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ग्वालियर-चंबल संभाग के सरकारी अस्पताल में पहली बार किडनी ट्रांसप्लांट, आयुष्मान से मरीज को मिला मुफ्त इलाज

लेखक: Sanjida Khanam अंतिम अपडेट: 30 अगस्त 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
ग्वालियर-चंबल संभाग के सरकारी अस्पताल में पहली बार किडनी ट्रांसप्लांट, आयुष्मान से मरीज को मिला मुफ्त इलाज

ग्वालियर। गजराराजा चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में रविवार को ग्वालियर-चंबल संभाग के किसी शासकीय अस्पताल में पहली बार किडनी ट्रांसप्लांट किया गया। करीब साढ़े छह घंटे चली जटिल प्रक्रिया के बाद मरीज और उसकी पत्नी, जो किडनी डोनर हैं, दोनों की हालत स्थिर बताई गई है।

इस उपलब्धि के साथ ग्वालियर में सरकारी स्तर पर अंग प्रत्यारोपण की अत्याधुनिक सुविधा की शुरुआत हुई है। छतरपुर निवासी 60 वर्षीय कृष्णकांत गुप्ता की दोनों किडनियां खराब हो चुकी थीं। परिवार की सहमति के बाद उनकी 55 वर्षीय पत्नी मीना गुप्ता ने किडनी दान करने की इच्छा जताई।

इसके बाद दोनों की मेडिकल जांच, काउंसलिंग, अनुकूलता परीक्षण और ट्रांसप्लांट से जुड़ी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी की गईं। 29 अगस्त को मरीज और डोनर को सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में भर्ती किया गया। रविवार सुबह करीब 8:30 बजे ट्रांसप्लांट प्रक्रिया शुरू हुई, जो दोपहर लगभग 3 बजे पूरी हुई।

अस्पताल की नेफ्रोलॉजी, यूरोलॉजी और एनेस्थीसिया टीम ने मणिपाल हॉस्पिटल के यूरोलॉजी एवं किडनी ट्रांसप्लांट विभागाध्यक्ष डॉ. विकास जैन के सहयोग से ऑपरेशन को अंजाम दिया। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार पूरी प्रक्रिया निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत की गई और ट्रांसप्लांट के दौरान कोई बड़ी समस्या सामने नहीं आई।

इस उपलब्धि का एक अहम पहलू यह भी रहा कि कृष्णकांत गुप्ता का पूरा किडनी ट्रांसप्लांट आयुष्मान योजना के तहत नि:शुल्क किया गया। इससे उन मरीजों के लिए भी उम्मीद बढ़ी है, जो महंगे अंग प्रत्यारोपण का खर्च वहन नहीं कर सकते। गुप्ता के परिजनों ने अस्पताल की चिकित्सा टीम और शासन की स्वास्थ्य योजना के प्रति आभार जताया।

ट्रांसप्लांट के बाद मरीज को संक्रमण से बचाना अस्पताल के सामने बड़ी चुनौती होती है। इसे देखते हुए सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में मरीज के लिए अलग आईसीयू की व्यवस्था की गई है। मरीज के आईसीयू में अतिरिक्त एसी की व्यवस्था भी की गई है। चिकित्सकों और अधिकृत चिकित्सा स्टाफ के अलावा अन्य लोगों के प्रवेश पर रोक रहेगी।

अस्पताल के अनुसार मरीज को अगले सात दिनों तक मेडिसिन, नेफ्रोलॉजी और एनेस्थीसिया विभाग के चिकित्सकों की विशेष निगरानी में रखा जाएगा। इसके लिए राउंड-द-क्लॉक ड्यूटी लगाई गई है।

ट्रांसप्लांट प्रक्रिया में डॉ. नीलिमा टंडन, डॉ. प्रशांत श्रीवास्तव, डॉ. शिवम यादव, डॉ. अंकित शर्मा, डॉ. सीमा शिंदे, डॉ. जिंदल, डॉ. नम्रता जैन, डॉ. कुशल, ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर कविता और राहुल सहित चिकित्सा टीम की भूमिका रही। परिजनों के मुताबिक ट्रांसप्लांट के दौरान किसी तरह की बड़ी परेशानी नहीं आई।

कृष्णकांत गुप्ता के बेटे सुमित कनकने ने बताया कि उपचार आयुष्मान योजना के तहत हुआ और उन्होंने महाविद्यालय अधिष्ठाता प्रो. डॉ. आरकेएस धाकड़ सहित चिकित्सकों का आभार जताया। महाविद्यालय अधिष्ठाता प्रो. डॉ. आरकेएस धाकड़ ने इसे गजराराजा चिकित्सा महाविद्यालय और पूरे ग्वालियर-चंबल क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

वहीं ट्रांसप्लांट में सहयोग करने वाले डॉ. विकास जैन ने सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल की टीम और उपलब्ध व्यवस्थाओं की सराहना की। सरकारी अस्पताल में किडनी ट्रांसप्लांट की शुरुआत से अब ग्वालियर-चंबल अंचल के मरीजों को जटिल उपचार के लिए दूसरे बड़े शहरों का रुख करने की जरूरत कम होने की उम्मीद है।

यह सुविधा क्षेत्र में सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को उच्चस्तरीय बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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Sanjida Khanam

Sanjida Khanam डिजिटल हिंदी पत्रकारिता के साथ सामाजिक, राजनीतिक और जनहित से जुड़े मुद्दों की रिपोर्टिंग में सक्रिय हैं।