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हर-हर महादेव के घोष से गूंजा ट्रहाई गांव, शिवलिंग प्राण प्रतिष्ठा समारोह ने छोड़ी अनूठी छाप

लेखक: AIR Shimla अंतिम अपडेट: 21 अगस्त 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति

सभी जाति-वर्ग के लोगों के लिए खुला शिवालय अगस्त 21, शिमला (हिमाचल प्रदेश): जुन्गा तहसील के गांव ट्रहाई में शिवलिंग प्राण प्रतिष्ठा एवं स्थापना समारोह धार्मिक आस्था, सामाजिक समरसता और श्रद्धा का अद्भुत संगम बनकर सामने आया है। पांच दिवसीय समारोह के दौरान पूरा क्षेत्र हर-हर महादेव के जयघोष से गूंजता रहा।

इस अवसर पर स्थापित शिव मंदिर क्षेत्र में अपनी तरह का पहला ऐसा मंदिर बनकर उभरा है, जहां सभी जाति, धर्म और समुदाय के लोगों को मंदिर में प्रवेश कर भगवान शिव के दर्शन एवं अपनी श्रद्धानुसार पूजा-अर्चना करने की स्वतंत्रता होगी।

ग्रामीण क्षेत्रों के अनेक प्राचीन मंदिरों में परंपरागत रूप से कुछ विशेष वर्गों के प्रवेश तक सीमित व्यवस्था रही है जबकि इस शिव मंदिर को सामाजिक समरसता और सर्वजन आस्था के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है। शिवलिंग की प्राण प्रतिष्ठा का शुभारंभ भव्य कलश यात्रा के साथ हुआ।

श्रद्धालु गिरिनदी से पवित्र जल लेकर मंदिर परिसर तक पहुंचे। कलश यात्रा में क्षेत्र के विभिन्न जाति-वर्गों की करीब 300 महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस पांच दिवसीय प्राण प्रतिष्ठा समारोह में आचार्य सुमित भारद्वाज ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

उनके साथ कर्मकांड के चार अन्य विशेषज्ञ पंडितों ने विधि-विधान के साथ धार्मिक अनुष्ठान संपन्न करवाए। इस दौरान शिवलिंग की पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ नगर परिक्रमा भी करवाई गई, जिसमें क्षेत्र के लोगों का भारी जनसैलाब उमड़ा।

समारोह के समापन अवसर पर विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें जुन्गा क्षेत्र के अलावा पड़ोसी सिरमौर और सोलन जिलों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पहुंचकर प्रसाद ग्रहण किया।

मंदिर के संस्थापक सत्यपाल ठाकुर और उनकी धर्मपत्नी विषमा ठाकुर ने बताया कि उनकी स्व. पूज्य माता की लंबे समय से शिव मंदिर निर्माण की इच्छा थी, जिसे पूरा करने का उन्हें सौभाग्य मिला है । उन्होंने बताया कि मंदिर में स्थापित शिवलिंग मध्यप्रदेश के नर्मदा क्षेत्र से मंगवाया गया है।

सत्यपाल ठाकुर ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों की रूढ़ीवादी परंपराओं को विराम देने के लिए उन्होने मंदिर स्थापित करने का संकल्प लिया, जहां बिना किसी भेदभाव के हर व्यक्ति भगवान शिव के दर्शन कर सके । उनका उद्देश्य मंदिर को केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बनाना ही नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और समरसता का प्रतीक बनाना भी है।

मंदिर निर्माण एवं महायज्ञ के सफल आयोजन में उनके ज्येष्ठ भ्राता जातीराम, प्रताप सिंह, वीरेन्द्र कुमार और तारा दत्त सहित गांववासियों का महत्वपूर्ण सहयोग रहा।

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