Hanuman Ansh Controversy: फिल्म ‘हनुमान अंश’ को लेकर शुरू हुई राजनीति, कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने लगाया बड़ा आरोप
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Hanuman Ansh Controversy: नीम करौली बाबा के जीवन से प्रेरित फिल्म ‘हनुमान अंश’ बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचा रही है और शानदार कमाई भी कर रही है. इस बीच इस फिल्म को लेकर राजनीति भी शुरू हो गई है.
कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने फिल्म के जरिए धर्म की राजनीति करने का आरोप लगाया, तो वहीं बीजेपी नेता राम कदम ने कहा है कि हर बात को विवाद बनाना सही नहीं है.
राशिद अल्वी ने कहा कि जब से बीजेपी सत्ता में आई है, तब से वह धर्म को राजनीति में ले आई है. हर चुनाव राम मंदिर के नाम पर लड़ा जाता है.
आस्था के मुद्दों पर राजनीति करने और लोगों की धार्मिक भावनाओं को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है. ‘हनुमान अंश’ जैसी फिल्मों के जरिए लोगों के दिमाग पर असर डालने और धार्मिक भावनाओं का फायदा उठाने का प्रयास किया जा रहा है.
राम कदम ने फिल्म को लेकर क्या कहा?
वहीं बीजेपी नेता राम कदम ने कहा कि नीम करौली बाबा को लोग गहरी आस्था से देखते हैं और वह हनुमान के भक्त थे.
हालांकि, मैंने अभी तक फिल्म नहीं देखी है, लेकिन मैं कहना चाहूंगा कि अगर किसी व्यक्ति को फिल्म से कोई आपत्ति है, तो पहले फिल्म के कंटेंट को समझना चाहिए और यह जानना चाहिए कि उसमें आखिर क्या दिखाया गया है.
उन्होंने कहा कि हर चीज को विवाद का मुद्दा नहीं बनाएं.
तर्क और तथ्यों के आधार पर किसी विषय पर चर्चा की जा सकती है, लेकिन सनातन धर्म की छवि को धूमिल करने की कोशिश स्वीकार नहीं की जाएगी. फिल्म ‘हनुमान अंश’ की क्या है कहानी?
बता दें कि फिल्म ‘हनुमान अंश’ की कहानी नीम करौली बाबा के जीवन से प्रेरित आध्यात्मिक सफर को दिखाती है.
फिल्म की शुरुआत चंदन आनंद द्वारा निभाए गए भोसले के किरदार से होती है, जो अपने पोते को नीम करौली बाबा के बारे में बताता है.
कहानी 1942 के दौर में भी जाती है, जब देश अंग्रेजों की गुलामी में था और भोसले एक क्रांतिकारी के रूप में सक्रिय था.
फिल्म में दिखाया गया है कि उस दौर में बाबा पुलिस से उसकी रक्षा करते हैं और यहीं से उनके जीवन और उनसे जुड़ी घटनाओं की कहानी आगे बढ़ती है. इसके बाद कहानी 12 साल के लक्ष्मी नारायण (नीम करौली बाबा) के बचपन पर पहुंचती है.
मां के निधन से वह गहरे दुख में चला जाता है और इस विश्वास के साथ घर छोड़ देता है कि अगर वह ईश्वर को खोज लेगा तो शायद अपनी मां से फिर मिल सकेगा.
उसकी तलाश उसे मंदिरों, जंगलों, नदियों और गांवों से गुजरते हुए एक लंबी आध्यात्मिक यात्रा पर ले जाती है. धीरे-धीरे लक्ष्मी नारायण की यह निजी तलाश एक बड़े जीवन दर्शन में बदल जाती है.
भूखे को भोजन कराना, जरूरतमंदों की मदद करना, लोगों से बिना भेदभाव प्रेम करना, करुणा और निस्वार्थ सेवा को अपनाना उसकी जिंदगी का आधार बन जाता है.
📡 स्रोत: NewsData.io