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हिमाचल ज्ञान विज्ञान समिति ने मनाया राष्ट्रीय वैज्ञानिक चेतना दिवस

लेखक: AIR Shimla अंतिम अपडेट: 21 अगस्त 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति

डॉ. नरेन्द्र दाभोलकर के शहीदी दिवस पर डॉ. एम.पी. परमेश्वरन को दी श्रद्धांजलि अगस्त 21, शिमला (हिमाचल प्रदेश): हिमाचल ज्ञान विज्ञान समिति द्वारा सामाजिक सुधारक एवं वैज्ञानिक चेतना के प्रबल समर्थक डॉ. नरेन्द्र दाभोलकर के शहीदी दिवस के अवसर पर रोटरी टाउन हॉल शिमला में राष्ट्रीय वैज्ञानिक चेतना दिवस का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम में ऑल इंडिया पीपुल्स साइंस नेटवर्क के पूर्व महासचिव एवं मैकेनिकल इंजीनियर दीप भट्टाचार्य ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की।

मुख्य अतिथि दीप भट्टाचार्य ने डॉ. नरेन्द्र दाभोलकर को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि वर्ष 2013 में अंधविश्वास, रूढ़िवाद और अवैज्ञानिक सोच के खिलाफ जनजागरूकता अभियान चलाने के कारण उनकी हत्या कर दी गई। उन्होंने कहा कि दाभोलकर ने समाज को तर्क, प्रमाण और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के आधार पर सोचने के लिए प्रेरित किया।

उन्होंने वर्तमान शिक्षा एवं स्वास्थ्य नीतियों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जन विज्ञान आंदोलन के सामने आज अवैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देना एक बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा कि शिक्षा में वैज्ञानिक दृष्टिकोण और इतिहास की समझ को मजबूत करने की आवश्यकता है।

भारत ज्ञान विज्ञान समिति के संस्थापक सचिव, प्रखर चिंतक एवं वैज्ञानिक डॉ. एम.पी. परमेश्वरन को भी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। वक्ताओं ने जन विज्ञान आंदोलन को मजबूत करने तथा विज्ञान, तकनीक, विकास और लोकतांत्रिक मूल्यों को आम जनता से जोड़ने में डॉ. परमेश्वरन के योगदान को याद किया।

भारत ज्ञान विज्ञान समिति के महासचिव डॉ. ओम प्रकाश भूरेटा ने कहा कि डॉ. परमेश्वरन ने जन विज्ञान आंदोलन को नई दृष्टि और कार्यशैली प्रदान की। उन्होंने विज्ञान एवं तकनीक को आम लोगों के सरोकारों से जोड़ते हुए विकास की वैकल्पिक सोच को आगे बढ़ाया। उनके विचारों और कार्यों को आगे बढ़ाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

समिति के राज्य सचिव सत्यवान पुण्डीर ने कहा कि डॉ. एम.पी. परमेश्वरन का निधन जन विज्ञान एवं प्रगतिशील आंदोलन के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने अपना पूरा जीवन विज्ञान को आम जनता से जोड़ने तथा वैज्ञानिक सोच और वैकल्पिक विकास की अवधारणा को मजबूत करने के लिए समर्पित किया।

कार्यक्रम में समिति के पूर्व राज्य सचिव विश्वनाथ शर्मा, सेवानिवृत्त हीरानंद शांडिल्य, समता की राष्ट्रीय संयोजिका सुमित्रा चंदेल तथा राज्य अध्यक्ष प्रो. टी.डी. वर्मा ने भी डॉ. एम.पी. परमेश्वरन के साथ अपने अनुभव साझा किए।

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