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हिमाचल में बनी 82 दवाएं फेल:इनमें हृदय रोग, दर्द और बुखार की दवाएं भी; सेवन से मरीज की जान भी जा सकती है, देखिए पूरी लिस्ट

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 22 अगस्त 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
हिमाचल में बनी 82 दवाएं फेल:इनमें हृदय रोग, दर्द और बुखार की दवाएं भी; सेवन से मरीज की जान भी जा सकती है, देखिए पूरी लिस्ट

हिमाचल प्रदेश में बनी 82 दवाओं और देशभर की 240 मेडिसिन के सैंपल फेल हुए हैं। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) की जांच में ये दवाएं गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतरीं। देशभर में फेल हुए कुल सैंपलों में करीब एक तिहाई हिस्सेदारी हिमाचल में बनी दवाओं की है।

फेल हुए 82 सैंपलों में 52 दवाएं अकेले बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ (BBN) के उद्योगों में बनी हैं। इससे देश के बड़े फार्मा हब BBN में दवाओं की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हुए हैं।

फेल दवाओं में हार्ट, बुखार, दर्द, बैक्टीरियल इन्फेक्शन, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, गैस-एसिडिटी, एनीमिया, एलर्जी, त्वचा रोग और उल्टी के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाएं शामिल हैं। अनजाने में इनके इस्तेमाल से मरीज की मौत भी हो सकती है। विटामिन और कैल्शियम की दवाओं के सैंपल भी फेल हुए है।

फेल सैंपलों में टैबलेट के अलावा इंजेक्शन, सिरप, क्रीम और जैल भी शामिल हैं। CDSCO की ओर से जारी जुलाई के ड्रग अलर्ट में शामिल हिमाचल में निर्मित दवाएं बद्दी, बरोटीवाला, नालागढ़, पांवटा साहिब, कालाअंब, मोगीनंद, मैहतपुर, बाथू-हरोली, नूरपुर, संसारपुर टैरेस, कुमारहट्टी और सुबाथू स्थित उद्योगों में बनी हैं।

एंटीबायोटिक भी गुणवत्ता जांच में फेल बैक्टीरियल संक्रमण के इलाज में इस्तेमाल होने वाली कई एंटीबायोटिक दवाएं भी जांच में फेल हुई हैं। इनमें एमोक्सिसिलिन, एमोक्सिसिलिन-पोटेशियम क्लैवुलनेट, सेफिक्सिम, सेफपोडोक्सिम, ऑफ्लॉक्सासिन और एजिथ्रोमाइसिन से जुड़े उत्पाद शामिल हैं।

इन दवाओं का इस्तेमाल गले, कान, श्वसन तंत्र, त्वचा और मूत्र मार्ग समेत कई तरह के बैक्टीरियल संक्रमण के इलाज में किया जाता है। हार्ट, BP और डायबिटीज की दवाएं भी सूची में हृदय रोगों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली क्लोपिडोग्रेल-एस्पिरिन, एटोरवास्टेटिन-क्लोपिडोग्रेल और कार्वेडिलोल के सैंपल भी गुणवत्ता जांच में फेल हुए हैं।

इन दवाओं का इस्तेमाल ब्लड क्लॉट का खतरा कम करने, कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित करने, हाई BP और हृदय रोगों के इलाज में किया जाता है। इसके अलावा डायबिटीज में इस्तेमाल होने वाली ग्लिक्लाजाइड समेत कुछ अन्य शुगर की दवाएं भी मानकों पर खरी नहीं उतरीं।

क्रीम-जैल में भी खामियां त्वचा रोगों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली क्रीम व जैल के सैंपल भी फेल हुए हैं। एक बेटामेथासोन वैलेरेट ऑइंटमेंट

📡 स्रोत: Dainik Bhaskar

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