हाफिज सईद के नाम 2 महीने में दूसरा गैर-जमानती वारंट:NIA कोर्ट का आरोप- आतंकवादियों को हथियार और फंड दिया; पहलगाम हमले का भी वांटेड
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जम्मू की एक स्पेशल NIA कोर्ट ने लश्कर-ए-तैयबा के चीफ और घोषित आतंकवादी हाफिज मोहम्मद सईद के खिलाफ नया गैर-जमानती वारंट जारी किया है। उस पर कश्मीर घाटी में सक्रिय आतंकवादियों को हथियार, फंड और निर्देश देने का आरोप है। जम्मू NIA कोर्ट द्वारा सईद के ख़िलाफ दो महीने से भी कम समय में जारी किया गया यह दूसरा गैर-जमानती वारंट है।
वारंट को NIA जम्मू के DIG को भेजा गया है, ताकि कानून के मुताबिक इसे लागू कराया जा सके। यह वारंट जम्मू-कश्मीर में सक्रिय आतंकवादियों को पर हथियार और दूसरी मदद पहुंचाने से जुड़े मामले की जांच के दौरान जारी किया गया है। इससे पहले, कोर्ट ने जुलाई में पहलगाम आतंकी हमले की जांच के सिलसिले में सईद के खिलाफ वारंट जारी किया था, जिसमें NIA ने उसे मास्टरमाइंड में से एक बताया था।
पाकिस्तान में है आतंकी हाफिज सईद कश्मीर घाटी में सक्रिय आतंकवादियों को हथियार, पैसे और निर्देश दे रहा है।
NIA ने कोर्ट को यह भी बताया कि सईद अभी पाकिस्तान में है और कानूनी प्रक्रिया से बचने के लिए जान-बूझकर गिरफ्तारी से बच रहा है। NIA कोर्ट ने कहा, “आरोपी फरार है और जांच एजेंसी सामान्य तरीके से उसे पेश नहीं करा पाई है, इस बात को ध्यान में रखते हुए कि इस अर्जी को मंजूरी दी जाती है।” हाफिज मुहम्मद सईद, जो 'गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967' के तहत घोषित आतंकवादी है।
प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का संस्थापक है और पाकिस्तान से काम कर रहा है। संदिग्ध आतंकी ने पूछताछ में लिया लश्कर चीफ का नाम यह मामला जम्मू-कश्मीर पुलिस द्वारा गुज्जर टेंट, पंडाच में नाका चेकिंग के दौरान एक संदिग्ध आतंकवादी की गिरफ्तारी से जुड़ा है। उसके पास से एक चीनी ग्रेनेड और 15 जिंदा कारतूस बरामद किए गए थे।
पूछताछ में, गिरफ्तार शख्स की पहचान श्रीनगर के मोहम्मद नकीब भट के तौर पर हुई। जकूरा पुलिस स्टेशन में UA(P) एक्ट, 1967 की धारा 23, आर्म्स एक्ट, 1959 की धारा 7/25 और एक्सप्लोसिव सब्सटेंस एक्ट, 1908 की धारा 4 के तहत FIR नंबर 24/2026 दर्ज की गई।
📡 स्रोत: Dainik Bhaskar
💡 पृष्ठभूमि (Background)
यह खबर जम्मू और कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ चल रही कानूनी कार्रवाई के बारे में है। लश्कर-ए-तैयबा के प्रमुख हाफिज मोहम्मद सईद पर दो महीने के भीतर दूसरा गैर-जमानती वारंट जारी किया गया है, जिसमें उन्हें आतंकवादियों को हथियार, फंड और निर्देश देने का आरोप लगाया गया है। यह कदम इस बात का संकेत है कि भारतीय सुरक्षा एजेंसियाँ कश्मीर में सक्रिय आतंकवादी नेटवर्क को रोकने के लिए कितनी सख्त हैं। आम जनता के लिए यह खबर सुरक्षा की स्थिति पर प्रकाश डालती है और यह दर्शाती है कि सरकार आतंकवाद से लड़ने में सतर्क है