हरियाली महोत्सव पर नव प्रवेशित विद्यार्थियों की नई शुरूआत
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भोपाल। विक्रमादित्य कॉलेज के रातीबड़ कैंपस में हरियाली महोत्सव कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ डायरेक्टर डॉ. दीपिका नारोलिया के द्वारा सरस्वती मां की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्जवलित कर किया गया। इस अवसर पर मेंहदी, रांगोली, कबाड़ से जुगाड़, विक्रमादित्य वीर एवं विक्रमादित्य वीरांगना प्रतियोगिता का आयोजन किया गया।
सभी संकायों के नवप्रवेशित छात्र-छात्राओं ने मेंहदी, रांगोली, कबाड़ से जुगाड़ प्रतियोगिताओं में भाग लिया। भारतीय सांस्कृतिक विरासत से जुड़े विषयों पर मनमोहक नृत्य, नाटिकायें प्रस्तुत की गई। प्रकृति हमारी संस्कृति की रक्षक है, विषय पर छात्रों ने अपनी प्रस्तुति दी। ग्रुप डायरेक्टर डॉ. दीपिका नारोलिया ने सभी नवप्रवेशित छात्रों को बधाई देते हुये बताया कि अब हम स्कूल से महाविद्यालय में हैं।
प्रकृति से हमें धैर्य, संयम, अनुशासन की शिक्षा मिलती है। सभी समान रूप से हमें फूल. फल एवं छाया देते हैं, चाहे हमने उनके पोषण में अपना योगदान दिया है, अथवा नहीं प्रकृति भी समान रूप से हमें जल, वायु, स्वच्छ वातावरण प्रदान करती है, हमारा भी कर्तव्य है कि हम इसका ध्यान रखें, इसी तरह शिक्षक सभी को अपना मार्गदर्शन प्रदान करते हैं.
सभी को अपना मार्गदर्शन प्रदान करते हैं, सही राह दिखाते हैं हम अपनी क्षमतायें विकसित करें उसे कैसे ग्रहण करता है हम पर निर्भर है। अपका आने वाला कल आपके हाथों में है, उसे संजोना आपका कार्य है, शिक्षक प्रकृति की तरह सभी को समान रूप से मार्गदर्शन देते हैं। मेंहदी प्रतियोगिता में प्रथम कु.
मुस्कान गर्ग, रांगोली में प्रथम कु. दीपिका, वैष्णवी एवं आन्या, कबाड़ से जुगाड़ में प्रथम माधुरी, द्वितीय राहुल एवं मोनिका को तृतीय पुरस्कार प्राप्त हुआ। इसकी कार्यक्रम के बीच विक्रमादित्य वीर प्रवीण सिंह को एवं विक्रमादित्य वीरांगना अनन्या सक्सेना को चुना गया। इस अवसर पर मैनेजमेंट के स्टाफ के सभी प्राध्यापक एवं प्राध्यापिकायें उपस्थित हुये।
💡 पृष्ठभूमि (Background)
हरियाली महोत्सव एक सांस्कृतिक कार्यक्रम है जिसमें परंपरागत कला, रचनात्मकता और पर्यावरण जागरूकता को बढ़ावा दिया जाता है। यह कार्यक्रम नए विद्यार्थियों के लिए एक नई शुरुआत का प्रतीक है, जहाँ वे अपनी रचनात्मक क्षमताओं को प्रदर्शित करते हैं। इस खबर का महत्व इसलिए है क्योंकि यह शैक्षणिक संस्थानों में सांस्कृतिक समृद्धि और पर्यावरणीय चेतना को प्रोत्साहित करता है, साथ ही विद्यार्थियों में सामाजिक और सौंदर्यात्मक कौशल विकसित करता है। आम जनता पर इसका असर सकारात्मक है, क्योंकि इससे स्थानीय समुदाय में एकजु