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हाईकोर्ट बोला- पत्नी का हर जगह साथ जाना जरूरी नहीं:उससे वोडाफोन एड वाले डॉग की तरह पति के पीछे-पीछे चलने की उम्मीद नहीं कर सकते

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 3 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
हाईकोर्ट बोला- पत्नी का हर जगह साथ जाना जरूरी नहीं:उससे वोडाफोन एड वाले डॉग की तरह पति के पीछे-पीछे चलने की उम्मीद नहीं कर सकते

मद्रास हाईकोर्ट ने गुरुवार को कहा कि पत्नी से पति के पीछे वोडाफोन के एड वाले पग डॉग की तरह चलने की उम्मीद नहीं की जा सकती। कोर्ट ने कहा कि नौकरी या दूसरी वजहों से पति जहां जाए, पत्नी का हर बार उसके साथ जाना जरूरी नहीं है। यह मामला उस कपल से जुड़ा है, जो करीब 16 साल से अलग रह रहा था।

दोनों की शादी 34 साल पहले, सितंबर 1992 में हुई थी। कपल के चार बच्चे भी हैं। अभी पति की उम्र 67 साल है। हाईकोर्ट ने कहा कि पति-पत्नी के बीच काफी कड़वाहट है और दोबारा साथ आने की कोई संभावना नहीं बची है। कोर्ट ने पति को पत्नी को ₹7 लाख गुजारा भत्ता देने का भी आदेश दिया।

फैमिली कोर्ट ने कहा था- अकेले मुंबई जाना पति की गलती पति ने अपनी तलाक याचिका में बताया था कि वह नौकरी के लिए मुंबई चला गया था लेकिन पत्नी उसके साथ नहीं गई। फैमिली कोर्ट ने इसी आधार पर पति की तलाक याचिका खारिज कर दी थी।

कोर्ट का मानना था कि पति खुद पत्नी को छोड़कर गया है, इसलिए वह अपने ही गलत आचरण का फायदा उठाकर तलाक नहीं मांग सकता। हालांकि, हाईकोर्ट ने इस दलील को सही नहीं माना। कोर्ट ने कहा कि हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 23(1)(a) में जिस ‘गलत’ आचरण की बात है, उसका मतलब ऐसा गंभीर व्यवहार है जो न्याय और सही आचरण के खिलाफ हो।

पति ने पत्नी पर अवैध संबंध के भी आरोप लगाए थे पति ने अपनी तलाक याचिका में आरोप लगाया था कि पत्नी के किसी दूसरे व्यक्ति के साथ अवैध संबंध हैं। हालांकि, हाईकोर्ट ने अवैध संबंध के आरोप को स्वीकार नहीं किया।

जस्टिस जीआर स्वामीनाथन और जस्टिस एमडी सुमति की बेंच ने कहा कि जिस व्यक्ति को पत्नी का प्रेमी बताया गया था, उसे मामले में पक्षकार ही नहीं बनाया गया। कोर्ट ने कहा कि ऐसे आरोप में प्रेमी को भी मामले में शामिल करना जरूरी है। ऐसा नहीं होने पर अवैध संबंध के आधार पर लगाया गया आरोप टिक नहीं सकता।

पत्नी ने भी साथ रहने के लिए कोई कदम नहीं उठाया हाईकोर्ट ने यह भी देखा कि पति से अलग रहने के दौरान पत्नी ने उसके साथ दोबारा रहने के लिए कोई औपचारिक कदम नहीं उठाया था। उसने पति को वापस साथ रहने के लिए कोई लेटर या कानूनी नोटिस भी नहीं भेजा। कोर्ट ने समझौते की कोशिश भी की, लेकिन दोनों के बीच बात नहीं बनी।

इसी दौरान कोर्ट ने कहा कि हर परिस्थिति में पति-पत्नी का साथ रहना व्यावहारिक नहीं होता। कोर्ट ने सेना का उदाहरण देते हुए कह

📡 स्रोत: Dainik Bhaskar

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💡 पृष्ठभूमि (Background)

मदरास हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि पति के काम या अन्य कारणों से जहाँ वह जाएँ, पत्नी को हर बार साथ चलना अनिवार्य नहीं है। यह निर्णय एक ऐसे कपल पर लागू हुआ है, जो 16 साल से अलग रह रहा है और 34 साल पहले शादीशुदा थे। इस फैसले से यह सन्देश मिलता है कि वैवाहिक संबंधों में व्यक्तिगत स्वायत्तता और स्वतंत्रता का भी स्थान होना चाहिए। यह विषय इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह पारंपरिक वैवाहिक अपेक्षाओं को चुनौती देता है। आम जनता पर इसका प्रभाव यह है कि लोग अपनी व्यक्तिगत सीमाएँ और रिश्तों की प्रकृति पर पुनर्

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