ICC कैसे तय करती है बल्लेबाजों और गेंदबाजों की रैंकिंग, किस फॉर्मूले का होता है इस्तेमाल?
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आईसीसी ने आज (2 सितंबर) अपनी ताजा रैंकिंग जारी की. टेस्ट गेंदबाजी रैंकिंग में जसप्रीत बुमराह को एक स्थान का नुकसान हुआ, जो अब दूसरे से तीसरे स्थान पर पहुंच गए.
मिचेल स्टार्क पहले स्थान पर बने हुए हैं, मैट हेनरी एक पायदान ऊपर आकर दूसरे स्थान पर पहुंच गए. ओली रॉबिन्सन ने 6 स्थान ऊपर छलांग लगाकर टॉप-5 में एंट्री ली. इसके आलावा अन्य किसी फॉर्मेट की किसी अन्य केटेगरी के टॉप-3 में कोई बदलाव नहीं हुआ.
आईसीसी प्रत्येक हफ्ते पुरुष और महिला क्रिकेट की टीम और खिलाड़ियों की रैंकिंग अपडेट करता है. महिला क्रिकेट की रैंकिंग मंगलवार और बुधवार को पुरुष क्रिकेट की रैंकिंग अपडेट होती है. बता दें कि क्रिकेट में 3 फॉर्मेट होते हैं, टेस्ट, वनडे और टी20. इन फॉर्मेट में टीमों की रैंकिंग के आलावा खिलाड़ियों की रैंकिंग होती है.
प्रत्येक फॉर्मेट में बल्लेबाज, गेंदबाज और ऑलराउंडर की रैंकिंग होती है. चलिए आपको बताते हैं कि आईसीसी इन रैंकिंग को किस आधार पर तय करता है. रैंकिंग किसलिए होती है? आईसीसी रैंकिंग प्रणाली के जरिए ये पहचान होती है कि कौन सा खिलाड़ी बेहतर है.
जैसे नंबर-1 के खिलाड़ी से समझा जाता है कि उस फॉर्मेट में वह वर्तमान में सर्वश्रेष्ठ प्लेयर है, उससे ऊपर कोई नहीं. नंबर-2 का खिलाड़ी नंबर-3 के खिलाड़ी से बेहतर है और नंबर-1 से कम. खिलाड़ियों की रैंकिंग में उनके करियर को तो ध्यान में रखा जाता है, लेकिन अधिक जोर वर्तमान में किए गए प्रदर्शन पर होता है.
रैंकिंग में किसे शामिल किया जाता है? निर्धारित समय में एक मैच खेलना अनिवार्य होता है, तभी उसे रैंकिंग में शामिल किया जाता है. टेस्ट के लिए 12 से 15 महीने तो वनडे और टी20 के लिए 9 से 12 महीने का समय होता है.
आईसीसी ने अपनी वेबसाइट में उदाहरण देकर समझाया है कि जैसे पार्थिक पटेल 2008 में भारतीय टेस्ट टीम से बाहर हो गए तो 2009 में उन्हें रैंकिंग से भी बाहर कर दिया गया. हालांकि उनकी
📡 स्रोत: ABP Live Khel
💡 पृष्ठभूमि (Background)
इस खबर में आईसीसी की नवीनतम रैंकिंग और रैंकिंग तय करने के फॉर्मूले पर चर्चा है। यह विषय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के खिलाड़ियों के प्रदर्शन को आंकने का वैज्ञानिक तरीका दर्शाता है। यह खबर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि रैंकिंग से खिलाड़ी की विश्वसनीयता, चयन और प्रायोजन पर असर पड़ता है। इसके अलावा, रैंकिंग में बदलाव से राष्ट्रीय टीम के चयन और रणनीति पर भी असर पड़ता है। आम जनता के लिए यह क्रिकेट के प्रति रुचि बढ़ाता है और खिलाड़ियों के प्रदर्शन को बेहतर समझने में मदद करता है।