राज्य

हिमाचल में रोपवे निर्माण की अधिक लागत बड़ी चुनौती, पीपीपी मोड पर परियोजनाएं आगे बढ़ाएगी सरकार: मुख्यमंत्री

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 2 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति

अगस्त 02, शिमला (हिमाचल प्रदेश): हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में बुधवार को प्रश्नकाल के दौरान रोपवे निर्माण का मुद्दा गूंजा। सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायकों ने प्रदेश में रोपवे परियोजनाओं की स्थिति, इनकी लागत, निजी निवेश और पर्यटन स्थलों को रोपवे से जोड़ने को लेकर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से सवाल किए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल में रोपवे सरकार की प्राथमिकता में हैं, लेकिन इनकी लागत बहुत अधिक होने के कारण कई परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में दिक्कत आ रही है। उन्होंने कहा कि सरकार पीपीपी और ईएपी मोड पर रोपवे बनाने के लिए तैयार है और निजी निवेशकों का स्वागत किया जाएगा।

मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि शिमला में रोपवे लगाने की योजना पर भी काम करने की कोशिश की गई थी। टेंडर के आकलन में इसकी लागत करीब 2,700 करोड़ रुपये आई। अधिक लागत के कारण इस परियोजना पर फैसला नहीं हो सका और इसे रद्द कर दिया गया। उन्होंने कहा कि पिछली कैबिनेट बैठक में पीपीपी और ईएपी मोड पर जाने की बात रखी गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि रोपवे की ट्राली खाली चलने की स्थिति में भी तीन-चार यात्रियों के खर्च का भार सरकार को उठाना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि सरकार ऐसी व्यवस्था करने पर विचार कर रही है, जिसमें रोपवे के पीपीपी मोड की अवधि 30 से 35 साल तक सीमित की जा सके।

उन्होंने रोपवे निर्माण में निजी निवेशकों से हिमाचल में आने का आह्वान करते हुए कहा कि सरकार उनका स्वागत करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार के पास करीब 1,200 करोड़ रुपये की राशि उपलब्ध है और निजी निवेशकों को शिमला आने के लिए आमंत्रित किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि सरकार की कोशिश है कि रोपवे के माध्यम से प्रदेश के उन क्षेत्रों को जोड़ा जाए, जहां अभी पहुंच सीमित है। पर्यटन की दृष्टि से अनछुए क्षेत्रों को रोपवे से जोड़ने पर जोर दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल पर्यटन के लिहाज से खूबसूरत प्रदेश है और रोपवे के माध्यम से ऐसे क्षेत्रों तक पहुंच बनाई जा सकती है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में दुनिया के कई हिस्सों की तुलना में बड़ा स्नोबाउंड क्षेत्र है। यदि वन संरक्षण अधिनियम यानी एफसीए की मंजूरी के कारण परियोजनाओं में देरी हो रही है तो सरकार इस प्रक्रिया में तेजी लाने का प्रयास करेगी। चुराह के विधायक हंसराज ने चंबा में प्रस्तावित तीन रोपवे परियोजनाओं का मुद्दा उठाया।

उन्होंने मुख्यमंत्री से पूछा कि क्या इन तीनों परियोजनाओं को आगे बढ़ाने का प्रस्ताव सरकार के स्तर पर किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि रोपवे परियोजनाओं के प्रस्तावों में कई पहलुओं को देखना पड़ता है। कई मामलों में समझौता ज्ञापन यानी एमओयू करने की बात होती है।

उन्होंने कहा कि रोपवे सरकार की प्राथमिकता में हैं, लेकिन केवल अध्ययन के लिए पैसा खर्च करना सरकार के लिए संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि निजी निवेशक आते हैं तो सरकार उनका स्वागत करेगी और उन्हें जमीन उपलब्ध कराने पर भी विचार किया जा सकता है, जहां वे होटल बना सकें।

भाजपा विधायक सुधीर शर्मा ने हिमानी चामुंडा रोपवे की स्थिति को लेकर सवाल किया। उन्होंने पूछा कि क्या सरकार क्योरी से बिलिंग को जोड़ने वाली योजना पर भी विचार कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उषा कंपनी ने शिमला और हिमानी चामुंडा दोनों परियोजनाएं ली थीं, लेकिन चार साल तक मामला चलता रहा और कोई काम नहीं हुआ।

उन्होंने कहा कि निजी निवेशक अपना पैसा लगाकर रोपवे बनाए, सरकार ऐसे निवेशकों का खुले मन से स्वागत करेगी। चिंतपूर्णी के विधायक राकेश कालिया ने चिंतपूर्णी रोपवे को सुविधाजनक बनाने का मुद्दा उठाया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस सुझाव पर उपमुख्यमंत्री से चर्चा की जाएगी और सरकार रोपवे के लिए खुले मन से तैयार है।

विधायक केवल सिंह पठानिया ने धर्मशाला-नड्डी जिपलाइन का मुद्दा उठाते हुए पूछा कि पीपीपी मोड में परियोजना के लिए निवेशक क्यों नहीं आ रहे हैं और इसकी फॉरेस्ट क्लीयरेंस कब तक मिल जाएगी। उन्होंने धर्मशाला रोपवे की वर्तमान स्थिति के बारे में भी जानकारी मांगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में पर्यटन की बहुत संभावनाएं हैं और रोपवे के माध्यम से अनछुए क्षेत्रों तक पहुंच बनाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि एफसीए की मंजूरी के कारण देरी हो रही है तो प्रक्रिया में तेजी लाई जाएगी। सरकार पर्यटन की दृष्टि से रोपवे को बढ़ावा देगी।

इससे पहले अर्की के विधायक संजय अवस्थी के मूल सवाल के जवाब में उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने प्रदेश में रोपवे परियोजनाओं की स्थिति की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि एशियन डेवलपमेंट बैंक से प्राप्त ऋण और मदद से प्रदेश में कोई रोपवे परियोजना स्वीकृत या निर्माणाधीन नहीं है।

उन्होंने बताया कि प्रदेश में पीपीपी मोड के तहत छह रोपवे परियोजनाएं हैं। उद्योग मंत्री ने बताया कि कुल्लू जिले में पलचान-रोहतांग रोपवे की अनुमानित लागत 340 करोड़ रुपये है और इसे अक्तूबर 2028 तक पूरा करने की निर्धारित समय सीमा है।

परियोजना के पहले चरण में टावरों का निर्माण पूरा हो चुका है और वर्तमान में रोप डालने का काम चल रहा है। दूसरे चरण में टावरों का निर्माण कार्य जारी है, जबकि तीसरे चरण का निर्माण कार्य शुरू होना बाकी है। उन्होंने बताया कि कुल्लू जिले में बिजली महादेव रोपवे की अनुमानित लागत 278 करोड़ रुपये है।

इसे पूरा करने की प्रारंभिक समय सीमा जुलाई 2026 रखी गई थी। वर्तमान में इसका काम स्थगित है। परियोजना को लेकर स्थानीय विरोध और राष्ट्रीय हरित अधिकरण यानी एनजीटी में मामला लंबित होने के कारण 24 दिसंबर 2025 को इसे फोर्स मेजर घोषित किया गया था। उद्योग मंत्री ने कहा कि फिलहाल यह परियोजना लंबित है।

उद्योग मंत्री ने बताया कि हमीरपुर जिले में बाबा बालक नाथ मंदिर रोपवे की अनुमानित लागत 65 करोड़ रुपये है। इसे दिसंबर 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य है। परियोजना के स्टेज-1 की मंजूरी मिल चुकी है और स्टेज-2 की प्रक्रिया चल रही है। इसका निर्माण कार्य दिसंबर 2026 में शुरू होने की उम्मीद है।

उन्होंने कहा कि कुल्लू जिले में कुल्लू ढालपुर-पीज रोपवे की अनुमानित लागत 80 करोड़ रुपये है और इसे दिसंबर 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इस परियोजना के लिए स्टेज-1 और एफसीए की मंजूरी मिल चुकी है। स्टेज-2 की प्रक्रिया चल रही है और निर्माण कार्य दिसंबर 2026 में शुरू होने की उम्मीद है।

हर्षवर्धन चौहान ने बताया कि कांगड़ा जिले में नड्डी व्यूपॉइंट धर्मशाला जिपलाइन की अनुमानित लागत 7 करोड़ 41 लाख रुपये है। इसे फरवरी 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य है। वर्तमान में इसकी एफसीए मंजूरी की प्रक्रिया चल रही है और निर्माण कार्य दिसंबर 2026 में शुरू होने की उम्मीद है।

M
Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।