हत्या के बाद 20 दिन तक 'जिंदा' रहा फोटोग्राफर:प्रयागराज में मर्डर करने वाला दोस्त गर्लफ्रेंड से चैट करता रहा; शव के हाथ-पैर तोड़े थे
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →प्रयागराज के धूमनगंज में फोटोग्राफर की हत्या के मामले में कई सनसनीखेज खुलासे हुए हैं। हत्या करने के बाद फोटोग्राफर आलोक गुप्ता (27) के तीनों दोस्त सिर्फ लाश ठिकाने लगाने तक नहीं रुके। तीनों मौत छिपाने के लिए उसके आईफोन का भी इस्तेमाल करते रहे।
पुलिस के अनुसार, हत्या का मास्टरमाइंड शुभम तिवारी आलोक बनकर उसकी गर्लफ्रेंड से चैट करता रहा, जिससे किसी को उसकी मौत का शक न हो। लेकिन, वह गर्लफ्रेंड से मिलने से बचता रहा। वीडियो और वॉयस कॉल भी रिसीव नहीं करता था। वहीं, आलोक की हत्या के कुछ देर बाद तीनों दोस्त उसके फ्लैट में बाहर से ताला लगाकर निकल गए।
उस समय लाश ठिकाने नहीं लगाई थी। करीब 16 घंटे बाद 11 अगस्त की शाम तीनों दोस्त दोबारा फ्लैट पर पहुंचे। यहां लाश को बैग में भरने की तैयारी की। इसके लिए उन्होंने उसके हाथ-पैर तक तोड़ दिए। इसके बाद शाम करीब 5 बजे तीनों लाश वाला बैग लेकर फ्लैट से बाहर निकले।
अब पढ़िए आरोपी शुभम का कबूलनामा पुलिस पूछताछ में शुभम ने बताया- फ्लैट से निकलने के बाद हम तीनों लाश को कार में लेकर करीब 5 घंटे तक घूमते रहे। हमारा मकसद ऐसी जगह तलाशना था, जहां लाश को आसानी से ठिकाने लगाया जा सके। किसी को शक भी न हो। रात करीब 10 बजे सुनसान जगह देखकर हम लोग सोहागी पहाड़ी पहुंचे।
यहां बैग में भरी आलोक की लाश फेंक दी और लौट आए। गर्लफ्रेंड से मिलने की बात पर कहता था- मैं अभी बिजी हूं लाश ठिकाने लगाने के बाद भी मैंने साजिश खत्म नहीं की। आलोक का आईफोन अपने पास रख लिया। फिर उसी फोन से आलोक बनकर उसकी गर्लफ्रेंड से चैट करता रहा। करीब 20 दिन तक गर्लफ्रेंड को यही लगता रहा कि वह आलोक से चैट कर रही है।
जब वह मिलने की बात करती, तो मैं किसी न किसी बहाने से उसे टाल देता। वीडियो कॉल या वॉयस कॉल आने पर भी रिसीव नहीं करता था। गर्लफ्रेंड जब इसकी वजह पूछती, तो मैं काम में व्यस्त होने की बात कहकर उसे भरोसा दिलाता रहा। यह पूरी कवायद इसलिए की, जिससे आलोक की गुमशुदगी या मौत को लेकर तत्काल किसी को शक न हो।
मास्टरमाइंड महज 12वीं पास, पिता ड्राइवर पुलिस पूछताछ में यह भी सामने आया कि हत्या की साजिश का मास्टरमाइंड शुभम तिवारी महज 12वीं पास है। वह पहले शांतिपुरम में किराए के कमरे में आलोक के साथ रहता था। बाद में काम बेहतर चलने पर आलोक ने धूमनगंज में फ्लैट ले लिया था।
दूसरा आरोपी शुभम यादव भी 12वीं पास है, जबकि तीसरा आरोपी अंकुश पॉलिटेक्निक डिप्लोमा कर चुका है। शुभम तिवारी के पिता ड्राइवर हैं। शुभम यादव के पिता होमगार्ड हैं, जबकि अंकुश के पिता खेती करते हैं। सिर्फ पैसों की खुन्नस नहीं थी हत्या की वजह पुलिस के मुताबिक, आलोक से शुभम की नाराजगी सिर्फ पैसों को लेकर नहीं थी।
जिस लड़की से आलोक की नजदीकी थी, उसकी छोटी बहन के साथ शुभम का अफेयर था। आलोक अपनी प्रेमिका को महंगे गिफ्ट देता था। इसका जिक्र जब वह अपनी छोटी बहन से करती थी, तो वह भी शुभम से महंगे गिफ्ट की मांग करती थी। आर्थिक तंगी की वजह से शुभम उसकी मांग पूरी नहीं कर पाता था। इसको लेकर उसकी प्रेमिका कई बार उसे ताने भी देती थी।
पुलिस इस पहलू को भी हत्या की वजहों में जोड़कर जांच कर रही है। शराब पिलाकर भड़काया, गोली मारकर गला घोंटा शुभम ने बताया- हम तीनों पहले से हत्या की योजना बनाकर 10 अगस्त की रात आलोक के फ्लैट पर पहुंचे थे। प्लानिंग के तहत ही पहले उसे जान-बूझकर ज्यादा शराब पिलाई गई।
रात करीब एक बजे नशे में धुत होने के बाद शुभम यादव ने आलोक को भला-बुरा कहना शुरू किया। इस पर दोनों के बीच कहासुनी होने लगी। जब आलोक आक्रोशित होकर उसे मारने के लिए उठा, तो मैंने पिस्टल निकालकर गोली चला दी। गोली कंधे के नीचे लगी और आलोक जमीन पर गिर पड़ा।
इसके बाद शुभम यादव ने पीछे से उसका मुंह और नाक दबा दिया, जबकि मैंने उसका गला घोंट दिया। फाफामऊ के प्रॉपर्टी डीलर ने दी थी पिस्टल और कार धूमनगंज थाना प्रभारी धनंजय पांडेय ने बताया- पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि हत्या में इस्तेमाल की गई पिस्टल और कार फाफामऊ के विपिन शुक्ला ने उपलब्ध कराई थी।
विपिन प्रॉपर्टी डीलिंग का काम करता है। पुलिस अब उसकी तलाश कर रही है। विपिन ने आरोपियों को पिस्टल और कार किस मकसद से उपलब्ध कराई थी? क्या वह हत्या की साजिश में शामिल था? या आरोपियों की मदद किसी और वजह से की गई? इसकी जांच की जा रही है।
आलोक की लाश का दोबारा पोस्टमॉर्टम होगा मामले में सबसे अहम पेंच पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट को लेकर सामने आया। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने पूछताछ में आलोक को गोली मारने की बात कही है। फोरेंसिक टीम को फ्लैट से खोखा और खून के धब्बों के नमूने भी मिले हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शव काफी क्षतिग्रस्त हालत में बरामद हुआ था।
ऐसे में पोस्टमॉर्टम के दौरान गोली के निशान साफ नहीं हो पाने की संभावना है। अब दोबारा पोस्टमॉर्टम और मेडिकोलीगल जांच से यह साफ करने की कोशिश होगी कि आलोक को गोली लगी थी या नहीं?
उसकी मौत की वास्तविक वजह क्या थी? ----------------------- ये खबर भी पढ़ें.... 27 साल के फोटोग्राफर को दोस्तों ने मार डाला:प्रयागराज में हाथ-पैर तोड़कर बैग में भरी लाश, 62KM दूर मध्यप्रदेश की पहाड़ी पर फेंका प्रयागराज में 27 साल के फोटोग्राफर की 3 दोस्तों ने हत्या कर दी। पहले उसको गोली मारी, जो कंधे पर लगी।
फिर हाथों से गला घोंट दिया। इसके बाद हाथ-पैर तोड़कर उसे एक बैग में भर दिया। आरोपी बैग को करीब 62 किलोमीटर दूर मध्यप्रदेश के रीवा ले गए। वहां सोहागी पहाड़ी पर फेंक दिया। पढ़ें पूरी खबर...
📡 स्रोत: NewsData.io