अपराध

हजारीबाग के दूधमटिया से शुरू हुआ 'वृक्ष रक्षाबंधन' अभियान, 31 वर्षों में 2000 से अधिक गांवों तक पहुंची मुहिम

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 7 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
हजारीबाग के दूधमटिया से शुरू हुआ 'वृक्ष रक्षाबंधन' अभियान, 31 वर्षों में 2000 से अधिक गांवों तक पहुंची मुहिम

हजारीबाग के दूधमटिया से शुरू हुआ 'वृक्ष रक्षाबंधन' अभियान , 31 वर्षों में 2000 से अधिक गांवों तक पहुंची मुहिम, 1999 में शिक्षक महादेव महतो ने की थी पेड़ बचाने की पहल, वन देवी की पूजा और लाल धागा बांधकर जंगल बचाने का संकल्प।

Short Headline: हजारीबाग के दूधमटिया से शुरू हुआ 'वृक्ष रक्षाबंधन' अभियान, 31 वर्षों में 2000 से अधिक गांवों तक पहुंची मुहिम

वन महोत्सव, हजारीबाग, गौरव

हजारीबाग के दूधमटिया से शुरू हुआ 'वृक्ष रक्षाबंधन' अभियान

31 वर्षों में 2000 से अधिक गांवों तक पहुंची मुहिम

1999 में शिक्षक महादेव महतो ने की थी पेड़ बचाने की पहल

वन देवी की पूजा और लाल धागा बांधकर जंगल बचाने का संकल्प

एंकर हजारीबाग के टाटीझरिया प्रखंड स्थित दूधमटिया जंगल से शुरू हुआ 'वन महोत्सव' और 'वृक्ष रक्षाबंधन' का अभियान आज पूरे राज्य और देश के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुका है। पेड़ों को बचाने के लिए तने पर रक्षा-सूत्र बांधने की यह अनूठी परंपरा और जंगल की सुरक्षा की सौगंध दूधमटिया वन महोत्सव को एक अलग पहचान देती है।

होल्ड अप साउंड रिपोर्ट

वीओ 01. हजारीबाग के दूधमटिया जंगल में हर वर्ष 7 अक्टूबर का दिन पर्यावरण संरक्षण के रूप में मनाया जाता है। वर्ष 1995 में शिक्षक महादेव महतो ने पेड़ों की अंधाधुंध कटाई और जंगलों की अवैध तस्करी को रोकने के लिए अपने सहयोगियों के साथ 'वृक्ष रक्षाबंधन' की नींव रखी थी।

बाइट: महादेव महतो, प्रणेता, वृक्ष रक्षाबंधन अभियान

बाइट: सुरेंद्र सिंह, सहयोगी सह प्रणेता, टाटीझरिया

बाइट: मुरारी सिंह, पर्यावरणविद्

वीओ 02. दूधमटिया वन महोत्सव के अवसर पर सबसे पहले वन देवी की पारंपरिक विधिवत पूजा-अर्चना की जाती है। इसके उपरांत ग्रामीण, बच्चे और पर्यावरण प्रेमी पेड़ों के तनों पर लाल कपड़े का रक्षा-सूत्र बांधकर उनकी रक्षा करने की कसम खाते हैं। महोत्सव में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे राज्य के प्रधान मुख्य वन संरक्षक संजीव कुमार ने कहा कि एक शिक्षक की यह छोटी सी पहल आज व्यापक जन-आंदोलन का रूप ले चुकी है।

बाइट: संजीव कुमार, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (PCCF), झारखंड

अंतिम वीओ शिक्षक महादेव महतो और उनके साथियों की यह निस्वार्थ पहल न केवल हजारीबाग के दूधमटिया जंगल को कटने से बचा चुकी है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी 'वृक्ष ही जीवन है' का संदेश बुलंद कर रही है।

हजारीबाग से गौरव प्रकाश की रिपोर्ट।

🎙️ वॉयस ऑफ क्रांति का मत

वृक्ष रक्षाबंधन जैसी पहल हमें दिखाती है कि जब हम प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी लेते हैं, तो समाज में एकजुटता और समर्पण की भावना जागृत होती है। 31 वर्षों में 2000 से अधिक गांवों तक पहुँचने वाला यह अभियान हमें सिखाता है कि छोटे-छोटे कदम भी बड़े बदलाव ला सकते हैं। आइए हम भी अपने आस-पास के पर्यावरण की रक्षा के लिये मिलकर काम करें, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ व स्वस्थ धरती सुनिश्चित हो सके।

M
Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।