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हादसे में परिवार उजड़ा, इकलौते बेटे की मौत, पिता लाचार:उठने तक के लिए दूसरों पर निर्भर; 4 साल बाद मिलेगा 2.25 करोड़ का मुआवजा

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 11 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
हादसे में परिवार उजड़ा, इकलौते बेटे की मौत, पिता लाचार:उठने तक के लिए दूसरों पर निर्भर; 4 साल बाद मिलेगा 2.25 करोड़ का मुआवजा

देवास जिले के चापड़ा के पास हुए 4 साल पहले हुए सड़क हादसे ने एक परिवार से उसका इकलौता बेटा छीन लिया। वहीं टीचर रहे पिता की जिंदगी भी पूरी तरह बदल गई। वे लंबे समय कोमा में रहने के बाद अपनी सुधबुध खो बैठे हैं। स्थिति ऐसी है कि सुबह उठने से लेकर रात तक उनकी जिंदगी दूसरों पर निर्भर है। तब से अब तक करीब 4 साल चली सुनवाई चली।

कोर्ट ने 28 सितंबर को दोनों मामलों में कुल 1.76 करोड़ रुपए का मुआवजा देने का आदेश दिया है। 6% ब्याज सहित यह रकम 2.25 करोड़ रुपए बनती है। अमरपुरा के पास डंपर में मारी थी टक्कर घटना 13 मार्च 2022 को हुई थी। देवास जिले के खातेगांव निवासी पीयूष गर्ग और पिता सुरेंद्रचंद्र गर्ग कार से इंदौर आ रहे थे।

तभी रास्ते में चापड़ा-अमरपुरा के पास उन्हें एक डंपर ने टक्कर मार दी। हादसे में पीयूष को सिर, सीने और शरीर के अन्य हिस्सों में गंभीर चोटें आईं और उनकी घटना स्थल पर ही मौत हो गई। पिता सुरेंद्रचंद्र को भी सिर और शरीर के अन्य हिस्सों में गंभीर चोटें आईं। हादसे के बाद सुरेंद्र चंद्र को इलाज के लिए बॉम्बे हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया।

इस दौरान वे अलग-अलग अवधियों में लंबे समय तक अस्पतालों में एडमिट रहे और इलाज चलता रहा। कोमा से बाहर आने के बाद वे सुधबुध खो बैठे हैं। वे अपनी देखभाल के लिए भी दूसरों पर निर्भर हैं। क्या है, अभी और भविष्य की स्थिति दुर्घटना के बाद उनकी कार्यक्षमता पर गंभीर असर पड़ा। इंदौर जिला एवं सत्र न्यायालय ने स्थायी आय में कमी, इलाज, अटेंडेंट, भविष्य की संभावनाओं, शारीरिक-मानसिक पीड़ा, पौष्टिक आहार और परिवहन सहित अलग-अलग मदों में राशि तय की।

खास बात यह कि कोर्ट ने मुआवजे में 58.87 लाख रुपए स्थायी आय में कमी, 11.63 लाख रुपए मेडिकल खर्च, 8.83 लाख रुपए 15% फ्यूचर प्रॉस्पेक्ट, हादसे के शुरुआती समय के अटेंडेंट खर्च के लिए 1.68 लाख रुपए और बाद की अवधि के लिए 12.48 लाख रुपए शामिल किए गए। इसके अलावा दर्द, पौष्टिक आहार और परिवहन के लिए अलग राशि जोड़ी गई।

पीयूष के परिवार को 80.72 लाख रुपए बेटा पीयूष हादसे के समय युवा थे और व्यवसाय करते थे। कोर्ट ने उनकी आय के निर्धारण के बाद भविष्य की आय को ध्यान में रखते हुए 40% फ्यूचर प्रॉस्पेक्ट भी जोड़ा गया। कोर्ट ने उनके आश्रित परिवार के लिए कुल 80.71 लाख रुपए मुआवजा निर्धारित किया। पीयूष के पीछे उनकी पत्नी कनुप्रिया, दो बच्चे और माता-पिता हैं।

बीमा कंपनी की आपत्ति भी कोर्ट ने खारिज की बीमा कंपनी की ओर से वाहन के फिटनेस संबंधी आपत्ति उठाई गई थी। रिकॉर्ड के अनुसार दुर्घटना की तारीख पर वाहन का वैध और प्रभावी फिटनेस प्रमाणपत्र उपलब्ध नहीं था। हालांकि कोर्ट ने बीमा पॉलिसी की शर्तों और लागू न्यायिक फैसलों का परीक्षण करते हुए बीमा कंपनी को मुआवजे की जिम्मेदारी से मुक्त करने से इनकार किया।

ड्राइवर की लापरवाही हादसे का कारण मानी कोर्ट ने प्रत्यक्षदर्शी और पुलिस रिकॉर्ड सहित उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर माना कि डंपर चालक ने वाहन को तेज और लापरवाही से चलाते हुए कार को टक्कर मारी थी। वाहन चालक की ओर से इस साक्ष्य का प्रभावी खंडन भी नहीं किया गया। 6% ब्याज के साथ भुगतान कोर्ट ने दोनों मामलों में 9 सितंबर 2022 से भुगतान की तारीख तक 6% वार्षिक ब्याज देने का आदेश दिया है।

पीयूष के मामले में 80.71 लाख और सुरेंद्रचंद्र के मामले में 95.51 लाख रुपए की मूल मुआवजा राशि है। यानी मूल राशि करीब 1.76 करोड़ रुपए है; वास्तविक भुगतान की तारीख तक ब्याज जुड़ने से देय राशि करीब 2.25 करोड़ रुपए है। पति को खोया, अब 24 घंटे ध्यान देने की जरूरत दुखद पहलू यह कि गर्ग परिवार में पीयूष इकलौता बेटा था।

परिवार में अग पत्नी कनुप्रिया, बेटा मान्य (10), बेटी भूमिक (5), मां मधु (58) हैं। पीयूष की मौत के बाद मुआवजे के लिए इन चारों ने अपील की थी। उधर, सुरेशचंद्र दुर्घटना के बाद सुधबुध खो बैठे हैं इसलिए उनकी ओर से बेटी सानिया मोदी ने अपील की। इसमें डंपर मालिक श्रीकांत मीणा, ड्राइवर सुभाषचंद्र जाट और डंपर की बीमा कंपनी नेशनल इंश्योरेंस लिमिटेड के खिलाफ मुआवजा दिलाने की अपील की गई थी।

बहू कनुप्रिया ने बताया कि हादसे के बाद परिवार पूरी तरह बिखर गया है। ससुर की हालत ऐसी है कि परिवार को हर पल उनका ख्याल रखना पड़ता है। बच्चे भी सदमे से उबरे नहीं हैं। एक माह में देना होगी 2.25 करोड़ की राशि पीड़ित पक्ष के एडवोकेट गोविंद आर.

मीणा के अनुसार दोनों मामले एक ही हादसे से जुड़े थे, इसलिए इन्हें साथ में सुना गया।

📡 स्रोत: NewsData.io

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