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हिमाचल की घेपन झील पर देश का पहला अत्याधुनिक एकीकृत अर्ली वार्निंग सिस्टम स्थापित

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 18 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
हिमाचल की घेपन झील पर देश का पहला अत्याधुनिक एकीकृत अर्ली वार्निंग सिस्टम स्थापित

हिमाचल प्रदेश में ग्लेशियर झीलों से बाढ़ के संभावित खतरे से निपटने के लिए राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। लाहौल-स्पीति में समुद्र तल से करीब 13,450 फुट की ऊंचाई पर स्थित घेपन झील में अत्याधुनिक अर्ली वार्निंग सिस्टम स्थापित किया गया है। सी-डैक पुणे की मदद से स्थापित इस सिस्टम के जरिए झील में होने वाले बदलावों की लगातार निगरानी की जाएगी और खतरे के संकेत मिलने पर संबंधित अधिकारियों को तुरंत अलर्ट भेजा जाएगा।

डॉ. पुष्पेंद्र राणा के अनुसार, तीन स्वतंत्र लेकिन एकीकृत यूनिट्स वाला यह सुपरकंप्यूटर आधारित सिस्टम देश में अपनी तरह की पहली व्यवस्था है। इसकी खासियत यह है कि किसी एक यूनिट को नुकसान पहुंचने पर बाकी दो यूनिट्स स्वतंत्र रूप से काम करती रहेंगी। सिस्टम की बैटरी क्षमता इतनी है कि बादल छाए रहने की स्थिति में भी यह 15 से 20 दिन तक काम कर सकता है।

झील के भीतर लगाए गए सेंसर और जीपीएस ट्रैकर पानी में होने वाली हलचल की जानकारी देंगे। सामान्य परिस्थितियों में हर 10 से 15 मिनट में डेटा प्राप्त होगा, जबकि आपात स्थिति में कुछ ही सेकंड में सूचना मिल सकेगी। झील के किनारे स्थापित स्वचालित मौसम केंद्र करीब 14 पर्यावरणीय मानकों को रिकॉर्ड करेंगे।

इसके अलावा, कैमरों के जरिए झील की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जाएगी। बड़े हिमस्खलन और असामान्य तेज आवाजों को रिकॉर्ड करने की व्यवस्था भी की गई है।सिस्टम से प्राप्त डेटा का सी-डैक के सुपरकंप्यूटर के माध्यम से विश्लेषण किया जाएगा। संभावित खतरे के संकेत मिलते ही संबंधित अधिकारियों के मोबाइल फोन पर अलर्ट भेजा जाएगा, जिससे समय रहते आपदा प्रबंधन की कार्रवाई शुरू की जा सके।राज्य सरकार अब प्रदेश की अन्य तीन चिन्हित ग्लेशियर झीलों पर भी ऐसे सिस्टम स्थापित करने की योजना पर काम कर रही है।

इसके लिए घेपन झील में स्थापित व्यवस्था से मिलने वाले अनुभवों और अन्य राज्यों में विकसित तकनीकों का इस्तेमाल किया जा सकता है। इस पहल से हिमाचल के उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में ग्लेशियर झीलों से उत्पन्न संभावित बाढ़ के खतरे की निगरानी और समय रहते चेतावनी देने की व्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

बाइट — डॉ. पुष्पेंद्र राणा, निदेशक एवं विशेष सचिव, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।