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गुमला के मांदर को जीआई टैग मिलने से बढ़ी मांग, पारंपरिक कारीगरों में उत्साह

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 29 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
गुमला के मांदर को जीआई टैग मिलने से बढ़ी मांग, पारंपरिक कारीगरों में उत्साह

गुमला के मांदर को मिला जीआई टैग, पांच साल के प्रयास के बाद बड़ी उपलब्धि, जीआई टैग से कारीगरों को नए बाजार की उम्मीद, गुमला के मांदर को मिलेगी वैश्विक पहचान।

Short Headline: गुमला के मांदर को जीआई टैग मिलने से बढ़ी मांग, पारंपरिक कारीगरों में उत्साह

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गुमला के मांदर को मिला जीआई टैग पांच साल के प्रयास के बाद बड़ी उपलब्धि

जीआई टैग से कारीगरों को नए बाजार की उम्मीद

गुमला के मांदर को मिलेगी वैश्विक पहचान

एंकर गुमला में तैयार होने वाले पारंपरिक वाद्य यंत्र मांदर को जीआई टैग मिल गया है। इससे मांदर के निर्माताओं और स्थानीय लोगों में खुशी है। जिला प्रशासन के लगातार प्रयासों के बाद मिली इस उपलब्धि से गुमला के मांदर को अब देश-दुनिया में नई पहचान मिलने की उम्मीद है।

होल्ड अप साउंड रिपोर्ट

वीओ 01. गुमला में तैयार होने वाले पारंपरिक वाद्य यंत्र मांदर को जीआई टैग मिल गया है। साप्ताहिक बाजार में मांदर बेचने पहुंचे कारीगरों के लिए जीआई टैग मिलना किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं है। कारीगर बताते हैं कि पीढ़ियों से उनके परिवार मांदर बनाने और बेचने का काम करते आ रहे हैं।

बाइट- घनश्याम राम, मांदर निर्माता बाइट- प्रदीप राम, मांदर निर्माता

वीओ 02. पारंपरिक त्योहारों के साथ शादी-विवाह, उत्सवों और महोत्सवों में मांदर की थाप पर पारंपरिक वस्त्र में नृत्य की प्रस्तुतियां लोगों का मन मोह लेती हैं। मांदर को जीआई टैग दिलाने में जिला प्रशासन ने भी कारीगरों का सहयोग किया। उपायुक्त दिलेश्वर महतो ने बताया कि पांच वर्षों के प्रयास के बाद मांदर को जीआई टैग मिला है।

बाइट- दिलेश्वर महतो, उपायुक्त, गुमला

वीओ 03. गुमला में निर्मित मांदर की मांग अब झारखंड के बाहर भी हो रही है। छत्तीसगढ़ के कोरबा के लोग खास तौर पर मांदर खरीदने गुमला पहुंचते हैं। खरीदारों के मुताबिक यहां तैयार मांदर की गुणवत्ता और पारंपरिक निर्माण शैली उन्हें आकर्षित करती है।

बाइट- समर्पण टोप्पो, मांदर खरीददार, कोरबा, छत्तीसगढ़

अंतिम वीओ मांदर सिर्फ एक वाद्य यंत्र नहीं, बल्कि झारखंड की लोक संस्कृति और परंपरा की पहचान है। जीआई टैग मिलने से इसके पारंपरिक स्वरूप और स्थानीय पहचान को नई मान्यता मिली है। साथ ही मांदर बनाने वाले कारीगरों के लिए बाजार और रोजगार के नए अवसर खुले हैं।

गुमला से नरेश की रिपोर्ट।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।