हाईकोर्ट ने BJP-विधायक की आनंद माइनिंग कॉर्पोरेशन याचिका खारिज की:जीतू पटवारी ने CM को पत्र लिखकर तुरंत वसूली की मांग की
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →भाजपा विधायक संजय पाठक के परिवार से जुड़ी माइनिंग कंपनियों से प्रस्तावित 443 करोड़ रुपए की रिकवरी का मामला एक बार फिर चर्चा में है। जबलपुर हाईकोर्ट ने आनंद माइनिंग कॉर्पोरेशन की याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने कंपनी को अपना पक्ष जबलपुर कलेक्टर के सामने रखने और कलेक्टर को मामले का कानून के अनुसार निराकरण करने के निर्देश दिए हैं।
हाईकोर्ट ने याचिका खारिज की मामला जबलपुर जिले की सिहोरा तहसील के टिकरिया और प्रतापपुर क्षेत्र की लौह अयस्क खदानों से जुड़ा है। आनंद माइनिंग की ओर से प्रस्तावित वसूली और कारण बताओ नोटिस की कार्रवाई को चुनौती दी गई थी। हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद अब कंपनी को कलेक्टर के समक्ष अपना पक्ष रखना होगा।
कोर्ट ने प्रमाणित आदेश की प्रति मिलने के बाद कलेक्टर को चार महीने में मामले का निराकरण करने को कहा है। तीन कंपनियों पर 443 करोड़ रुपए की वसूली का मामला सरकारी कार्रवाई में आनंद माइनिंग कॉर्पोरेशन, निर्मला मिनरल्स और पेसिफिक एक्सपोर्ट्स से कुल 443 करोड़ 4 लाख 86 हजार रुपए की वसूली का मामला सामने आया है।
यह राशि खनन में निर्धारित सीमा से अधिक उत्खनन और उससे जुड़े राजस्व की गणना के आधार पर प्रस्तावित की गई है। 2025 में राज्य सरकार की ओर से विधानसभा में भी 443 करोड़ रुपए की राशि से जुड़ी जानकारी दी गई थी। पटवारी ने CM से पूछा- अब वसूली में देरी क्यों?
हाईकोर्ट के ताजा आदेश के बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री डॉ.
मोहन यादव को पत्र भेजकर सरकार से तत्काल वसूली की कार्रवाई शुरू करने की मांग की है। पटवारी ने कहा कि सरकार को संबंधित कंपनियों को डिमांड नोट जारी कर बकाया राशि की वसूली की प्रक्रिया आगे बढ़ानी चाहिए। उन्होंने मूल राशि के साथ नियमों के मुताबिक ब्याज, पेनल्टी, जीएसटी और अन्य वैधानिक देयकों की भी गणना करने की मांग की है।
कांग्रेस ने सरकार से पूछे 5 सवाल पटवारी ने अपने पत्र में सरकार की कार्रवाई को लेकर पांच सवाल उठाए हैं। इनमें हाईकोर्ट के आदेश के बाद डिमांड नोट जारी करने में देरी का कारण, प्रभावशाली लोगों और आम लोगों के लिए नियमों में अंतर, ब्याज-पेनल्टी की गणना, अधिकारियों की कार्रवाई में देरी और पूरे मामले पर सार्वजनिक रिपोर्ट जारी करने से जुड़े सवाल शामिल हैं।
मामला पहले भी विधानसभा तक पहुंच चुका है इस मामले में 2025 में विधानसभा में पूछे गए सवाल के जवाब में सरकार ने 443 करोड़ रुपए की वसूली से संबंधित जानकारी दी थी। इसके बाद प्रशासन ने संबंधित कंपनियों को नोटिस जारी किए थे। दिसंबर 2025 में कंपनियों को 443 करोड़ रुपए की वसूली के लिए अंतिम नोटिस जारी होने की रिपोर्ट भी सामने आई थी।
कंपनियों ने जांच पर भी उठाए थे सवाल इससे पहले कंपनियों की ओर से जांच के निष्कर्षों पर आपत्ति जताई गई थी। कंपनी पक्ष ने कहा था कि कोई अवैध उत्खनन नहीं किया गया और जांच रिपोर्ट तैयार करने में मौके की स्थिति का सही आकलन नहीं हुआ। इसलिए इस मामले में अंतिम देनदारी और वसूली की स्थिति संबंधित प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद स्पष्ट होगी।
रिकवरी को लेकर कांग्रेस ने सरकार को घेरा पटवारी ने कहा कि यह राशि सरकारी राजस्व से जुड़ी है और इसकी वसूली में पारदर्शिता होनी चाहिए। उन्होंने सरकार से पूरी प्रक्रिया का हिसाब सार्वजनिक करने की मांग की है। कांग्रेस ने संकेत दिया है कि कार्रवाई में देरी होने पर वह इस मुद्दे को आगे भी उठाएगी।
वहीं, हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब मामले में अगला फैसला प्रशासनिक स्तर पर होना है।
📡 स्रोत: NewsData.io