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हरियाणा-इकलौते भाई के संस्कार से बहन का इनकार:आश्रम संचालक से हाथ जोड़कर बोलीं- टाइम नहीं, तुसी ही करा दो, मेहरबानी होवेगी; अस्थियां भी नहीं ली

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 6 अक्टूबर 2026 👁️ 9 बार पढ़ा गया
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
हरियाणा-इकलौते भाई के संस्कार से बहन का इनकार:आश्रम संचालक से हाथ जोड़कर बोलीं- टाइम नहीं, तुसी ही करा दो, मेहरबानी होवेगी; अस्थियां भी नहीं ली

संस्कार भी असी करिए, अस्थियां भी तुसी नी ले जा सकदे। हांजी, हांजी… तुसी ही कर दो संस्कार, तवाडी बौत मेहरबानी होवेगी। मेरे पास समा है नी। मैं रुक नहीं सकदी। जे मैं आप ठीक होंदी , ते रुक जांदी। ये बातचीत हो रही है दिल्ली के उत्तम नगर की रहने वाली पुष्पा रानी और बाबा फरीद अनाथ आश्रम के संचालक बाबा निशान सिंह के बीच।

हिंदी भाषा में कहे तो पुष्पा बाबा फरीद से कह रही है कि "आप ही कर दो संस्कार, आपकी बहुत मेहरबानी होगी। मेरे पास समय नहीं है। मैं रुक नहीं सकती। अगर मैं खुद ठीक होती, तो रुक जाती।" मामला है पुष्पा के इकलौते बड़े भाई जुगल किशोर (71)के अंतिम संस्कार का, जिनका शव कुरुक्षेत्र के LNJP अस्पताल में पड़ा था।

बाबा निशान सिंह ने पुष्पा को अंतिम संस्कार के लिए बुलाया था। पहले तो वह बड़ी मुश्किल से आने को राजी हुई, लेकिन आने के कुछ देर बाद ही भाई के शव को अस्पताल में ही छोड़कर रिश्तेदार के साथ चली गई। इसके बाद बाबा निशान सिंह और आश्रम कमेटी ने ही जुगल किशोर का अंतिम संस्कार किया। अस्थि विसर्जन भी आश्रम की ओर से सरस्वती नदी में किया गया।

बाबा निशान का कहना था कि बहन-भाई के ऐसे रिश्ते को देख बेहद दुख हुआ। दिल्ली निवासी जुगल किशोर के अंतिम संस्कार के PHOTO आश्रम संचालक की जुबानी, इस बेरूखे रिश्ते की पूरी कहानी… अस्थियां विसर्जित करने के लिए कहा तो हाथ जोड़ लिए बाबा निशान सिंह ने बताया कि अंतिम संस्कार में शामिल होने से मना करने पर उन्होंने पुष्पा से पूछा कि अस्थियां तो आपकों ही विसर्जित करनी होगी।

इस पर पुष्पा ने हाथ जोड़ लिए। कहा कि उसकी तबीयत ठीक नहीं है। इसलिए वह न तो अंतिम संस्कार में शामिल हो सकती है और न ही अस्थियां विसर्जित कर सकती है। यह सबकुछ आप ही कर देना, आपकी मेहरबानी होगी। बहन शव छोड़ गई, आश्रम कमेटी ने किया अंतिम संस्कार बाबा निशान सिंह के मुताबिक, इतना कहने के बाद पुष्पा अपने एक रिश्तेदार के साथ वहां से चली गई।

उसने भाई के अंतिम दर्शन तक नहीं किए। यह देख उन्हें बेहद दुख हुआ। इसके बाद उन्होंने आश्रम कमेटी से बात की और जुगल किशोर के शव को पिहोवा लाकर उसका अंतिम संस्कार किया। संस्कार के बाद अस्थियां को भी सरस्वती में प्रवाहित कर दिया। 30 से ज्यादा बेघर रह रहे आश्रम बाबा निशान सिंह ने बताया कि उनके आश्रम में 30 से ज्यादा बेघर लोग रह रहे हैं।

इसमें बच्चे, दिव्यांग, बुजुर

📡 स्रोत: Dainik Bhaskar

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