हिंदू धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, मनुस्मृति में गाय और अन्य पशुओं को केवल जानवर नहीं, बल्कि धर्म का एक आधार माना गया है.

ऋषि मनु ने पशुओं की रक्षा करने और उनकी देखभाल करने की मुख्य जिम्मेदारी वैश्य वर्ग को दी थी.

इसी तरह वैदिक विवाह के पारंपरिक रूप ‘आर्ष विवाह’ में भी गाय और बैल का विशेष महत्व है. फैसले में हिंदू परंपराओं में गाय के महत्व का उल्लेख किया गया है.

कोर्ट ने वेदों और हिंदू ग्रंथों का हवाला देते हुए फैसले में कहा गया है कि ‘सुरभि’ (जिसे कामधेनु भी कहा जाता है) भगवान ब्रह्मा की तपस्या के दौरान धरती पर गिरे दिव्य अमृत की बूंदों से प्रकट हुई थीं, और उन्हें सभी पशुओं की माता माना जाता है.

कोर्ट ने ऋग्वेद का भी उल्लेख किया, जिसमें गाय को ‘अधन्या’ कहा गया है, जिसका अर्थ है वह प्राणी जिसे मारा नहीं जाना चाहिए.

वेदों और हिंदू धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, दिव्य गाय सुरभि (जिसे कामधेनु भी कहा जाता है) ब्रह्मा की तपस्या के फलस्वरूप पृथ्वी पर गिरे अमृत की बूंदों से प्रकट हुई थी. उसे पृथ्वी पर सभी पशुओं की माता माना जाता है.

इसी तरह, ऋग्वेद में गाय को ‘अधन्या’ कहा गया है, जिसका अर्थ है कि उसका कभी भी वध या हत्या नहीं की जानी चाहिए.

गाय में 33 करोड़ देवी-देवताओं का निवास कोर्ट ने आगे कहा कि गाय को जगत की माता और 33 करोड़ देवी-देवताओं का निवास स्थान माना जाता है, और इसके चार पैर चार वेदों के प्रतीक हैं.

अदालत ने हरिवंश पुराण और अन्य धार्मिक परंपराओं का भी हवाला दिया, जिनमें गाय को पवित्र बताया गया है.

फैसले में एक संस्कृत श्लोक का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें गाय को सभी देवी-देवताओं की माता तथा पवित्र अनुष्ठानों और तीर्थस्थलों का स्रोत बताया गया है.

गाय पूरे ब्रह्मांड की माता है, जिसमें 33 करोड़ देवी-देवता निवास करते हैं. उसके चार पैर चार वेदों के प्रतीक हैं.

मनुस्मृति और हरिवंश पुराण के अनुसार, गाय को दक्ष प्रजापति की पुत्री भी माना जाता है.

उसके सींगों में ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास है, और उसकी आंखों में सूर्य और चंद्रमा स्थित हैं; इसीलिए उसे ‘गौ माता’ कहा जाता है. गुजरात में क्या है कानून?

गुजरात ने 2011 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी के कार्यकाल के दौरान ‘गुजरात पशु संरक्षण अधिनियम, 1954’ में संशोधन किया था.

इसके तहत गोहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया और गोमांस (बीफ) की खरीद-बिक्री और परिवहन पर रोक लगा दी गई.

इसके बाद 2017 में इस कानून को और सख्त कर दिया गया, जिसके बाद गुजरात भारत का पहला ऐसा राज्य बन गया जहां गोहत्या के लिए आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान है.

संशोधित कानून के अनुसार, गोमांस रखने, बेचने, जमा करने या परिवहन करने जैसे अपराधों के लिए 7 से 10 साल की जेल और 1 लाख से 5 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है. ये अपराध गैर-जमानती हैं.

📡 स्रोत: NewsData.io

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