हेमंत सरकार ने एक आंदोलन खत्म करने के लिए दूसरा बड़ा संकट क्यों पैदा कर दिया? दोषी और निर्दोष को एक तराजू में तौलने का खतरा

Hemant Soren government Decision Controversy: अगर हमने भ्रष्टाचार किया है तो कार्रवाई कीजिए, लेकिन हमने अपनी प्रतिभा से नौकरी ली है तो हमारी गलती क्या है?... सरकार से सीधा सवाल उन कर्मचारियों का है जो मंगलवार को भारी बारिश में भी रांची में प्रोजेक्ट भवन के बाहर प्रदर्शन करने पहुंचे थे.
वास्तविक तथ्य तो यही है कि अगर किसी भर्ती परीक्षा में पेपर लीक, धांधली, भ्रष्टाचार या किसी तरह की अनियमितता हुई है, तो दोषियों पर कठोर कार्रवाई होनी ही चाहिए. लेकिन, सबसे बड़ा सवाल तो यह है कि क्या पूरी परीक्षा और उससे हुई नियुक्तियों को एक झटके में खत्म करना न्याय का सही तरीका है?
मान लीजिए 100 अभ्यर्थियों में 5 ने गड़बड़ी की... तब क्या बाकी 95 की मेहनत भी अपने आप अपराध बन जाएगी? जाहिर है कटघरे में हेमंत सरकार खड़ी है और सवाल भी बेहद सीधा और स्पष्ट है कि- एक पक्ष के छात्रों को न्याय या ईमानदार अभ्यर्थियों के साथ अन्याय?
📡 स्रोत: News18 Hindi