हजारीबाग में दो दिवसीय 'सोहराय महोत्सव' में हस्तशिल्प और पारंपरिक उत्पादों की झलक
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हजारीबाग में दो दिवसीय 'सोहराय महोत्सव' का शुभारंभ, पद्मश्री बुलू इमाम ने किया उद्घाटन, हस्तशिल्प और झारखंडी खानपान के स्टॉल बने आकर्षण का केंद्र, सोहराय और कोहबर कला की बढ़ी साख।
Short Headline: हजारीबाग में दो दिवसीय 'सोहराय महोत्सव' में हस्तशिल्प और पारंपरिक उत्पादों की झलक
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हजारीबाग में दो दिवसीय 'सोहराय महोत्सव' का शुभारंभ
पद्मश्री बुलू इमाम ने किया उद्घाटन हस्तशिल्प और झारखंडी खानपान के स्टॉल बने आकर्षण का केंद्र
सोहराय और कोहबर कला की बढ़ी साख
एंकर झारखंड की समृद्ध लोककला, संस्कृति और गौरवशाली परंपराओं को संरक्षित तथा प्रोत्साहित करने के लिए हजारीबाग के संत कोलंबा कॉलेज मैदान में दो दिवसीय 'सोहराय महोत्सव' का शुभारंभ हुआ। 'हो एंटरटेनमेंट कल्चरल टीम' और 'सोहराय महोत्सव आयोजन समिति' द्वारा आयोजित इस महोत्सव का उद्घाटन मुख्य अतिथि पद्मश्री बुलू इमाम ने किया।
होल्ड अप साउंड रिपोर्ट
वीओ 01. हजारीबाग अपनी अनूठी लोक कलाओं के लिए प्रसिद्ध है, जहाँ की 'सोहराय कला' ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी एक अलग पहचान बनाई है। इस महान कलात्मक विरासत को आने वाली नई पीढ़ी तक पहुँचाने के उद्देश्य से स्थानीय युवाओं की ओर से सोहराय महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। कार्यक्रम में पहुंचे मुख्य अतिथि पद्मश्री बुलू इमाम और गुस्ताख़ इमाम ने इस आयोजन पर गहरी खुशी जाहिर की।
वीओ 02. महोत्सव परिसर में लगाई गई हस्तशिल्प प्रदर्शनी और झारखंड के पारंपरिक खानपान के स्टॉल लोगों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। आयोजन समिति से जुड़े चंदन सिंह ने बताया कि इस महोत्सव का मुख्य ध्येय नई पीढ़ी को अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से अवगत कराना है।
अंतिम वीओ सोहराय महोत्सव के जरिए झारखंड के पारंपरिक नृत्य, संगीत, पहनावे और लोककला को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पटल पर एक नई पहचान देने का यह प्रयास निश्चित रूप से सराहनीय है।
हजारीबाग से गौरव प्रकाश की रिपोर्ट।