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हमारी ज्ञान परंपरा में व्यावहारिकता, गहनता और जीवन का दर्शन : राज्यपाल श्री पटेल

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 9 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
हमारी ज्ञान परंपरा में व्यावहारिकता, गहनता और जीवन का दर्शन : राज्यपाल श्री पटेल

राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि भारतीय संस्कृति प्रकृति पूजक है। ब्रह्माण्ड के सूर्य, चन्द्रमा, ग्रह, नक्षत्र हमारी जीवन संस्कृति का अभिन्न अंग है। प्रकृति के पांचों तत्व वायु, अग्नि, जल, पृथ्वी और नभ हमारी दैनिक दिनचर्या में शामिल है। यह महान ज्ञान परंपरा अनंत काल से शाश्वत है। इसमें व्यावहारिकता, गहनता और जीवन का गूढ़ दर्शन है। जरूरी है कि इस अद्भुत और गौरवशाली परंपरा को वर्तमान और भावी पीढ़ी तक सार्थक रूप से पहुंचाया जाए। आयोजक इस दिशा में बेहतर पारस्परिक समन्वय के साथ चिंतन करें, शोध और अनुसंधान को बढ़ावा दें। भारतीय ज्ञान परंपरा का निरंतर समृद्धता में योगदान करें।

राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा का महान स्त्रोत हमारी वैदिक, पौराणिक और प्राचीन संस्कृति है। रामायण और महाभारत जैसे ग्रंथ, ज्ञान, विज्ञान और संस्कार के अद्भुत भंडार है। इन ग्रंथों के प्रत्येक पात्र प्रेम, आदर, त्याग, स्वाभिमान, सम्मान और नैतिकता के आदर्श प्रतीक है।

उन्होंने निजी विश्वविद्यालयों से अपेक्षा की है कि हमारी परंपरा और उसके ज्ञान तत्वों को नई पीढ़ी तक पहुँचाने की ज़िम्मेदारी स्वीकारें। विद्यार्थियों को समाज के गरीब, पिछड़े, वंचित और कमजोर वर्गों के प्रति संवेदनशील बनाएं। उन्हें विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में सक्षम और सामर्थ्यवान बनाएं।

उन्होंने कहा कि आयोजक नियमित रूप से ऐसे आयोजनों की समीक्षा के द्वारा भविष्य की चुनौतियों और उनके समाधान के प्रयास करें।

राज्‍यपाल श्री पटेल ने कहा कि हमारी गुरु शिष्य परंपरा में शिक्षा केवल पाठ याद करना नहीं, बल्कि चरित्र, अनुशासन, आत्म निर्भरता और कर्तव्य बोध का विकास करना था। भारतीय ज्ञान परंपरा का गौरव, ऐसी उपलब्धियों में नहीं, बल्कि उस सोच में है, जिसने ज्ञान को मानव और समाज के हित से जोड़ा है। भारतीय ज्ञान परंपरा में शिक्षा की सार्थकता मनुष्य को अज्ञान, भय और बंधन से मुक्त करना और “सब सुखी हो” के लिए कार्य करना बताया है।

राज्‍यपाल श्री पटेल ने कहा कि भारत केवल एक प्राचीन देश नहीं, ऐसी महान ज्ञान सभ्यता है, जिसका लक्ष्य सत्य, जीवन और लोक का कल्याण था। हमारी ज्ञान परंपरा में शिक्षा केवल सूचना पाना नहीं, बल्कि जीवन को समझकर मानवता के कल्याण के लिए सत्य की खोज करना था। उन्होंने कहा कि उपनिषदों में हमारी ज्ञान परंपरा की जिज्ञासा, वेदों में प्रकृति और ब्रह्मांड के प्रति सम्मान तथा हमारे दर्शन में जीवन के गहरे सवालों के चिंतन की महान विरासत मिलती है।

चरक और सुश्रुत ने मानव स्वास्थ्य और चिकित्सा को व्यवस्थित ज्ञान के रूप में विकसित किया। कौटिल्य के अर्थशास्त्र में शासन, अर्थनीति, कूटनीति और समाज व्यवस्था पर गहरा चिंतन मिलता है, जिसकी प्रासंगिकता सर्वकालिक है।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।