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हजारीबाग के बुढ़िया माता मंदिर में 200 वर्षों से मां के निराकार रूप की होती है पूजा

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 19 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
हजारीबाग के बुढ़िया माता मंदिर में 200 वर्षों से मां के निराकार रूप की होती है पूजा

हजारीबाग के बुढ़िया माता मंदिर में मां के निराकार रूप की होती है पूजा, 200 साल से अधिक पुरानी परंपरा का निर्वहन, नवरात्र में दूर-दराज से दर्शन करने पहुंचते हैं श्रद्धालु।

Short Headline: हजारीबाग के बुढ़िया माता मंदिर में 200 वर्षों से मां के निराकार रूप की होती है पूजा

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दीवार में होती है मां के निराकार स्वरूप की पूजा

200 साल से अधिक पुराना है बुढ़िया माता मंदिर

नवरात्र में दूर-दराज से दर्शन करने पहुंचते हैं श्रद्धालु

एंकर मां दुर्गा के कई स्वरूपों की पूजा होती है। कहीं मां के चरण, तो कहीं नयन और ज्वाला के रूप में आराधना की जाती है। लेकिन हजारीबाग के इचाक में एक ऐसा मंदिर है, जहां मां के निराकार स्वरूप की पूजा होती है। यहां न कोई प्रतिमा है और न ही पिंडी, बल्कि भक्त दीवार की पूजा करते हैं।

होल्ड अप साउंड रिपोर्ट

वीओ 1 हजारीबाग के इचाक प्रखंड के बनस टांड़ स्थित बुढ़िया माता मंदिर में दीवार की पूजा की परंपरा है। मंदिर में दीवार पर उभरी आकृति को माता का स्वरूप मानकर श्रद्धालु पूजा-अर्चना करते हैं। मान्यता है कि यह परंपरा 200 साल से भी अधिक पुरानी है। नवरात्र में यहां विशेष पूजा होती है और दूर-दराज से भक्त पहुंचते हैं। इस मंदिर की खासियत और यहां की पूजा परंपरा के बारे में बता रहे हैं पुजारी अमरनाथ पांडेय।

बाइट- अमरनाथ पांडेय, पुजारी

वीओ 2 बुढ़िया माता मंदिर से एक पुरानी किवदंती भी जुड़ी है। कहा जाता है कि वर्ष 1668 में इचाक में हैजा फैलने के दौरान एक बुजुर्ग महिला ने लोगों को मिट्टी देकर गांव से दूर रखने को कहा था। मान्यता है कि इसके बाद महिला गायब हो गई और धीरे-धीरे महामारी समाप्त हो गई। उसी मिट्टी से जुड़ी आकृति की दीवार के रूप में पूजा होने लगी। सप्तमी के दिन दीवार पर सिंदूर और घी लगाने की परंपरा है। इस मंदिर के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था कैसी है, सुनिए एक भक्त से।

बाइट- श्रद्धालु

वीओ 3 बुढ़िया माता मंदिर में सिर्फ नवरात्र ही नहीं, बल्कि सालभर श्रद्धालु दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। भक्तों का विश्वास है कि सच्चे मन से मांगी गई मुराद माता पूरी करती हैं। यही वजह है कि हजारीबाग के अलावा आसपास के क्षेत्रों से भी लोग यहां आते हैं। बिना प्रतिमा और पिंडी के दीवार की पूजा की यह परंपरा मंदिर को विशेष पहचान देती है।

बाइट- श्रद्धालु

अंतिम वीओ आस्था और विश्वास की यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है। बुढ़िया माता मंदिर में भक्त दीवार में मां के निराकार स्वरूप को मानकर पूजा करते हैं। नवरात्र के दौरान यहां श्रद्धालुओं की विशेष भीड़ उमड़ती है।

हजारीबाग से गौरव प्रकाश की रिपोर्ट।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।