हीरे की अंगूठी से भगवान ने खरीदा था प्रसाद! फिर व्यापारी ने लिया ऐसा संकल्प 5 पीढ़ियों से निभा रहा परिवार
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सागर में करीब 150 साल पहले भगवान ने मारवाड़ी का भेष धरकर हीरे की अंगूठी देकर गुजिया खरीदी थी. इस घटना के बाद व्यापारी ने मंदिर में भोग लगाने का संकल्प लिया, जिसे उनका परिवार पांच पीढ़ियों से निभा रहा है. रिछारिया प्रतिष्ठान पर आज भी शुद्ध घी से शुद्ध पाक तरीके से डेढ़ सौ साल पुराने स्वाद में मिठाइयां बनाई जाती हैं
📡 स्रोत: News18 Hindi MP