हजारीबाग का हज़रत दाता मदारा शाह बाबा की दरगाह पर 369वें सालाना उर्स में दिखा 'सर्वधर्म समभाव'
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हजारीबाग का हज़रत दाता मदारा शाह बाबा की दरगाह पर 369वें सालाना उर्स में दिखा 'सर्वधर्म समभाव', चार पीढ़ियों से हिंदू परिवार लगा रहे फूलों की दुकान, बाबा की मजार पर चढ़ाई जाती है उनके हाथों से तैयार फूलों की चादर।
Short Headline: हजारीबाग का हज़रत दाता मदारा शाह बाबा की दरगाह पर 369वें सालाना उर्स में दिखा 'सर्वधर्म समभाव'
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कौमी एकता की मिसाल हज़रत दाता मदारा शाह बाबा का उर्स
369वें सालाना उर्स में दिखा ‘सर्वधर्म समभाव’
चार पीढ़ियों से हिंदू परिवार फूलों की चला रहे दुकान
उर्स के दौरान परिवारों को हो रही अच्छी आमदनी
एंकर हजारीबाग में हज़रत दाता मदारा शाह बाबा की दरगाह कौमी एकता और सांप्रदायिक सौहार्द की अनूठी मिसाल पेश कर रही है। यहां आयोजित 369वें सालाना उर्स में सभी धर्मों के लोग श्रद्धा के साथ पहुंच रहे हैं। इस दरगाह की खासियत है कि चार पीढ़ियों से हिंदू परिवार फूलों की दुकान लगाते आ रहे हैं और उनके हाथों से तैयार फूलों की चादर बाबा की मजार पर चढ़ाई जाती है।
होल्ड अप साउंड रिपोर्ट
वीओ-1: हजारीबाग में मजहब की दीवारें छोटी पड़ जाती हैं और आस्था के साथ इंसानियत का रिश्ता मजबूत होता है। हज़रत दाता मदारा शाह बाबा की दरगाह, जिसे तकिया बाबा मजार के नाम से भी जाना जाता है, यहां सालाना उर्स के दौरान बड़ी संख्या में अकीदतमंद पहुंच रहे हैं। इस बार दरगाह में 369वें उर्स का आयोजन किया गया है। मान्यता है कि सच्चे मन से यहां दुआ मांगने वालों की मुराद पूरी होती है।
बाइट- इरफान अहमद काजू, मैनेजिंग कमेटी, दरगाह
वीओ-2: इस दरगाह के पास चार पीढ़ियों से हिंदू परिवार फूलों की दुकान लगाते आ रहे हैं। इन परिवारों की ओर से तैयार फूलों की चादर बाबा की मजार पर चढ़ाई जाती है। उर्स के दौरान फूलों की मांग बढ़ जाती है, जिससे फूल बेचकर आजीविका चलाने वाले परिवारों को बेहतर कमाई होती है।
बाइट- इरफान अहमद काजू, मैनेजिंग कमेटी, दरगाह
बाइट- जावेद मलिक, मैनेजिंग कमेटी, दरगाह
वीओ 03. उर्स के मौके पर दरगाह में बड़ी संख्या में महिला, पुरुष और बच्चे पहुंचे। फातेहाख्वानी के बाद अकीदतमंदों ने देश में अमन-शांति, खुशहाली और सद्भावना के लिए दुआ मांगी। उर्स के साथ यहां मेले का भी आयोजन किया गया है, जिसमें देश के अलग-अलग शहरों से आए व्यापारियों ने दुकानें लगाई हैं।
बाइट- मोहम्मद शमीम, सेवक
अंतिम वीओ हज़रत दाता मदारा शाह बाबा की दरगाह का यह उर्स सिर्फ धार्मिक आस्था का आयोजन नहीं, बल्कि गंगा-जमुनी तहजीब और सामाजिक एकता का जीवंत उदाहरण है। जहां एक ओर सभी धर्मों के लोग श्रद्धा के साथ सिर झुकाते हैं, वहीं पीढ़ियों से चली आ रही परंपराएं आपसी भाईचारे को मजबूत करती हैं।
हजारीबाग से गौरव प्रकाश की रिपोर्ट।