गुयाना से भारत के लिए खुशखबरी! 20% कच्चे तेल की जरूरत पूरी करने को हुआ तैयार
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India Crude Oil Requirements: भारत के लिए ऊर्जा के मोर्चे पर एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है.
पश्चिम एशिया में जारी तनाव और कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच दक्षिण अमेरिकी देश गुयाना ने भारत की मदद के लिए हाथ बढ़ाया है.
गुयाना ने भरोसा दिया है कि वह भविष्य में भारत की रोजाना कच्चे तेल की जरूरत का 20 फीसदी तक हिस्सा सप्लाई कर सकता है.
पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता के बीच गुयाना ने भारत को कच्चे तेल की आपूर्ति बढ़ाने की पेशकश की है.
गुयाना के हाई कमिश्नर धर्मकुमार सीराज ने कहा है कि उनका देश भारत की रोजाना कच्चे तेल की जरूरत का करीब 20 फीसदी हिस्सा पूरा कर सकता है.
उन्होंने दोनों देशों के बीच लंबे समय तक चलने वाली ऊर्जा साझेदारी बनाने की इच्छा भी जताई.
इससे भारत को तेल के लिए दूसरे देशों पर निर्भरता कम करने और अपनी ऊर्जा जरूरतें पूरी करने में बड़ी मदद मिल सकती है.
गुयाना के पास 12 अरब बैरल का भंडार गुयाना के बड़े तेल भंडार और भारत की रिफाइनिंग क्षमता का जिक्र करते हुए सीराज ने कहा कि दोनों देश ऊर्जा क्षेत्र में एक-दूसरे के लिए फायदेमंद साबित हो सकते हैं.
उन्होंने बताया कि गुयाना के पास करीब 12 अरब बैरल तेल का प्रमाणित भंडार है. हाई कमिश्नर ने कहा कि हमारे पास दुनिया के सबसे अच्छे कच्चे तेल में से एक है. भारत के पास बड़ी रिफाइनरियां हैं और तेल की खपत भी काफी ज्यादा है.
भारत रोजाना करीब 50 लाख बैरल तेल की जरूरत पूरी करता है. भविष्य में हम इसकी लगभग 20 फीसदी जरूरत पूरी कर सकते हैं.
भारत में रिफाइनरी लगाने पर भी विचार सीराज ने बताया कि भारत और गुयाना के बीच तेल के कारोबार के साथ-साथ रिफाइनिंग और ईंधन भंडारण से जुड़ी सुविधाएं विकसित करने पर भी बातचीत हो रही है.
उन्होंने कहा कि गुयाना में भारत की मदद से रिफाइनरी स्थापित करने की संभावना तलाशी जा सकती है.
इससे वहां आने वाले कच्चे तेल को रिफाइन करके पेट्रोलियम उत्पाद तैयार किए जा सकेंगे और उन्हें दूसरे देशों में बेचा जा सकेगा.
उन्होंने गुयाना को समुद्री जहाजों और अन्य जरूरतों के लिए ईंधन उपलब्ध कराने वाला केंद्र बनाने की योजना का भी जिक्र किया.
इसके लिए अटलांटिक महासागर में गहरे पानी वाले क्षेत्र में रिफ्यूलिंग सुविधा विकसित की जा सकती है. सीराज के मुताबिक, भारत के पास इस तरह की परियोजनाओं का अनुभव और क्षमता है.
पीएम मोदी के दौरे से मजबूत हुए रिश्ते गुयाना के हाई कमिश्नर ने भारत के साथ बढ़ते संबंधों का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नवंबर 2024 के गुयाना दौरे को भी दिया.
उन्होंने कहा कि इस यात्रा से दोनों देशों के बीच सहयोग और निवेश को लेकर सकारात्मक संदेश गया.
सीराज ने कहा कि गुयाना तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और भारत के अनुभव, तकनीक और निवेश से उसे काफी फायदा मिल सकता है.
उन्होंने विदेश मंत्री एस जयशंकर और गुयाना के मंत्रियों के बीच हुई बातचीत को भी निवेश के लिहाज से अहम बताया.
कैरिबियन देशों के साथ सहयोग बढ़ा रहा भारत इस बीच, विदेश मंत्री एस जयशंकर ने गुरुवार को कॉमनवेल्थ हेड्स ऑफ गवर्नमेंट मीटिंग (CHOGM) 2026 के दौरान एंटीगुआ और बारबुडा के प्रधानमंत्री गैस्टन ब्राउन से मुलाकात की.
इस बैठक में दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, नवीकरणीय ऊर्जा और खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई.
जयशंकर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से ब्राउन को शुभकामनाएं दीं और CHOGM 2026 की सफल मेजबानी के लिए बधाई दी.
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मुलाकात की जानकारी साझा करते हुए कहा कि दोनों पक्षों ने आपसी सहयोग बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की.
जयशंकर की ये मुलाकातें ऐसे समय में हुई हैं, जब भारत कैरिबियन क्षेत्र के देशों के साथ आर्थिक और विकास संबंधी साझेदारी मजबूत करने की कोशिश कर रहा है.
उन्होंने कहा कि इन प्रयासों से नवंबर 2024 में प्रधानमंत्री मोदी के गुयाना दौरे के दौरान किए गए वादों को आगे बढ़ाने में मदद मिल रही है.
📡 स्रोत: NewsData.io