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हिमाचल के बद्दी में घटिया दवाईयां बन रहीं:8 महीने में 237 दवाओं के सैंपल फेल, इनमें बुखार-पेन किलर से लेकर हार्ट-डायबिटीज की भी

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 25 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
हिमाचल के बद्दी में घटिया दवाईयां बन रहीं:8 महीने में 237 दवाओं के सैंपल फेल, इनमें बुखार-पेन किलर से लेकर हार्ट-डायबिटीज की भी

देश के बड़े फार्मा हब में शामिल बद्दी में घटिया क्वालिटी की दवाईयां बनाई जा रही हैं, इसका खुलासा इनके सैंपलों की जांच से हुआ है। इसी साल जनवरी से लेकर अगस्त तक, 8 महीने में 237 दवाईयों के सैंपल फेल हो गए। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) की ड्रग रिपोर्टों में इसका खुलासा हुआ।

सीरियस बात ये है कि ये दवाएं सामान्य बुखार और पेन किलर से लेकर हार्ट, ब्लड प्रेशर और डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होती हैं। दैनिक भास्कर ने पड़ताल की तो पता चला कि कुछ कंपनियों के दवाओं के सैंपल तो बार-बार फेल हो रहे हैं। इन्हें जांच में नॉट ऑफ स्टैंडर्ड क्वालिटी (NSQ) पाया गया।

इस पूरे मामले में हिमाचल का ड्रग कंट्रोलर डिपार्टमेंट भी सवालों के घेरे में है। उनका दावा है कि कंपनी की दवा सबस्टैंडर्ड पाए जाने पर संबंधित बैच को वापस मंगाया जाता है। कंपनी का लाइसेंस परमानेंटली सस्पेंड किया जा सकता है। सवाल ये है कि अगर इनके पास ये अधिकार है तो फिर जिन दवाओं के बार-बार सैंपल फेल हुए, उन्हें बनाने पर रोक क्यों नहीं लगाई गई, उन कंपनियों का लाइसेंस सस्पेंड क्यों नहीं हुआ??

किन कंपनियों के दवाओं के सैंपल फेल हुए, वह दवाईयां किस बीमारी के इलाज के काम आती हैं, इन्हें खाने से सेहत पर क्या असर, ये जानने के लिए पढ़िए पूरी रिपोर्ट… एक ही इंजेक्शन के सैंपल 7 बार फेल हिमाचल में सबसे ज्यादा लगभग 650 फॉर्मा यूनिट अकेले बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ (BBN) क्षेत्र में हैं।

दवा उद्योग का हिमाचल के निर्यात में भी लगभग 15 हजार करोड़ रुपए का योगदान रहता है। ‘दैनिक भास्कर एप’ की पड़ताल में सामने आया कि मार्टिन एंड ब्राउन कंपनी के 8 महीने में करीब 13 सैंपल फेल हुए। जनवरी के ड्रग अलर्ट में रैबेप्राजोल सोडियम इंजेक्शन फेल पाया गया। इसके बाद इसी इंजेक्शन के अलग-अलग बैच फरवरी, मार्च, अप्रैल, मई, जुलाई और अगस्त में भी फेल पाया गया।

हीलर्स लैब कंपनी के भी इस साल अब तक करीब 15 सैंपल फेल हुए हैं। इनमें ज्यादातर पैरासिटामोल की दवाएं शामिल हैं। जनवरी में पैरासिटामोल टैबलेट्स IP-500 का सैंपल फेल हुआ। इसके बाद मार्च, मई, जून, जुलाई और अगस्त में भी कंपनी की पैरासिटामोल दवाएं सबस्टैंडर्ड पाई गईं। इन 8 महीनों में हीलर्स लैब की पैरासिटामोल के करीब 13 अलग-अलग बैच के सैंपल फेल पाए गए।

इसी तरह, अन्य कंपनियों की दवाओं

📡 स्रोत: Dainik Bhaskar

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💡 पृष्ठभूमि (Background)

यह खबर हिमाचल प्रदेश के बद्दी जिले में घटिया गुणवत्ता की दवाइयों के उत्पादन पर प्रकाश डालती है, जहाँ 8 महीनों में 237 दवाओं के सैंपल फेल हुए। यह विषय भारत के फार्मा उद्योग की गुणवत्ता नियंत्रण और सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़ा है। खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दर्शाती है कि प्रमुख फार्मा हब में भी दवाओं की गुणवत्ता पर निगरानी की कमी है, जिससे रोगी सुरक्षित और प्रभावी उपचार नहीं पा सकते। आम जनता पर इसका असर गंभीर हो सकता है—बुखार, दर्द, हृदय और डायबिटीज जैसी बीमारियों के इलाज में असफल दवाओं

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